सादे कागज से EVM तक: यूपी के चुनावों में 70 साल में कितना बदला मतदान का तरीका

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यूपी के चुनावों में 70 साल में कितना बदला मतदान का तरीका

UP Election: उत्तर प्रदेश में मतदान का तरीका पिछले 70 सालों में काफी बदल गया है. आजादी के बाद सादे कागज से शुरू हुई वोटिंग प्रक्रिया, बैलेट पेपर के दौर से होते हुए आज EVM तक पहुंच चुकी है. जानिए यह चुनावी यात्रा कैसी रही.

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UP Election: उत्तर प्रदेश में आज चुनाव के दौरान EVM के जरिए मतदान होता है, लेकिन प्रदेश की चुनावी व्यवस्था हमेशा ऐसी नहीं थी. आजादी के बाद शुरुआती चुनावों में मतदान की प्रक्रिया बेहद साधारण थी. मतदाता सादे कागज के जरिए अपना वोट दर्ज करते थे और इसके बाद मतों की हाथ से गिनती होती थी. उस समय चुनाव परिणाम सामने आने में काफी समय लगता था. मतदान केंद्रों तक चुनाव सामग्री पहुंचाना और मतों को सुरक्षित रखना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती हुआ करता था.

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1957 में विधानसभा चुनाव के साथ बदली व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ मतदान व्यवस्था में भी बदलाव हुआ. 1957 के विधानसभा चुनाव के दौर में प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिह्न वाले डिब्बों की व्यवस्था देखने को मिली. मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशी से जुड़े डिब्बे में अपना मत डालते थे. यह व्यवस्था आज की मतदान प्रणाली से बिल्कुल अलग थी. उस दौर में चुनाव कराना काफी श्रमसाध्य था और मतदान के बाद मतों की गिनती में भी लंबा समय लगता था.

1962 में यूपी में आया बैलेट पेपर का दौर

वर्ष 1962 उत्तर प्रदेश की चुनावी व्यवस्था के लिहाज से अहम रहा. इसी दौर में प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिह्न वाले बैलेट पेपर के जरिए मतदान की व्यवस्था शुरू हुई. मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने मुहर लगाकर मतपत्र को मतपेटी में डालते थे. यह प्रक्रिया कई दशकों तक चुनावों का प्रमुख हिस्सा बनी रही. हालांकि, लाखों मतपत्रों की छपाई, उन्हें मतदान केंद्रों तक पहुंचाना, सुरक्षित रखना और बाद में हाथ से उनकी गिनती करना बड़ी प्रशासनिक चुनौती थी.

बैलेट पेपर से जुड़ी थीं कई चुनौतियां

यूपी जैसे बड़े राज्य में बैलेट पेपर से चुनाव कराना अपने आप में व्यापक प्रशासनिक कवायद थी. विधानसभा और लोकसभा चुनावों के साथ बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर मतपत्र पहुंचाने पड़ते थे. मतदान के बाद मतपेटियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और फिर मतगणना केंद्रों पर उनकी गिनती करना पड़ता था. कई बार गलत जगह मुहर लगने या एक से अधिक निशान होने के कारण मतपत्र अमान्य भी हो जाते थे. इससे मतगणना प्रक्रिया और जटिल हो जाती थी.

2007 में पहली बार EVM से यूपी विधानसभा चुनाव

EVM के दौर ने उत्तर प्रदेश की चुनावी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया. 1999 में गोवा विधानसभा चुनाव में EVM के प्रयोग के बाद देश के अन्य राज्यों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ा. 2004 के लोकसभा चुनाव में देशभर में EVM से मतदान हुआ. इसके बाद वर्ष 2007 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव EVM के जरिए कराया गया. इसके साथ प्रदेश में मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक तकनीकी और तेज होती गई. चुनाव परिणाम भी कम समय में सामने आने लगे.

अब पंचायत चुनाव में EVM की बड़ी तैयारी

उत्तर प्रदेश में अब पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर EVM की तैयारी फिर चर्चा में है. राज्य निर्वाचन आयोग ने 1.40 लाख बैलेट यूनिट और 55 हजार कंट्रोल यूनिट खरीदने के लिए ई-टेंडर जारी किया है. इसके साथ बैटरी, इंटरकनेक्टिंग केबल और अन्य जरूरी उपकरण भी खरीदे जाएंगे. ऐसे में यूपी की चुनावी यात्रा सादे कागज से शुरू होकर बैलेट पेपर और फिर EVM तक पहुंच चुकी है. आयोग की यह तैयारी आने वाले स्थानीय चुनावों के लिए तकनीकी व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है.

यह भी देखें: UP पंचायत चुनाव से पहले आयोग की तैयारी ने बढ़ाई हलचल, जानिए बैलेट पेपर या EVM, कैसे होगा मतदान


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