UP पंचायत चुनाव से पहले आयोग की तैयारी ने बढ़ाई हलचल, जानिए बैलेट पेपर या EVM, कैसे होगा मतदान
बैलेट पेपर से EVM तक, बदलता गया मतदान का तरीका
UP Panchayat chunav: उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की खरीद प्रक्रिया तेज कर दी है. 1.40 लाख बैलेट यूनिट और 55 हजार कंट्रोल यूनिट की खरीद के लिए ई-टेंडर जारी किया गया है. जानिए इस प्रक्रिया और EVM के इस्तेमाल से जुड़ी अहम जानकारी.
UP Panchayat chunav: उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं. आयोग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में चुनाव कराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और उनसे जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए ई-टेंडर जारी किया था. प्रस्तावित खरीद में 1.40 लाख बैलेट यूनिट और 55 हजार कंट्रोल यूनिट शामिल हैं. कंट्रोल यूनिट के साथ बैटरी, इंटरकनेक्टिंग केबल, एक्सेसरीज और अतिरिक्त स्पेयर बैटरियां भी खरीदने का प्लान शामिल है.
बैलेट पेपर से शुरू हुआ पंचायत चुनावों में मतदान का दौर
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की चुनावी प्रक्रिया लंबे समय तक बैलेट पेपर पर आधारित रही है. शुरुआती दौर में ग्रामीण मतदाता कागज के मतपत्र पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के चुनाव चिह्न के सामने मुहर लगाकर मतदान करते थे. इसके बाद मतपत्रों को मतदान केंद्रों से सुरक्षित तरीके से स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाया जाता था और निर्धारित प्रक्रिया के तहत हाथ से उनकी गिनती की जाती थी. पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में उम्मीदवार होने के कारण कई बार मतपत्रों की छपाई, वितरण, सुरक्षा और मतगणना अपने आप में बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन जाती थी.
बैलेट पेपर व्यवस्था में क्या थीं चुनौतियां?
बैलेट पेपर से मतदान की व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह था कि मतदाता कागज पर उम्मीदवार और चुनाव चिह्न देखकर अपना वोट दर्ज करता था. हालांकि, इस व्यवस्था में बड़ी संख्या में मतपत्र छापने, उन्हें अलग-अलग मतदान केंद्रों तक पहुंचाने और मतदान के बाद सुरक्षित रखने की जरूरत पड़ती थी. मतगणना भी कर्मचारियों द्वारा हाथ से की जाती थी, जिससे अधिक समय और मानव संसाधन की आवश्यकता होती थी. मतपत्रों की वैधता को लेकर भी कई बार सवाल सामने आते थे, जैसे गलत जगह मुहर लगना या एक से अधिक निशान लग जाना.
EVM ने बदली मतदान और मतगणना की प्रक्रिया
EVM के इस्तेमाल से मतदान प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलती है. मशीन के जरिए वोट रिकॉर्ड होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया भी बैलेट पेपर की तुलना में तेज हो सकती है. बड़ी संख्या में कागज के मतपत्रों की छपाई, परिवहन और सुरक्षित भंडारण की आवश्यकता कम होती है. इससे चुनाव प्रबंधन में लगने वाले समय और मानव संसाधन को भी कम किया जा सकता है. हालांकि, पंचायत चुनावों में EVM के इस्तेमाल को लेकर अंतिम व्यवस्था और तकनीकी मानकों का पालन राज्य निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगा.
पंचायत चुनाव में EVM का इस्तेमाल क्यों अहम?
पंचायत चुनावों में एक साथ ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में सीटों के लिए मतदान कराया जाता है. ऐसे में चुनाव सामग्री की उपलब्धता और मतदान प्रक्रिया का कुशल प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है. 1.40 लाख बैलेट यूनिट और 55 हजार कंट्रोल यूनिट की प्रस्तावित खरीद इसी तैयारी का हिस्सा है. आयोग की कोशिश है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले जरूरी मशीनों और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली जाए, ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की तकनीकी या लॉजिस्टिक समस्या न आए.
कहां मिलेगी टेंडर से जुड़ी पूरी जानकारी?
EVM और अन्य चुनावी उपकरणों की खरीद से संबंधित विस्तृत नियम, तकनीकी शर्तें और निविदा की जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है. इसके अलावा राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी चुनाव से संबंधित सूचनाएं देखी जा सकती हैं. आयोग की यह तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में लाखों मतदाताओं तथा बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों को शामिल किया जाता है. ऐसे में चुनावी मशीनरी को पहले से तैयार रखना आयोग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है.
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