PM Kisan: यूपी में हजारों किसानों की किस्त अटकी! इस जिले में कहीं आपका नाम तो नहीं, 30 सितंबर तक नहीं किया ये काम तो बढ़ सकती है मुश्किल
30 सितंबर तक पूरा करना होगा सत्यापन
PM Kisan Installment: PM किसान की 3000 से अधिक किस्तें कानपुर के किसानों की जमीन के दस्तावेजों में गड़बड़ी के चलते अटक गई हैं. 30 सितंबर तक सत्यापन पूरा न होने पर पात्रता प्रभावित हो सकती है.
PM Kisan Installment: कानपुर जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ लेने वाले 3 हजार से अधिक किसानों की किस्त फिलहाल अटक गई है. इन किसानों के डाटा में जमीन के स्वामित्व, म्यूटेशन और पहचान से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं. इनमें 1,450 आवेदन सत्यापन के लिए लंबित हैं, जबकि 774 लाभार्थियों का डाटा सस्पेक्टेड श्रेणी में दर्ज है. करीब 795 मामले विरासत से जुड़े डाटा के लंबित होने से संबंधित हैं.
30 सितंबर तक पूरा करना होगा सत्यापन
शासन ने अब सभी लंबित मामलों का 30 सितंबर तक शत-प्रतिशत सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं. सत्यापन के बाद किसानों का डाटा दुरुस्त कर संबंधित रिपोर्ट एप पर अपलोड करनी होगी. समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर संबंधित किसानों की पात्रता प्रभावित होने की आशंका है. कानपुर में करीब 2.18 लाख किसान पीएम-किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं.
जमीन और म्यूटेशन की गड़बड़ी बनी वजह
पंजीकरण और डाटा जांच के दौरान कई किसानों की भूमि संबंधी जानकारी में विसंगतियां मिली थीं. कहीं पूर्व भूमि स्वामी की पहचान अधूरी है तो कहीं म्यूटेशन से जुड़ी जानकारी में समस्या सामने आई है. इन्हीं मामलों की जांच के लिए शासन ने संबंधित जिलों को सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई प्रकरण अब भी लंबित हैं.
यूपी में 15 लाख से ज्यादा मामले
प्रदेशभर में पीएम-किसान के 15,35,858 मामले ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनमें डाटा अधूरा या संदिग्ध पाया गया है. इनमें 10,19,117 मामले पूर्व भूमि स्वामी की पहचान अधूरी होने से जुड़े हैं. इसके अलावा 2,74,742 मामलों में विरासत के अलावा किसी अन्य कारण से म्यूटेशन दर्ज है, जबकि 2,41,999 मामलों में पूर्व और वर्तमान दोनों भूमि स्वामियों का डाटा दर्ज है.
फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जाएगा अभियान
शासन ने पीएम-किसान के लंबित मामलों के सत्यापन को फार्मर रजिस्ट्री अभियान के साथ जोड़ने का फैसला किया है. इसके लिए ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार किया जाएगा. किसानों की भागीदारी और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से संदिग्ध डाटा का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा, ताकि पात्र किसानों का रिकॉर्ड जल्द दुरुस्त किया जा सके.
रोजाना होगी प्रगति की निगरानी
30 सितंबर तक सभी लंबित मामलों का सत्यापन पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी. जिला स्तर पर उप कृषि निदेशक और तहसील स्तर पर तहसीलदार इसकी साप्ताहिक समीक्षा करेंगे, जबकि ब्लॉक से जिला स्तर तक रोजाना प्रगति की निगरानी होगी. उप निदेशक कृषि आरएस वर्मा ने बताया कि शासन के निर्देश पर लंबित डाटा संबंधित तहसीलों को भेज दिया गया है और जल्द सत्यापन पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी. यह भी देखें: UPPCS और UPSC है सपना तो जल्दी करें ये काम, यूपी सरकार दे रही निःशुल्क कोचिंग के साथ बहुत सारी सुविधाएं, जानें आवेदन का पूरा प्रोसेस
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