जीआई टैग में उत्तर प्रदेश का नया इतिहास, बनारसी साड़ी से कन्नौज के इत्र तक को मिला वैश्विक सम्मान
जीआई टैग में उत्तर प्रदेश का नया इतिहास
Up News: उत्तर प्रदेश ने देश में सर्वाधिक जीआई टैग हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. वाराणसी की सिल्क साड़ी से लेकर कन्नौज के इत्र तक, राज्य के अद्वितीय उत्पादों को अब वैश्विक मंच पर पहचान मिल रही है. यह उपलब्धि स्थानीय कारीगरों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है.
Up News: उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश में सर्वाधिक जीआई टैग पाने वाले राज्य का गौरव प्राप्त किया है. वाराणसी की प्रसिद्ध सिल्क साड़ी, कन्नौज का सुगंधित इत्र, लखनऊ की चिकनकारी, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन और भदोही के विश्व प्रसिद्ध कालीन जैसे अद्वितीय पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है. राज्य सरकार की योजना के निरंतर प्रयासों ने स्थानीय हुनर और सदियों पुरानी कला को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दी.
स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के आर्थिक सशक्तीकरण को मिली नई उड़ान
जीआई टैग मिलने से स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और लघु उद्यमियों के आर्थिक सशक्तीकरण को एक नई गति मिली है. इससे न केवल उनके उत्पादों की नकल और फर्जीवाड़ा रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक बाजारों में उनकी मांग और साख भी तेजी से बढ़ेगी. विभिन्न जिलों में स्थित ग्रामीण कारीगर अब अपनी अनूठी हस्तकला का उचित मूल्य प्राप्त कर रहे हैं. सरकार द्वारा दी जा रही वित्तीय सहायता, आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर ब्रांडिंग सुविधाओं के कारण व्यापार को बल मिला.
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना से हस्तशिल्प और निर्यात को नई रफ्तार
उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) नीति ने जीआई टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस दूरदर्शी पहल के माध्यम से राज्य के हर जिले की खास पहचान को नया आधार मिला है और निर्यात के अवसरों में भारी बढ़ोतरी हुई है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के साथ हुए समझौतों के कारण ग्रामीण इलाकों के कारीगर अब सीधे विदेशी ग्राहकों तक अपने सामान पहुंचा रहे हैं, जिससे उनकी आय में सुधार हुआ.
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