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Droupadi murmu UP visit : लखनऊ में डिवाइन हार्ट फाउंडेशन के कार्यक्रम में राष्ट्रपति का लाइव संबोधन …

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी. राष्ट्रपति बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगी और यहां से सीधे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ जाएंगी. यहां दीक्षांत समारोह में 16 मेधावियों को अपने हाथों मेडल देंगी. करीब 55 मिनट तक समारोह में शामिल होने के बाद वे सर्किट हाउस आएंगी. यहां विश्राम और भोजन के बाद बाबतपुर एयरपोर्ट से दिल्ली रवाना हो जाएंगी. राष्ट्रपति के आगमन को लेकर प्रशासन और पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं. वाराणसी में हाई अलर्ट है.

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लखनऊ में डिवाइन हार्ट फाउंडेशन (इंडिया) के कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का लाइव 

लखनऊ में डिवाइन हार्ट फाउंडेशन (इंडिया) के कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संबोधित कर रही हैं.

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लखनऊ पहुंचीं

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लखनऊ पहुंच गई हैं. उनके आगमन पर एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उप मुख्यमंत्री केपी मौर्या ने स्वागत किया.

काशी भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि काशी भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र रही है और और वर्तमान में भी यहां के संस्थान आधुनिक ज्ञान विज्ञान के संवर्धन में अपना योगदान दे रहे हैं. लगभग 1300 वर्ष पहले जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की यात्रा भी तभी पूरी हुई, जब काशी में आकर उन्होंने विद्वानों के साथ शासत्रार्थ किया. उन्होंने कहा कि 250 साल पहले यहां काशी विद्वत परिषद की स्थापना की गई थी. यह परिषद निरंतर सक्रिय रही है. संस्कृत भाषा में रचित किसी भी शास्त्र के विषय में इस परिषद का निर्णय सर्वमान्य होता है. ऐसे सामाजिक ज्ञान केंद्र की परंपरा के अनुरूप इस विद्यापीठ के आचार्य और विद्यार्थियों को भी अपने संस्थान के गौरव को निरंतर समृद्ध करना चाहिए.

काशी नगरी भारतीय संस्कृति की कलातीत धरोहर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि एक प्रबल लोक मान्यता है कि काशी निरंतर अस्तित्व में बनी रहने वाली विश्व की प्राचीनतम नगरी है. बाबा विश्वनाथ और मां गंगा के आशीर्वाद से युक्त नगरी काशी सबको आकर्षित करती रही है और करती रहेगी. राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें स्मरण है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी को अपने निर्वाचन क्षेत्र के रूप में चुना था तब उन्होंने भी यही कहा था कि मुझे मैं मां गंगा ने बुलाया है. राष्ट्रपति ने कहा कि जिस तरह मां गंगा भारतीय संस्कृति की जीवन धारा है और भारतीय ज्ञान अध्यात्म और आस्था की संवाहक है, उसी तरह काशी नगरी भारतीय संस्कृति की कलातीत धरोहर है.

काशी विद्यापीठ के नाम के पीछे स्वाधीनता संग्राम के प्रति सम्मान करने की भावना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि काशी विद्यापीठ के प्रथम प्रबंधन बोर्ड के सदस्यों में महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय, जमनालाल बजाज, जवाहरलाल नेहरू, आचार्य नरेंद्र देव और पुरुषोत्तम दास टंडन जैसे इतिहास निर्माता शामिल थे. यहां के असाधारण अध्यापकों सूची में आचार्य नरेंद्र देव, डॉक्टर संपूर्णानंद आदि विद्वानों ने सदैव याद रखे जाएंगे. राष्ट्रपति ने कहा कि ब्रिटिश शासन की सहायता और नियंत्रण से दूर रहते हुए भारतीय संसाधनों से निर्मित काशी विद्यापीठ का नामकरण महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ करने के पीछे हमारे स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की भावना निहित है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं- काशी विद्यापीठ असहयोग आंदोलन का जीवंत प्रतीक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने काशी विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में कहा कि 10 फरवरी 1921 को इस विद्यापीठ का उद्घाटन करते हुए महात्मा गांधी ने कहा था जितने सरकारी विद्यालय हैं, उनमें हमें विद्या नहीं लेनी है. हम उस झंडे के नीचे नहीं रह सकते, जिसको सलाम करने के लिए हमारे छात्रों को मजबूर किया जाता है. उन्होंने कहा कि यदि हमारे विद्यालय खोलेंगे तो विद्या अपने आप पवित्र हो जाएगी. उन्होंने कहा कि यह विद्यापीठ असहयोग आंदोलन से उत्पन्न संस्था के रूप में हमारे महान स्वाधीनता संग्राम का जीवंत प्रतीक है.

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Sanjay Singh

लेखक के बारे में

By Sanjay Singh

working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.

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