शाहजहांपुर शहीद संग्रहालय: जहां जीवंत हैं अमर शहीदों की यादें और 1857 से लेकर 1947 तक की संघर्ष गाथा

Published by : संवाद न्यूज Updated At : 05 Jan 2022 6:32 PM

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जीएफ कॉलेज के सामने छावनी परिषद मैदान पर बना यह संग्रहालय मंगलवार से लोगों के लिए खोला गया है. प्रदेश के वित्त, संसदीय और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने लोकार्पण किया है.

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Shahjahanpur Sahid Museum: काकोरी केस के क्रांतिकारी प्रेमकृष्ण खन्ना ने कभी ‘बिस्मिल संग्रहालय’ की परिकल्पना की थी, जो शहीद संग्रहालय के रूप में साकार हुई. भव्य संग्रहालय में कदम रखने वाले आजादी के लिए अंग्रेजी हूकुमत से अमर शहीदों के संघर्ष और उनके बलिदानों से रूबरू होकर निकलेंगे तो उनकी छाती गर्व से फूली होगी. शरीर रोमांचित होगा और आंखें शहीदों के आचमन के लिए श्रद्धाजल से भरी होंगी. जीएफ कॉलेज के सामने छावनी परिषद मैदान पर बना यह संग्रहालय मंगलवार से लोगों के लिए खोला गया है. प्रदेश के वित्त, संसदीय और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने लोकार्पण किया है.

शहीद संग्रहालय गैलरी में 1857 से लेकर 1947 तक के इतिहास का सिलसिलेवार वर्णन है. इनके अलावा काकोरी ट्रेन कांड, अंग्रेजों से लोहा लेती झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, लाल किले पर स्वतंत्रता का जश्न मनाते लोग, इलाहाबाद जेल में कैद ठाकुर रोशन सिंह के किताब पढ़ने का दृश्य, काकोरी एक्शन से संबंधित अदालत का दृश्य आदि को भी प्रस्तुत किया गया है. शहीद संग्रहालय में लाइब्रेरी भी है, जिसमें इतिहास से जुड़ी किताबें हैं. इनमें स्वाधीनता संग्राम, काकोरी कांड, अमर शहीदों के लिखी किताबें और रचनाएं हैं.

ओपन थियेटर में होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

अमर शहीदों के जिले की बड़ी पहचान रंगमंच के लिए भी है. गांधी भवन प्रेक्षागृह में रंगमंच के कलाकार आए दिन नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हैं. शहीद संग्रहालय में भी ओपन थियेटर का निर्माण हुआ है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम हो सकेंगे. थियेटर में 250 लोगों के बैठने की व्यवस्था और कलाकारों के लिए ग्रीन रूम भी है. संग्रहालय के ठीक सामने ही फव्वारा भी बनाया गया है. इसके आसपास पौधरोपण कर सौंदर्यीकरण किया गया है. संग्रहालय की गेट पर सेना के दो टैंक रखे गए हैं, जो यहां आने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे.

केंद्र और प्रदेश सरकार ने दिया सहयोग

छावनी परिषद के नामित सदस्य अवधेश दीक्षित ने बताया कि शहीद संग्रहालय के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 5 करोड़ और राज्य सरकार ने 4 करोड़ दिए हैं. शहीद संग्रहालय की भूमि छावनी परिषद की है, जिसको तत्कालीन रक्षामंत्री पारेकर और मंत्री सुरेश खन्ना के प्रयास सी लैंड में कन्वर्ट कराकर आवंटित किया गया था.

उद्योगों और पर्यटन स्थलों के मॉडल रखे गए

संग्रहालय में जिले के उद्योगों, पर्यटन स्थलों और अन्य प्रमुख स्थानों के मॉडल बनाए गए हैं. जो आकर्षण का केंद्र रहेंगे. प्रमुख रूप से ओसीएफ, केआर पेपर मिल, रिलायंस थर्मल पॉवर, हनुमत धाम, रामचंद्र मिशन आश्रम का मॉडल रखा गया है. शहीद संग्रहालय में संजोई स्मृतियों और स्वाधीनता संग्राम से जुड़े इतिहास को जानने, समझने और देखने के लिए कभी भी जाया जा सकता है. नवनिर्मित शहीद संग्रहालय में 26 जनवरी तक ही निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा. उसके बाद छावनी परिषद की ओर से तय शुल्क पर टिकट लेना होगा. यह जानकारी वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान दी थी.

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