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उत्तरप्रदेश : न हो सरकार की किरकिरी, योगी ने बजट से पहले बुलाई आपात कैबिनेट बैठक

Updated at : 16 Feb 2018 10:18 AM (IST)
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उत्तरप्रदेश : न हो सरकार की किरकिरी, योगी ने बजट से पहले बुलाई आपात कैबिनेट बैठक

बजट में युवाओं और किसानों पर रहेगा फोकस दस बजे कैबिनेट की बैठकहरीश तिवारी लखनऊ: उत्तर प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब बजट से पहले सरकार को कैबिनेट की अहम बैठक बुलानी पड़ रही है. असल में मुख्यमंत्री बजट में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं चाहते हैं, जिससे सरकार […]

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बजट में युवाओं और किसानों पर रहेगा फोकस

दस बजे कैबिनेट की बैठक

हरीश तिवारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब बजट से पहले सरकार को कैबिनेट की अहम बैठक बुलानी पड़ रही है. असल में मुख्यमंत्री बजट में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं चाहते हैं, जिससे सरकार की किरकिरी हो. अगर कोई संसोधन करना हो तो बजट से पहले हो जाए. लिहाजा उन्होंने कैबिनेट की बैठक बुलाई है ताकि मंत्रियों से अंतिम बार सलाह मशविरा किया जा सके और बजट में कोई कमी न रहे.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार आज अपना दूसरा बजट पेश करेगी. ऐसा माना जा रहा है कि बजट में पूरा फोकस युवा, किसान और गांवों पर होगा. केंद्र सरकार के बजट में ज्यादातर फोकस गांव और किसानों पर था. लिहाजा योगी सरकार के बजट में भी कुछ ऐसी ही तस्तीर देखने को मिलेगी. योगी बजट को लेकर कितने संजीदा हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बजट से पहले ही कैबिनेट बैठक बुलाई है. कैबिनेट की बैठक सुबह 10 बजे होगी. दरअसल मंशा ये है कि बजट के आखिरी क्षण भी अगर किसी संशोधन की जरूरत पड़े तो उसे किया जा सके.

वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को अपने बजट भाषण को अंतिम रूप दिया. सरकार की कोशिश खर्च कम करने और आय के श्रोत को बढ़ाने की होगी. इसके अलावा किसानों की आय दोगुनी करने, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर होगा. ऐसा माना जा रहा है कि इस बजट में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का दबाव होगा. पिछले बजट में सरकार ने किसानों का कर्ज मांफ किया था. यूं तो बजट हर बार की तरह ज्यादा बड़े आकार में होगा, लेकिन इसके सामने योजनाओं को जमीन पर उतारने की बड़ी चुनौती भी होगी. पिछली बार योगी सरकार ने जब अपना पहला बजट पेश किया था, तब संकल्प पत्र के वादों का उस पर भारी दबाव था. कर्जमाफी से लेकर वेतन आयोग की सिफारिशें खजाने पर भारी पड़ रही थी. इस बार का बजट 4 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर सकता है. जबकि पिछली बार का बजट 3.84 लाख करोड़ का था.

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