पहली जांच में अटक गई थी भर्ती,166.4 से 169.6 हुई हाइट, आखिर मेडिकल में कौन आया था? जुड़वां भाइयों का खेल हुआ बेनकाब

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जुड़वां भाइयों का भर्ती फर्जीवाड़ा बेनकाब

UP Police Bharti : उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान जुड़वां भाइयों ने फर्जीवाड़ा करने की कोशिश की। एक भाई ने दूसरे की जगह मेडिकल परीक्षा दी, लेकिन लंबाई में 3.2 सेंटीमीटर के अंतर ने पूरा खेल बिगाड़ दिया।

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UP Police Bharti: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस भर्ती की शारीरिक मानक परीक्षा के दौरान दो जुड़वां भाइयों का फर्जीवाड़ा सामने आया है. आगरा निवासी अभ्यर्थी भूपेंद्र की पहली जांच में लंबाई 166.4 सेंटीमीटर मिली थी. मानक पूरा नहीं होने पर वह अयोग्य हो गया. इसके बाद दोबारा जांच में उसकी जगह उसका जुड़वां भाई भूपेश पहुंच गया. दूसरी बार लंबाई 169.6 सेंटीमीटर निकली. 3.2 सेंटीमीटर के इस अंतर ने अधिकारियों को शक में डाल दिया. पहचान की जांच और फिंगरप्रिंट मिलान में पूरा मामला खुल गया.

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पहली जांच में अटक गई भर्ती

29 अगस्त को भूपेंद्र की शारीरिक नापजोख हुई. उसकी लंबाई 166.4 सेंटीमीटर दर्ज की गई. छाती की माप 79 सेंटीमीटर थी. निर्धारित मानक के मुताबिक लंबाई कम होने पर उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया. इसके बाद भूपेंद्र ने दोबारा नापजोख कराने के लिए अपील की. यही अपील दोनों भाइयों के प्लान का आधार बन गई.

दूसरी बार मेडिकल में पहुंचा दूसरा भाई

पुलिस के मुताबिक, दोबारा जांच के लिए भूपेंद्र की जगह उसका जुड़वां भाई भूपेश पहुंच गया. दोनों की शक्ल एक जैसी थी. यही समानता उनके लिए सबसे बड़ा फायदा थी. दूसरी जांच में जब लंबाई नापी गई तो आंकड़ा 169.6 सेंटीमीटर आया. यानी पहली जांच के मुकाबले लंबाई 3.2 सेंटीमीटर ज्यादा थी. अधिकारियों को यहीं गड़बड़ी की बू आ गई.

3.2 सेंटीमीटर ने खोल दिया शक

पहली और दूसरी जांच में इतना अंतर देखकर अधिकारियों ने फोटो का मिलान किया. लेकिन दोनों जुड़वां भाइयों की शक्ल काफी मिलती थी. इसलिए तस्वीर से तुरंत सच्चाई पकड़ में नहीं आई. इसके बाद अभ्यर्थी की पहचान की जांच की गई. फिंगरप्रिंट का मिलान कराया गया तो मामला साफ हो गया. दूसरी बार मेडिकल कराने पहुंचा युवक भूपेंद्र नहीं था. वह उसका जुड़वां भाई भूपेश था. यानी चेहरा एक था, लेकिन पहचान अलग थी.

ऐसे बनाई थी पूरी प्लानिंग

पुलिस के मुताबिक, भूपेंद्र को पता था कि उसकी लंबाई भर्ती के मानक से कम है. दोनों भाइयों ने इसी कमी को दूर करने के लिए योजना बनाई. पहली जांच के बाद भूपेंद्र अपना सामान लेकर बाहर निकल गया. इसके बाद भूपेश उसी तरह के कपड़े और सामान के साथ पुलिस लाइन पहुंचा. योजना थी कि भूपेश की ज्यादा लंबाई दर्ज हो जाएगी. इसके बाद वह वहां से निकल जाएगा और भूपेंद्र दोबारा अपनी जगह ले लेगा. दोनों को उम्मीद थी कि एक जैसी शक्ल होने के कारण पहचान नहीं हो पाएगी. लेकिन लंबाई के आंकड़े ने अधिकारियों का ध्यान खींच लिया.

बायोमेट्रिक जांच ने कर दिया खेल खत्म

अधिकारियों का शक बढ़ने के बाद पहचान की जांच की गई. फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं हुआ. इसके बाद साफ हो गया कि दूसरी बार मेडिकल के लिए पहुंचा युवक अभ्यर्थी नहीं है. पूछताछ में सामने आया कि वह भूपेंद्र का जुड़वां भाई भूपेश है. इस तरह नौकरी पाने के लिए बनाई गई दोनों भाइयों की योजना सामने आ गई.

दोनों भाइयों को किया गया गिरफ्तार

मामला खुलने के बाद पुलिस ने परिसर के बाहर मौजूद भूपेंद्र को भी पकड़ लिया. दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस लाइन के एसआई ईश्वर सिंह की तहरीर पर दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. कोतवाली प्रभारी अरुण कुमार द्विवेदी के मुताबिक, दोनों ने जुड़वां होने और चेहरे की समानता का फायदा उठाकर भर्ती प्रक्रिया को धोखा देने की कोशिश की. पुलिस ने दोनों के पास से दो मोबाइल, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, एटीएम कार्ड, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं.

जिस समानता पर था भरोसा, वही नहीं बचा पाई

दोनों भाइयों ने शायद सोचा था कि एक जैसा चेहरा पहचान में सबसे बड़ी रुकावट बनेगा. लेकिन भर्ती प्रक्रिया में दर्ज आंकड़ों ने अधिकारियों को सतर्क कर दिया. 166.4 से 169.6 सेंटीमीटर की छलांग ने शक पैदा किया और पहचान की जांच ने पूरा खेल सामने ला दिया. जुड़वां होने का फायदा उठाकर भर्ती में सेंध लगाने की कोशिश आखिरकार फिंगरप्रिंट जांच के सामने टिक नहीं सकी.

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