थकान और कमजोरी को न करें नजरअंदाज! आगरा में 60% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित,  जानिए बचाव और सही आहार का तरीका

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आगरा में 60% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित

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आगरा मंडल की आधी से अधिक महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है. यह लेख एनीमिया के लक्षणों, गर्भावस्था में इसके बढ़ते खतरे और बचाव के प्रभावी तरीकों पर प्रकाश डालता है.

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Agra Division Anemia Crisis: आगरा मंडल में एनीमिया महिलाओं की सेहत के लिए एक खामोश लेकिन गंभीर खतरा बनता जा रहा है. थकान और कमजोरी जैसे शुरुआती लक्षणों को आम समझकर नजरअंदाज करने की भूल न केवल महिलाओं के जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को भी जोखिम में डाल रही है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र की आधी से अधिक महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं.

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आगरा में 59.4% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित

आंकड़ों के मुताबिक आगरा जिले में 15-49 वर्ष की 59.4 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि 61.8 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में भी इसकी पुष्टि हुई है. मथुरा में 63 प्रतिशत, मैनपुरी में 57.8 प्रतिशत और फिरोजाबाद में 57.1 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं. जिला महिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशु के अनुसार, एनीमिया केवल आयरन की कमी से नहीं होता, बल्कि फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 और विटामिन-ए की कमी भी इसकी वजह बन सकती है.

गर्भावस्था में बढ़ जाता है खतरा

गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है. इससे प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, मातृ मृत्यु, समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले बच्चे के जन्म का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं को थकान और कमजोरी जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नियमित जांच, आयरन की गोलियों और संतुलित आहार पर ध्यान देने की सलाह दी है.

आयरन वाले खाद्य पदार्थों के साथ विटामिन-सी भी जरूरी

जिला अस्पताल की डायटीशियन ललितेश शर्मा ने बताया कि एनीमिया से बचाव के लिए पालक, मेथी, सरसों, चना, राजमा, बाजरा, ज्वार, गुड़, तिल और खजूर को आहार में शामिल किया जा सकता है. नींबू, आंवला, संतरा, अमरूद और टमाटर जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में आयरन के अवशोषण को तीन गुना तक बढ़ा सकते हैं. वहीं, भोजन के तुरंत बाद चाय-कॉफी लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें मौजूद टैनिन और फाइटेट्स आयरन के अवशोषण में बाधा डालते हैं. दूध और कैल्शियम को भी आयरन युक्त भोजन के साथ सीधे लेने से बचने की सलाह दी गई है.

आयरन की गोलियों से बढ़ा हीमोग्लोबिन

एनीमिया से जूझ रहीं कुछ महिलाओं में सही खानपान, दवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की काउंसिलिंग से सुधार भी सामने आया है. बोदला निवासी आयशा ने बताया कि गर्भावस्था के पांचवें महीने में उनका हीमोग्लोबिन 7.9 ग्राम था, जो आयरन की गोलियों, उचित आहार और काउंसिलिंग के बाद आठवें महीने में बढ़कर 10 ग्राम हो गया. वहीं, मनोरमा का हीमोग्लोबिन 8 ग्राम था, जो इलाज, पौष्टिक आहार और नियमित दवाओं से प्रसव के समय 12 ग्राम पहुंचा और उन्होंने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत नियमित रूप से आयरन की गोलियां वितरित की जा रही हैं. गंभीर मामलों में आयरन सुक्रोज के इंजेक्शन भी दिए जा रहे हैं. हालांकि, पोषणयुक्त आहार के प्रति जागरूकता की कमी और कम उम्र में विवाह जैसी सामाजिक चुनौतियां एनीमिया पर नियंत्रण की राह में बाधा बनी हुई हैं.

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