National Milk Day: दूध में छिपा है सेहत का खजाना, सबके लिए इसलिए है जरूरी, समय का रखें ध्यान

National Milk Day 2024
दूध को एक संपूर्ण पौष्टिक आहार के रूप में माना जाता है. आवश्यक सभी पोषक तत्वों का यह एक बहुत अच्छा स्रोत है. यही कारण है कि बच्चा हो या बुजुर्ग, शाकाहारी हो या मांसाहारी सभी को इसका नियमित सेवन जरूर करना चाहिए. यह बेहतर सवास्थ्य का मजबूत आधार बनाता है.
Lucknow News: जब कभी भी सम्पूर्ण आहार की बात होती है, तो सबसे पहले दूध का जिक्र होता है. शाकाहारियों के लिये दूध को इसलिए पूर्ण भोजन माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट और वह सारे विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं जो एक अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरुरी होते हैं. दूध में मौजूद इतने सारे पोषक तत्व और पाचक गुण होने की वजह से इसे आयुर्वेद में एक अलग ही स्थान दिया गया है.
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अजय कुमार के मुताबिक दूध को एक संपूर्ण पौष्टिक आहार के रूप में माना जाता है. आवश्यक सभी पोषक तत्वों का यह एक बहुत अच्छा स्रोत है. यही कारण है कि बच्चा हो या बुजुर्ग, शाकाहारी हो या मांसाहारी सभी को इसका नियमित सेवन जरूर करना चाहिए. यह बेहतर सवास्थ्य का मजबूत आधार बनाता है.
भारत में श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर को हुआ था और उनकी जयंती के मौके को नेशनल मिल्क डे यानी कि राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है. वर्गीज कुरियन ने देश में दूध के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए श्वेत क्रांति की थी. उन्हें मिल्क मैन ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है.
दूध में आवश्यक सभी पोषक कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, फॉसफोरस, आयोडीन, आयरन, पोटेशियम, फोलेट, विटामिन-ए, विटामिन-डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी-12, प्रोटीन, स्वस्थ फैट आदि मौजूद होता है. सामान्य तौर पर दूध मधुर, चिकना, ओज एवं रस आदि धातुओं को बढ़ाने वाला, वात पित्त कम करने वाला, वीर्य को बढ़ाने वाला, भारी और शीतल होता है.
बच्चों के लिए मां का दूध सर्वश्रेष्ठ आहार होता है. छह माह तक के बच्चों को मां के दूध के अलावा और कुछ भी नहीं देना चाहिए. मां का दूध उनके लिए अमृत के समान होता है. जन्म के फौरन बाद बच्चे को मां का पीला, गाढ़ा दूध जरूर पिलाना चाहिए. यह दूध उसे तमाम बीमारियों से बचाने वाले टीके के समान होता है. बच्चा यदि दूध नहीं पी रहा है तो डॉक्टर से सलाह लें. गाय का दूध सभी जानवरों के दूध में सर्वश्रेष्ठ होता है.
दूध का प्रोटीन कंपोनेंट 80 प्रतिशत केसीन से बना होता है. दूध में पाए जाने वाले बीटा केसीन प्रोटीन ए-1 और ए-2 दो प्रकार के होते हैं. यूनाइटेड किंगडम व अन्य देशों से आयात की गई जर्सी गाय के दूध में ए-1 और ए-2 दोनों तरह के बीटा केसीन प्रोटीन पाए जाते हैं. यूरोप से आयातित होल्स्टीन गाय के दूध में ए-1 प्रोटीन होता है. लेकिन, देशी गाय के दूध में सिर्फ ए-2 बीटा केसीन प्रोटीन पाया जाता है. इसलिए देशी गाय का दूध अधिक फायदेमंद होता है.
आयुर्वेद के अनुसार वयस्कों के लिए दूध का सेवन करने का सबसे अच्छा समय सोने से ठीक पहले का है. बच्चों के लिए, दूध सुबह-सुबह लेना फायदेमंद है. रात में दूध पीने से ‘ओजस’ को बढ़ावा मिलता है. ओजस को आयुर्वेद में एक अवस्था के रूप में जाना जाता है, जब आपका पाचन तंत्र सही तरीके से डाइजेशन कर पाता है. गुनगुना दूध पीने से इन्सोमिया में भी राहत मिल सकती है. एक्टिव नहीं होने के कारण आपका शरीर रात में दूध से अधिकतम कैल्शियम बना पाता है.
सुबह का कच्चा दूध यदि उबला नहीं गया है तो वह भारी होता है. इससे पेट में भारीपन और अपच की शिकायत हो सकती हैं. वहीं अगर दूध को बहुत अधिक देर तक उबाल दिया जाए तो भी यह भारी हो जाता है. इसलिए इसे बहुत अधिक देर तक उबाल कर नहीं पीना चाहिए. वजन बढ़ाना हो तो यह दूध लाभदायक होता है. मोटे व्यक्ति को नियमित रूप से केले को दूध के साथ नहीं इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि दूध के साथ केला मिलकर अत्यधिक शीत और भारी हो जाता है. हालांकि यदि वजन बढ़ाना हो तो इसे ले सकते हैं.
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कुछ लोगों को दूध नहीं पचता जिसकी वजह लैक्टोज है. लैक्टोज दूध में पाई जाने वाली एक प्रकार की प्राकृतिक चीनी है, जिसे कुछ लोगों के लिए पचाना मुश्किल होता है. इन लोगों का शरीर, स्वाभाविक रूप से लैक्टेज का उत्पादन नहीं करता है, जो लैक्टोज को तोड़ने के लिए आवश्यक एंजाइम है. इन लोगों के लिए अब ऐसे दूध भी उपलब्ध हैं जिनमें लैक्टोज नहीं है. यह मूल रूप से नियमित दूध में लैक्टेज डालकर उसमें मौजूद लैक्टोज को तोड़कर बनाया जाता है. इसमें रेगुलर दूध के सभी पोषक तत्व होते हैं और लैक्टोज-इनटॉलरेंट लोगों के लिए यह दूध और इससे बने प्रोडक्ट दूध का पोषण और स्वाद पाने का शानदार तरीका है.
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लेखक के बारे में
By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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