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वृन्दावन में होली के रंगों से सराबोर विधवाओं ने तोडी वर्जनाएं

Updated at : 04 Mar 2015 11:51 AM (IST)
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वृन्दावन में होली के रंगों से सराबोर विधवाओं ने तोडी वर्जनाएं

मथुरा : काशी और वृन्दावन की एक हजार से अधिक विधवा महिलाओं ने मंगलवार को वृन्दावन के पुराने पागल बाबा आश्रम में एक-दूसरे पर इतना रंग उडाया कि समाज द्वारा उन्हें पहनाई गई सफेद साडियों का शुभ्र रंग कहीं खो सा गया. देशभर में होली का त्यौहार भले अभी तीन दिन दूर है, लेकिन सदियों […]

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मथुरा : काशी और वृन्दावन की एक हजार से अधिक विधवा महिलाओं ने मंगलवार को वृन्दावन के पुराने पागल बाबा आश्रम में एक-दूसरे पर इतना रंग उडाया कि समाज द्वारा उन्हें पहनाई गई सफेद साडियों का शुभ्र रंग कहीं खो सा गया. देशभर में होली का त्यौहार भले अभी तीन दिन दूर है, लेकिन सदियों से खुशियों के रंगों से महरुम इन विधवाओं के लिए तो होली ही हो ली.सदियों से रंगों और जिंदगी की तमाम खुशियों से महरुम ये महिलाओं लाल-पीले-हरे रंग के अबीर और गुलाल के चटख रंगों से सराबोर हो गईं. काशी की गंगा का आज वृन्दावन की यमुना से यह अनोखा रंगों भरा मिलन हुआ.

वृंदावन के पागल बाबा के आश्रम के प्राचीन भवन में वृन्दावन की विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं के लिए पहली बार सरकारी तौर पर आश्रय सदन स्थापित किया गया था. इसी भवन में भारत की विश्वविख्यात सामाजिक संस्था सुलभ इण्टरनेशनलॅ ने उनके लिए विशेष तौर पर होली मिलन का कार्यक्रम आयोजित किया था. जिसमें शामिल होने के लिए वाराणसी के भी विभिन्न आश्रमों में रहने वाली करीबन 40 विधवा महिलाएं विशेष तौर पर वृन्दावन आई थीं.

कार्यक्रम की कवरेज के लिए देश-विदेश के दर्जनों पत्रकार, फोटो जर्नलिस्ट तथा इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के प्रतिनिधि आए हुए थे. आयोजन को रंगों से पूरी तरह सराबोर करने के लिए विभिन्न रंगों का दस क्विंटल गुलाल और गुलाब और गेंदा के पंद्रह क्विंटल फूलों की पंखुडियों का इंतजाम किया गया था. कार्यक्रम की शुरुआत फागुनी गीतों और नृत्य के साथ हुई और अब तक रंगों के त्यौहार से दूर रहती आ रही महिलाओं ने इस त्यौहार को पूरे उत्साह और शौक के साथ मनाया. उन्होंने गुलाल और फूलों से जीभर होली खेली और अपनी जिंदगी में नए रंग की शुरुआत की.

विधवा महिलाओं के लिए इस तरह की पहल करने वाले सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने कहा कि होली में विधवाओं की भागीदारी सफेद वस्त्रों में लिपटी रहने वाली इन महिलाओं की जिंदगी को बेरंग करने वाली वर्जनाओं के टूटने का प्रतीक है.

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