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गहलोत सरकार ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को बंगला विवाद में दी राहत, आवंटन करने का बदला नियम...

Updated at : 07 Aug 2020 12:38 PM (IST)
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गहलोत सरकार ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को बंगला विवाद में दी राहत, आवंटन करने का बदला नियम...

राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सरकारी बंगला खाली करने के मामले में बड़ी राहत दी है. पूर्व मुख्यमंत्री अब वर्तमान में रह रहीं सरकारी बंगले में आराम से रह सकती हैं. गहलोत सरकार ने इस तरफ कदम उठाते हुए यह तय किया है कि कोई पूर्व सीएम जो विधायक रहेगा उसे टाइप वन श्रेणी का बंगला मिलेगा. इस फैसले से अब सरकार हाईकोर्ट द्वारा निर्णय के अवमानना के आरोप से भी बच जाएगी.

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राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सरकारी बंगला खाली करने के मामले में बड़ी राहत दी है. पूर्व मुख्यमंत्री अब वर्तमान में रह रहीं सरकारी बंगले में आराम से रह सकती हैं. गहलोत सरकार ने इस तरफ कदम उठाते हुए यह तय किया है कि कोई पूर्व सीएम जो विधायक रहेगा उसे टाइप वन श्रेणी का बंगला मिलेगा. इस फैसले से अब सरकार हाईकोर्ट द्वारा निर्णय के अवमानना के आरोप से भी बच जाएगी.

सिविल लाइंस में बंगला नंबर-13 में रहती हैं वसुंध्ररा राजे 

बता दें कि राजे को जयपुर के सिविल लाइंस में सीएम हाउस के नजदीक टाइप वन श्रेणी का ही बंगला नंबर-13 आंवटित है. जिसमें भाजपा नेत्री व राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे 2008 से ही रह रहीं हैं. बतौर सीएम भी 2013 से 2018 तक वसुंधरा राजे इसी बंगला में रहीं.पिछले कुछ दिनों से उनसे बंगला खाली कराने की मांग कुछ नेताओं के द्वारा उठने लगी थी.जिसमें अब राजस्थान सरकार ने ही सिंधिया को राहत दी है.

राजस्थान सरकार ने राजे के बंगले समेत चार बंगलों के लिए किया बदलाव

राजस्थान सरकार ने राजे के बंगले समेत चार बंगलों को सामान्य प्रशासन विभाग से विधानसभा के पूल में डाल दिया है. जिसे पूर्व सीएम, केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे या राज्य मंत्री, तीन बार विधानसभा के सदस्य रहे या फिर राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री और दो बार विधानसभा सदस्य रहे या फिर दो बार सासंद रहे नेताओं को आंवटित किया जा सकेगा.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी बंगला नहीं कराया गया था खाली 

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2019 में पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी बंगले खाली करवाने का आदेश दिया था. उन बंगलों में वसुंधरा राजे का यह सरकारी बंगला भी शामिल था. राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद गहलोत सरकार ने वसुंधरा राजे से बंगला खाली नहीं करवाया था.जबकि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री रहे नेता जगन्नाथ पहाड़िया के बंगले को खाली करवा लिया गया था. वसुंधरा राजे का बंगला खाली नहीं कराने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को अवमानना का नोटिस भी भेजा था. इस मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से 10 सितंबर तक जवाब देने को कहा है. अब इस फैसले के बाद सरकार हाईकोर्ट के निर्णय का अवमानना के आरोप से भी बच सकती है.

सचिन पायलट व हनुमान बेनीवाल ने लगाया था यह आरोप

वहीं राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सीएम गहलोत व वसुंधरा राजे के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगा चुके हैँ. जबकि नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल बंगला खाली नहीं करवाने को लेकर गहलोत पर आरोप लगा चुके हैं. उन्होंने पुर्व सीएम राजे पर पहले यह तक आरोप लगा चुके हैं कि वो बंगले के कारण गहलोत सरकार को बचाने में मदद कर रही हैं.यह बयान उस समय काफी सियासी गरमागरमी का विषय बना जब गहलोत सरकार कांग्रेस खेमे मचे भूचाल से सरकार बचाने की जद्दोजहद कर रही है.

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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