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ओडिशा में किसानों के लिए वरदान बनी खेत तालाब योजना, भू-जल स्तर नियंत्रित करने और मिट्टी संरक्षण में मददगार

Updated at : 16 Aug 2024 1:13 PM (IST)
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farm pond scheme odisha

ओडिशा में खेत तालाब योजना से किसानों के घर आ रही खुशहाली. फोटो : प्रभात खबर

Farm Pond Scheme Odisha: खेत-तालाब कार्यक्रम सुंदरगढ़ के सभी 17 प्रखंडों में चल रहा है. इसके लिए ओडिशा खनिज असर क्षेत्र विकास निगम वित्तीय मदद दे रहा है.

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Farm Pond Scheme: जंगल, पहाड़ और आदिवासी बहुल ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में लोग धान सहित विभिन्न प्रकार की मौसमी फसलें उगाते हैं. सिंचाई के लिए खेती वाली जमीन पर खेत तालाब (फार्म पौंड) खोदे जा रहे हैं. यह किसानों की आजीविका में सुधार करते हुए भू-जल के स्तर को नियंत्रित करने और मिट्टी संरक्षण में विशेष रूप से मददगार बन रहा है.

सुंदरगढ़ के 17 प्रखंडों में चलाया जा रहा खेत-तालाब कार्यक्रम

खेत-तालाब कार्यक्रम सुंदरगढ़ जिले के सभी 17 प्रखंडों में चल रहा है. इसके लिए ओडिशा खनिज असर क्षेत्र विकास निगम (ओम्बाडसी) वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है. यह परियोजना बागवानी निदेशालय और मृदा संरक्षण एवं जलग्रहण विकास निदेशालय के तहत कार्यान्वित की जा रही है. विभागीय अधिकारी मैदानी सर्वेक्षण के बाद लाभुकों को खेत-तालाब निर्माण के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं.

17 प्रखंडों में अब तक बनाये जा चुके हैं 262 खेत तालाब

सुंदरगढ़ जिले में अब तक 262 खेत तालाब बनाये जा चुके हैं. इनमें 238 परियोजनाएं ओडिशा के बागवानी निदेशालय के अधीन हैं, जबकि 24 परियोजनाएं मृदा संरक्षण और जलग्रहण विकास निदेशालय के अधीन हैं. इसके लिए ओम्बाडसी ने वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी है.

खेत तालाब योजना से ओडिशा के गांवों में बढ़ रही हरियाली. फोटो : प्रभात खबर

अनियमित मानसून से बाधित होता है कृषि कार्य

जलवायु परिवर्तन के कारण अक्सर मानसून में अनियमित बारिश होती है. जितनी बारिश होती है, उसका सारा पानी नदियों और समुद्रों में बह जाता है. दूसरी ओर जनसंख्या वृद्धि के कारण भू-जल का उपयोग भी बढ़ रहा है.

विशेषज्ञ दे रहे भू-जल स्तर बढ़ाने का सुझाव

इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए विशेषज्ञ भू-जल स्तर को बढ़ाने का सुझाव दे रहे हैं. इसे देखते हुए ओम्बाडसी फंड की मदद से विभिन्न खनन प्रभावित जिलों में खेत तालाबों, धान बांधों और सौर ऊर्जा संचालित गहरे कुओं के साथ जल संचयन परियोजनाएं की जा रहीं हैं.

क्या कहते हैं योजना के लाभुक

मेरे पास पांच एकड़ जमीन है. पहले सिंचाई सुविधाओं के अभाव में अच्छी खेती नहीं हो पाती थी. अब खेत में तालाब खोदकर विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती कर रही हूं. इससे होने वाली आय के कारण घर परिवार अच्छा से चल रहा है. खेत में तालाब होने के कारण खेत की भूमि को हर समय पानी मिलता रहता है. मैं विभिन्न फसलें बेचकर प्रति वर्ष एक लाख रुपये तक कमाती हूं.

संयुक्ता पटेल, मंगसपुर, टांगरपाली ब्लॉक, सुंदरगढ़, ओडिशा

क्या है खेत तालाब योजना?

सिंचाई के लिए खेती वाली जमीन पर खेत तालाब (फार्म पौंड) खोदे जा रहे हैं. यह किसानों की आजीविका में सुधार करते हुए भू-जल के स्तर को नियंत्रित करने और मिट्टी संरक्षण में विशेष रूप से मददगार बन रहा है.

सुंदरगढ़ जिले में कितने प्रखंडों में चल रही है योजना?

सुंदरगढ़ जिले के सभी 17 प्रखंडों में खेत तालाब योजना चल रही है. अब तक 262 खेत तालाब बनाये जा चुके हैं.

किन-किन विभागों के अधीन हैं योजनाएं?

सुंदरगढ़ जिले की 238 योजनाएं बागवानी निदेशालय के अधीन हैं. 24 योजनाएं मृदा संरक्षण और जलग्रहण विकास निदेशालय के अधीन हैं.

खेत तालाब योजना के लिए पैसे कौन उपलब्ध करा रहा?

ओडिशा में शुरू हुई महत्वाकांक्षी योजना खेत तालाब योजना के लिए ओम्बाडसी ने वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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