मराठवाड़ा में बारिश की कमी से पीने के पानी का संकट, 196 टैंकरों से हो रही वाटर सप्लाई, दो हफ्ते में दोगुने हुए टैंकर

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नल से टपकता पानी (image credit : canva)

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मराठवाड़ा में बारिश की कमी के कारण पेयजल की आपूर्ति के लिए टैंकरों की संख्या दोगुनी हो गई है, वहीं सोयाबीन और कपास जैसी खरीफ फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

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Maharashtra Water Crisis: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में मानसून के दौरान बारिश की कमी के कारण पानी का संकट गहराता दिख रहा है. 20 सितंबर तक मराठवाड़ा में सीजन के औसत के मुकाबले सिर्फ 71% बारिश हुई है. वहीं, पूरे महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 85% रहा. क्षेत्र के बांधों और जलाशयों में पानी का स्टॉक 46.19% दर्ज किया गया है.

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दो हफ्ते में 101 से बढ़कर 196 हुए पानी के टैंकर

बारिश की कमी का असर पेयजल व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मराठवाड़ा में पीने के पानी की सप्लाई के लिए लगाए गए टैंकरों की संख्या 6 सितंबर को 101 थी, जो इस सप्ताह बढ़कर 196 हो गई. यानी करीब दो हफ्ते में टैंकरों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई.

इनमें छत्रपति संभाजीनगर में सबसे ज्यादा 96 टैंकर लगाए गए हैं, जबकि बीड में 70 टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि मराठवाड़ा के आठ जिले बारिश की कमी से प्रभावित हैं.

सोयाबीन, कपास समेत खरीफ फसलों पर असर

बारिश में लंबे समय तक सूखा रहने से मराठवाड़ा की खरीफ फसलों पर भी असर पड़ा है. अधिकारियों के मुताबिक, सोयाबीन और कपास जैसी नकदी फसलों के साथ-साथ मक्का, तुअर और मूंग जैसी फसलें भी बारिश की कमी से प्रभावित हुई हैं.

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 20 सितंबर तक मराठवाड़ा में बुवाई का क्षेत्रफल घटकर 137 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पांच साल का औसत 144 लाख हेक्टेयर था.

किसानों के लिए राहत की मांग

Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष ने बारिश की कमी और किसानों की स्थिति पर चर्चा के लिए विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की है. NCP (SP) नेता रोहित पवार ने कहा कि कई किसानों को पिछले मानसून में हुए फसल नुकसान का मुआवजा अभी नहीं मिला है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल घोषित फसल ऋण माफी के 56 लाख लाभार्थी किसानों में से करीब 12 लाख को ही इसका लाभ मिला है.

वहीं, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्ता भरणे ने कहा कि लंबे समय तक बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर दबाव पड़ा है और प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने प्रभावित किसानों को पर्याप्त सहायता दिए जाने की बात कही.

ये भी पढ़ें: आकाशीय बिजली गिरने से 5 लोगों की मौत, गरज-चमक के साथ 22 सितंबर तक बारिश का अलर्ट

Maharashtra Water Crisis: क्या है पूरा मामला?

  • 20 सितंबर तक मराठवाड़ा में सामान्य से 29% कम बारिश.
  • जलाशयों में पानी का स्टॉक 46.19%.
  • पेयजल के टैंकर 101 से बढ़कर 196 हुए.
  • छत्रपति संभाजीनगर में 96 और बीड में 70 टैंकर.
  • सोयाबीन, कपास, मक्का, तुअर और मूंग जैसी फसलों पर असर.
  • बुवाई क्षेत्र पांच साल के औसत 144 लाख हेक्टेयर से घटकर 137 लाख हेक्टेयर..
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