महाराष्ट्र MLC चुनाव : पहली बार चुनाव लड़ रहे उद्धव ठाकरे मुंबई शहर में बिना कार के करोड़पति

पहली बार चुनाव लड़ रहे महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray)ने संपत्ति घोषित किया है. दिलचस्प बात यह है कि उद्धव ठाकरे के चुनावी हलफनामे से पता चलता है कि वो करोड़पति हैं, लेकिन, उनके पास कार नहीं है.
देश में कोरोनावायरस संकट है और इससे सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है. इन सबके बीच महाराष्ट्र विधान परिषद की कुल नौ सीटों पर 21 मई को चुनाव होने जा रहे हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चुनाव के लिए नॉमिनेशन भी कर दिया है और उनका निर्विरोध चुनाव जीतना तय माना जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि उद्धव ठाकरे के चुनावी हलफनामे से पता चलता है कि वो करोड़पति हैं, लेकिन, उनके पास कार नहीं है. फिलहाल मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ना तो विधानसभा के सदस्य हैं और ना ही विधान परिषद के.
पहली बार चुनाव लड़ रहे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास 143 करोड़ 26 लाख रुपये की संपत्ति है. उन पर 15.50 करोड़ का कर्ज भी है.दो बंगलों के मालिक उद्धव ठाकरे पर 23 मामले भी दर्ज हैं. भारत निर्वाचन आयोग को दिये गये चुनावी हलफनामे में उद्धव ठाकरे ने अपनी संपत्ति और आय के बारे में बताया है.उनकी पत्नी रश्मि की आमदनी कई कारोबारों से होती है.उनके पास करीब 65 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति है.वो शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ की संपादक भी हैं.
अब बात करते हैं उद्धव ठाकरे के खिलाफ दर्ज शिकायतों की. उनके खिलाफ पुलिस में 23 शिकायतें दर्ज हैं. इनमें 14 मामले सामना और दोपहर का सामना में सामग्री या कार्टून से संबंधित है. उद्धव ठाकरे ने दोनों बेटों को खुद पर निर्भर नहीं बताया है. लिहाजा हलफनामे में उनकी संपत्ति और देनदारियों का जिक्र नहीं है. बताते चलें कि उद्धव ठाकरे के बड़े बेटे आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री हैं. वो पर्यावरण मंत्रालय का जिम्मा संभालते हैं.
महाराष्ट्र विधान परिषद की नौ सीटों के लिए 21 मई को चुनाव होने वाले हैं. इसको लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे समेत 10 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं… जबकि, बीजेपी के चार उम्मीदवार भी नॉमिनेशन कर चुके हैं… नामांकन दाखिल करने के हिसाब से देखें तो कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं… सूत्रों का दावा है कि पांच उम्मीदवार डमी कैंडिडेट के रूप में मैदान में हैं… उनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वो 14 मई को उम्मीदवारी वापस ले सकते हैं…
बता दें अब तक उद्धव ठाकरे विधायक या एमएलसी नहीं हैं. इसलिए उनकी कुर्सी खतरे में थी. संविधान के मुताबिक किसी मुख्यमंत्री या मंत्री को शपथ लेने के छह महीने के अंदर विधानसभा या विधानपरिषद में से किसी की सदस्यता ग्रहण करनी होती है. ऐसा नहीं करने पर उसे इस्तीफा देना पड़ता है.उद्धव ने 28 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.उनके छह महीने 28 मई 2020 को पूरे हो रहे हैं… जबकि, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ने कैबिनेट की एक बैठक में उद्धव ठाकरे का नाम विधान परिषद के लिये नामित किए जाने वाले सदस्य के तौर पर सुझाया था.
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