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MP Government Crisis : इंदिरा गांधी के ‘तीसरे बेटे’ पर भारी पड़े सवा महीने में बदले समीकरण

Updated at : 21 Mar 2020 10:00 AM (IST)
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MP Government Crisis : इंदिरा गांधी के ‘तीसरे बेटे’ पर भारी पड़े सवा महीने में बदले समीकरण

Bhopal: Madhya Pradesh Chief Minister Kamal Nath addresses the media at CM house in Bhopal, Friday, March 20, 2020. Nath announced that he would submit his resignation to Governor Lalji Tandon. (PTI Photo)(PTI20-03-2020_000086A)

MP Government Crisis : why indira gandhi's third son lost government in madhya pradesh. भोपाल (Bhopal) : कांग्रेस (Congress) के दिग्गज नेता कमलनाथ (Kamal Nath) सिर्फ 15 महीने तक मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद अपने चार दशक पुराने राजनीतिक चक्र में एक बार फिर वहीं खड़े हैं, जहां से उन्होंने शुरुआत की थी. इस बात को ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, जब दिसंबर, 2018 में कमलनाथ आलाकमान से राज्य की सत्ता संभालने का फरमान लेकर विजयी अंदाज में भोपाल पहुंचे थे, तो उनके समर्थकों ने ‘जय जय कमलनाथ’ के नारे लगाकर उन्हें सिर आंखों पर बिठा लिया था. कांग्रेस में कमलनाथ के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वर्गीय इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने उन्हें उस वक्त अपना ‘तीसरा बेटा’ (Third Son) बताया था, जब आपातकाल (Emergency) के बाद वर्ष 1979 में उन्होंने मोरारजी देसाई (Morarji Desai) के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ उनका साथ दिया था.

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भोपाल : कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ सिर्फ 15 महीने तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद अपने चार दशक पुराने राजनीतिक चक्र में एक बार फिर वहीं खड़े हैं, जहां से उन्होंने शुरुआत की थी.

इस बात को ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, जब दिसंबर, 2018 में कमलनाथ आलाकमान से राज्य की सत्ता संभालने का फरमान लेकर विजयी अंदाज में भोपाल पहुंचे थे, तो उनके समर्थकों ने ‘जय जय कमलनाथ’ के नारे लगाकर उन्हें सिर आंखों पर बिठा लिया था.

कांग्रेस में कमलनाथ के कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने उन्हें उस वक्त अपना ‘तीसरा बेटा’ बताया था, जब आपातकाल के बाद वर्ष 1979 में उन्होंने मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ उनका साथ दिया था.

मध्यप्रदेश में कांग्रेस वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करके 15 वर्ष के बाद सत्ता में लौटी थी. कमलनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री के पोते के आशीर्वाद से सत्ता संभाली थी, लेकिन तकरीबन सवा साल के शासन के बाद ही राज्य में तेजी से बदले राजनीतिक समीकरण उनकी सरकार के लिए भारी पड़े.

कमलनाथ (72) के समर्थक मध्य भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य को भाजपा के हाथों से छीनकर कांग्रेस की झोली में डालने का पूरा श्रेय उन्हें देते हैं, जहां वर्ष 2003 से 2018 तक शिवराज सिंह चौहान का कब्जा था और वह सबसे लंबे समय तक मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके थे.

एक समय कमलनाथ के सहयोगी रहे और भाजपा को सत्ता से बेदखल करने में कदम दर कदम उनके साथ चलते रहे 49 वर्षीय ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस महीने के शुरू में भाजपा का दामन थाम लिया और राज्य में कांग्रेस की सरकार का सूरज ढलने लगा.

सिंधिया ने जब कहा कि अगर कमलनाथ सरकार ने घोषणापत्र में किये गये वायदे पूरे नहीं किये, तो वह सड़कों पर उतरेंगे, तो कमलनाथ ने उन्हें ‘तो उतर जाएं’ कहकर ललकारा था. इससे शाही परिवार के चश्म-ओ-चिराग ने राज्य में सियासत के मोहरे पलट डाले और कमलनाथ को शह के बिना ही मात दे दी.

कांग्रेस प्रेक्षकों की मानें, तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कमलनाथ के अनुभवी हाथों में राज्य की कमान सौंपी थी, लेकिन पार्टी का यह दांव उलटा पड़ गया और पार्टी को राज्य में लोकसभा की 29 में से 28 सीटें गंवानी पड़ीं और इनमें सिंधिया की सीट भी शामिल थी.

यह अपने आप में रोचक तथ्य है कि कांग्रेस ने शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार के अधूरे चुनावी वादों की याद दिलाकर विधानसभा चुनाव में जीत का रास्ता बनाया था और कभी कांग्रेस के वफादार सिपहसालार रहे सिंधिया ने कांग्रेस सरकार के चुनावी वादों को पूरा न किये जाने की बात उठाकर कमलनाथ को घेर लिया.

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक कारोबारी पिता महेंद्र नाथ और मां लीला नाथ के यहां जन्मे कमलनाथ ने देहरादून के प्रतिष्ठित दून स्कूल से शिक्षा ग्रहण की और कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से आगे की पढ़ाई की और उसके बाद राजनीति के सफर पर निकल पड़े. पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ 1980 के बाद नौ बार संसद सदस्य रह चुके हैं.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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