नबी की शक्ल देख कर दुश्मन मुसलमान हो जाते थे

Published at :24 Dec 2015 7:34 AM (IST)
विज्ञापन
नबी की शक्ल देख कर दुश्मन मुसलमान हो जाते थे

शीन अनवर : चक्रधरपुर 24 दिसंबर को ईद मिलादुन्नबी का त्योहार है. इस दिन इसलाम मजहब के पैगम्बर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाह अलैह व सल्लम का जन्म हुआ था. अरबी वर्ष के रबीउल अव्वल माह के 12 तारीख को नबी (स.) की पैदाईश का जश्न मनाया जाता है. नबी (स.) ने सख्त रुकावटों व विरोध के […]

विज्ञापन

शीन अनवर : चक्रधरपुर

24 दिसंबर को ईद मिलादुन्नबी का त्योहार है. इस दिन इसलाम मजहब के पैगम्बर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाह अलैह व सल्लम का जन्म हुआ था. अरबी वर्ष के रबीउल अव्वल माह के 12 तारीख को नबी (स.) की पैदाईश का जश्न मनाया जाता है. नबी (स.) ने सख्त रुकावटों व विरोध के बावजूद कभी भी अपने एखलाक (व्यवहार) को कमजोर होने नहीं दिया. आप (स.) की कामयाबी का बड़ा कारण बुलंद एखलाक था. आप (स.) का जमाल सूरत देख कर ही दुश्मन मुसलमान हो जाते थे और आप (स.) के नबी होने पर कोई सबूत तक नहीं मांगते थे.

पाकीजगी : आप (स.) सफाई और पाकीजगी का हमेशा ख्याल रखते और अतर को बहुत पसंद फरमाते थे. हदीस में है कि दीन का मदार पाकीजगी पर है. आप (स.) के जिस्मानी पाकीजगी का यह आलम था कि जिस रास्ते से गुजर जाते वह रास्ता महक उठता और जो शख्स आप (स.) से मुसाफा कर लेता उसके हाथ दिन भर खुशबूदार रहता. चेहरे की खूबसूरती इतनी अच्छी थी कि जिसका कोई मिसाल नहीं था. सहाबा (र.) फरमाते हैं कि रेगिस्तान में दिन भर काम कर जब थक जाते तो मसजिद में जाकर दूर से ही आप (स.) की सूरत देख लेते तो फिर ताजा दम हो जाते.

जुबान : अरब के सभी कबीले की जुबान आप (स.) जानते थे और जिनसे मिलते उन्हीं की जुबान में बातें करते थे. जो जुमला मुंह से निकलता था वह इतना कसा हुआ और असरदार होता कि पूरे मुल्क में मशहूर हो जाता था.

सब्र : आप (स.) को अर्श से बार बार ताकीद की जाती थी कि इस तरह सब्र करो जिस तरह पहले के पैगम्बरों ने किया था. आप (स.) ने सब्र करने में कभी कोई कमी नहीं की. जो लोग आप (स.) से दूरी बनाते आप उनसे जाकर मिलते, जो दुश्मनी पर पेश आते उन पर एहसान करते और जो सख्तियां करते उन्हें माफ फरमा देते थे. लेकिन मजहब को नुकसान पहुंचाता तो उसे सजा देते. जंग-ए-ओहद में जब आप (स.) घायल हो गये तो सहाबा ने कहा हजरत नूह (अ.) की तरह बददुआ करें, आप (स.) ने फरमाया मैं लानत करने के लिए नहीं आया हूं बल्कि मुझे रहमत बना कर भेजा गया है. आप (स.) को गुस्सा बहुत देर में आता और राजी जल्द हो जाते थे.

करम : आप (स.) कभी किसी मांगने वाले को महरूम नहीं करते थे. सालों भर आप सखी रहते, लेकिन रमजान के महीने में सखावत और अधिक बढ़ जाती थी. नबूवत मिलने से पहले से ही यह खूबी में आप (स.) में थी. जो कुछ नसीब होता उसे बांट कर शाम तक खत्म कर देते. यदि बांट कर खत्म करने के बाद कोई मांगने वाला आ जाता तो उसे अपने नाम से कर्ज लेने को कहते और कर्ज को अदा करने की जिम्मेदारी अपने आप पर ले लेते.

बहादूरी : आप (स.) की शुजाअत (बहादुरी) साबित थी. जहां बड़े बड़े बहादुर भाग खड़े होते थे वहां आप (स.) डटे रहते. हजरत अली (र) फरमाते हैं कि जब जंग सख्त हो जाती थी तो हम लोग आप (स.) के पीछे जाकर पनाह लेते थे. आप (स.) दुश्मनों से ज्यादातर करीब होते थे.

हया : हजरत अबू सईद (र) फरमाते हैं कि आप (स.) की हया का यह आलम था कि किसी से भी कोई ऐसी बात नहीं फरमाते थे जो उसको नापसंद हो. कभी भी किसी की तरफ तेज निगाह से नहीं देखा. आंखें हमेशा नीची रखते थे और जब हंसी आती थी तो मुस्कुराहट से आगे नहीं बढ़ती थी.

शिष्टाचार : हर छोटे बड़े के साथ आप (स.) का बरताव मुहब्बत के साथ होता था. सब लोग आप (स.) को अपने शफीक बाप से बढ़ कर समझते थे. जो शख्स आप (स.) के पास आता, उसकी इज्जत करते और जब तक वह नहीं उठता आप (स.) तब तक नहीं घबराते थे. अपना कंबल और गद्दा बिछा कर बिठाते, जो मिलता उनसे सलाम व मुसाफा करते, जब किसी को पुकारते तो उसका प्यारा नाम लेकर पुकारते, हर शख्स की इज्जत का ख्याल रखते.

हाल यह था कि हर सहाबा (र.) समझते थे कि आप (स.) मुझे सबसे ज्यादा मानते हैं. कोई आप (स.) के यहां से मायूस हो कर नहीं लौटता था. लौंडी, गुलाम, मिसकीन और मोहताजों तक के दावत को कबूल फरमा लेते और जब उनके घर जाते तो तोहफे लेकर जाते. जब किसी की बीमार होने की खबर सुनते तो उन्हें देखने जरूर जाते. कोई एहसान करता तो उसका बदला उससे ज्यादा देते.

रहमत : आप (स.) अपने सहाबा व उम्मत के लिए ही नहीं बल्कि पुरी दुनिया के लिए रहमत बना कर भेजे गये हैं. बुरे और दुश्मनों के साथ भी आप (स.) मेहरबानी से पेश आते थे. अल्लान ने आप (स.) को रऊफ और रहीम का खताब दिया है और रहमतुल लिलआलेमीन फरमाया है.

वादा : आप (स.) अपने कौल व काम पर हमेशा कायम रहते. आप (स.) ने फरमाया जो अहद (वादा) का पाबंद नहीं वह बेदीन है. शुरू से ही आप (स.) की आदत में वफा शामिल थी. दोस्त हो या दुश्मन जो भी वादा करते उसे पुरा करते थे और कभी भूलते नहीं थे.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola