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सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के हाथ में है राज्य का भविष्य : विधायक

सीएम एक्सेलेंस बालक स्कूल सिमडेगा में शिक्षक-अभिभावक बैठक

सिमडेगा. सीएम एक्सेलेंस बालक स्कूल में शुक्रवार को शिक्षक-अभिभावक की बैठक हुई. इसमें मुख्य अतिथि के रूप में विधायक भूषण बाड़ा व विशिष्ट अतिथि के रूप में उपायुक्त कंचन सिंह उपस्थित रहीं. मौके पर विधायक ने कहा कि राज्य का भविष्य सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के हाथ में है. इस सोच के साथ महागठबंधन सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाये हैं. सरकारी स्कूलों में बच्चों को पोशाक, स्कूल किट, छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन, इंग्लिश मीडियम शिक्षा व साइकिल योजना जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि कोई बच्चा गरीबी से शिक्षा से वंचित न रहे. उन्होंने बताया कि राज्य में सीएम एक्सेलेंस विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और आवासीय बालिका विद्यालय खोले गये हैं तथा बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गयी हैं. विधायक ने कहा कि सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आज भी सबसे बड़ी चुनौती है. इसके लिए केवल सरकार नहीं, बल्कि समाज व अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है. अभिभावकों से सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किताब, साइकिल और पोशाक दे रही है, लेकिन यह भी देखना होगा कि बच्चे वास्तव में पढ़ भी रहे हैं या नहीं. यदि समाज समय रहते नहीं जागा, तो यही बच्चे आगे चल कर बेरोजगारी की लंबी कतार में खड़े नजर आयेंगे. विधायक ने कहा कि सरकारी नौकरी सिर्फ वेतन पाने का साधन नहीं, बल्कि यह झारखंड के भविष्य की जिम्मेदारी है. जो शिक्षक ईमानदारी से पढ़ा रहे हैं, सरकार व जनप्रतिनिधि उनके साथ हैं, लेकिन लापरवाही करने वालों के लिए कोई माफी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि केवल इमारत खड़ी कर देने से स्कूल नहीं बनता, बल्कि गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई से ही स्कूल बनता है. बैठक में डीएसइ दीपक राम, पाकरटांड़ प्रखंड अध्यक्ष अजीत लकड़ा, जिला विधायक प्रतिनिधि संतोष कुमार सिंह, एजाज अहमद, ओबीसी जिलाध्यक्ष शिव केशरी, नगर विधायक प्रतिनिधि शकील अहमद, लखन गुप्ता, सोनी वर्मा, विद्यालय के प्रधानाध्यापक अब्राहम केरकेट्टा, सत्यजीत प्रसाद आदि उपस्थित थे.

अभिभावक व शिक्षक की सहभागिता से मजबूत होगी शिक्षा व्यवस्था : डीसी

उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा कि शिक्षा किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज, अभिभावक और शिक्षक तीनों की साझा जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि प्रशासन विद्यालयों में बेहतर संसाधन व सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, लेकिन बच्चों की नियमित उपस्थिति और सीखने की रुचि तभी बढ़ेगी, जब अभिभावक अपनी भूमिका निभायेंगे. डीसी ने बच्चों में अनुशासन, समय के महत्व व मोबाइल के सीमित उपयोग की आदत विकसित करने पर जोर दिया. साथ ही शिक्षकों से आग्रह किया कि वे केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण और आत्मविश्वास बढ़ाने पर भी ध्यान दें. उन्होंने बताया कि प्रशासन विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता की लगातार निगरानी कर रहा है और जहां भी कमी पायी जायेगी, वहां सुधारात्मक कदम उठाये जायेंगे.

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Prabhat Khabar News Desk
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