सरायकेला की मिट्टी में जिंदा है सदियों पुरानी आस्था, नए अन्न से हुई मां पाऊड़ी की पूजास, जानें क्या है मान्यता
पूजा के पश्चात उपस्थित कलाकार.
सरायकेला में नुआखाई जंताल पूजा के साथ सदियों पुरानी आस्था जीवंत हो उठी. नए अन्न से मां पाऊड़ी की विशेष पूजा की गई, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है.
सरायकेला : सरायकेला की मिट्टी में इतिहास सिर्फ दर्ज नहीं है, बल्कि आज भी जीवंत है. मंगलवार, 15 सितंबर को नुआखाई जंताल पूजा का आयोजन किया गया. सरकारी स्तर से आयोजित पूजा में पाऊडीमेड स्थित पाऊड़ी पीठ और मां झुमकेश्वरी की पूजा-अर्चना पारंपरिक विधि-विधान से की गई इस दौरान देहुरी द्वारा माता की पीठ पर नए अन्न से बने प्रसाद चढ़ाया इसके पश्चात श्रद्धालुओ ने ग्रहण किया. यह आयोजन महज धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सरायकेला की प्राचीन आस्था, संस्कृति, राजपरंपरा और सामुदायिक विरासत की जीवंत तस्वीर है.
परंपरा का किया गया निर्वाहन
नुआखाई जंताल में नई फसल के चावल का प्रसाद मां पाऊड़ी को समर्पित करने की परंपरा रही है. प्रकृति और कृषि से गहरे जुड़े इस अनुष्ठान में श्रद्धालु मां से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. सरकारी स्तर से आयोजित पूजा में राजकीय छऊ कला केंद्र के निदेशक अमित कुमार व समन्वयक सुदीप कवि यजमान की भूमिका अदा किये और माता की पूजा किये.
राजघराने से जुड़ी है आस्था
पाऊड़ी पीठ को सरायकेला राजपरिवार की आस्था का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है. यही कारण है कि जंताल पूजा के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सदियों पुरानी राजपरंपरा की झलक भी दिखाई देती है.
समझौते में किया जाता है सरकारी स्तर से पूजा
आजादी के बाद देशी रियासतों के भारतीय संघ में विलय के दौर में सरायकेला की पारंपरिक धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने की व्यवस्था भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही. चैत्र पर्व से लेकर विभिन्न पारंपरिक पूजा-पद्धतियों तक, सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है. नुआखाई जंताल इसी विरासत की एक महत्वपूर्ण कड़ी है.
सरायकेला में 2027 में होगा देश जंताल पूजा
सरायकेला की इस ऐतिहासिक परंपरा का सबसे भव्य स्वरूप 2027 में देखने को मिलेगा. 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाला देश जंताल अगले वर्ष फिर होगा. इसे लेकर अभी से लोगों में उत्सुकता है. देश जंताल के आयोजन के साथ सरायकेला की लोकआस्था, राजपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर व्यापक स्तर पर सामने आयेगी.
पूजा में ये रहे उपस्थित
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त ब्रजेंद्र कुमार पटनायक, सुशांत महापात्र,आशीष कर , भोला महन्ती,संतोष कर, मनोरंजन साहू, गजेंद्र मोहंती गणेश महंती, ठाकुर सरदार,सिद्धेश्वर दरोगा, अध्यापोदो साहू,राकेश कवि सहित अन्य कलाकार उपस्थित थे.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए