तसर पालन में अब विज्ञान का साथ, खेत में ही किसानों को सिखाई गई कीट पालन की तकनीक

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किसानों को तकनीकी जानकारी देते तसर वैज्ञानिक डुकरे प्रदीप गुलाब राव.

कुचाई के बड़ो सेगोई में मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 के तहत किसानों को तसर कीट पालन, रोग नियंत्रण और अर्जुन पौधरोपण की वैज्ञानिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया.

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खरसावां : तसर कीट पालन में बेहतर उत्पादन और रोगों से बचाव के लिए अब किसानों को खेत में ही वैज्ञानिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय अभियान ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ (MRMA 2.0) के तहत कुचाई प्रखंड के बड़ो सेगोई गांव में किसानों के खेतों में तकनीकी क्षेत्र प्रदर्शन आयोजित किया गया. इस दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को तसर कीट पालन की बारीकियां समझाने के साथ स्वच्छता, रोग नियंत्रण और होस्ट प्लांट के विस्तार की तकनीक का मौके पर ही प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया.

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खेत में पहुंचकर विभिन्न तकनीकों का किया प्रदर्शन

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक तरीके के साथ वैज्ञानिक तकनीकों को जोड़कर तसर पालन को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाने के लिए प्रेरित करना रहा. केंद्रीय रेशम बोर्ड के बीएसएमटीसी खरसावां के वैज्ञानिक-बी डुकरे प्रदीप गुलाबराव और पीपीसी कुचाई की तकनीकी टीम ने खेत में पहुंचकर विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया.

स्वस्थ पौधे और साफ पालन स्थल सफलता की कुंजी

विशेषज्ञों ने किसानों को बताया - तसर कीट पालन की सफलता काफी हद तक स्वस्थ होस्ट प्लांट, स्वच्छ पालन स्थल और समय पर रोग नियंत्रण पर निर्भर करती है. कीट पालन शुरू करने से पहले की जाने वाली तैयारियों के बारे में भी किसानों को विस्तार से जानकारी दी गयी. वैज्ञानिकों ने कहा - पालन क्षेत्र में थोड़ी सी लापरवाही भी रोगों के प्रसार का कारण बन सकती है. इसलिए कीट ब्रशिंग से पहले पालन स्थल की साफ-सफाई और आवश्यक रोगाणुनाशन करना बेहद जरूरी है.

खेत में लगाया अर्जुन, बताया तसर पालन में क्यों है अहम

तकनीकी क्षेत्र प्रदर्शन के दौरान किसानों के खेतों में अर्जुन (Terminalia arjuna) के पौधे भी लगाये गये. विशेषज्ञों ने बताया कि अर्जुन तसर कीट का प्रमुख होस्ट प्लांट है. पर्याप्त संख्या में अर्जुन के पौधे होने से कीट पालन के दौरान आवश्यक पत्तियों की उपलब्धता बनी रहती है. किसानों को अपने खेतों में होस्ट प्लांट का क्षेत्र बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया. विशेषज्ञों के अनुसार इससे तसर पालन के लिए लंबे समय तक स्थिर आधार तैयार करने में मदद मिलेगी. किसानों को उत्पादन के लिए आवश्यक पत्तियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सुविधा होगी.

कीट ब्रशिंग से पहले स्वच्छता का कराया लाइव प्रदर्शन

प्रशिक्षण के दौरान केवल जानकारी देने तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों को खेत में ही स्वच्छता और रोग नियंत्रण की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया गया. कीट ब्रशिंग से पहले पालन क्षेत्र की सफाई तथा रासायनिक रोगाणुनाशन की प्रक्रिया समझायी गयी. किसानों को खेत की सफाई के बाद चूना और ब्लीचिंग पाउडर के उचित अनुपात में इस्तेमाल तथा उसके छिड़काव की विधि भी बतायी गयी. विशेषज्ञों ने कहा - पालन स्थल पर स्वच्छता बनाए रखने से रोगों के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है.

जीवनसुधा और एलएसएम के इस्तेमाल की दी जानकारी

तकनीकी टीम ने किसानों को विषाणुजनित और जीवाणुजनित रोगों से बचाव के लिए जीवनसुधा के प्रयोग, उसकी मात्रा और छिड़काव की सही विधि के बारे में जानकारी दी. साथ ही एलएसएम के उपयोग और इसके फायदे भी समझाये गये. वैज्ञानिक-बी डुकरे प्रदीप गुलाबराव ने किसानों को कीट पालन के दौरान नियमित निगरानी रखने और पालन स्थल पर सख्त स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा - समय पर रोग की पहचान और वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण तसर कीट पालन में नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए किसानों को किया प्रेरित

तकनीकी क्षेत्र प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को तसर पालन में वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने, रोग नियंत्रण के प्रभावी उपाय करने और होस्ट प्लांट का क्षेत्र बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया. मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को यह संदेश दिया गया कि बेहतर होस्ट प्लांट, स्वच्छ पालन स्थल और समय पर रोग नियंत्रण से तसर पालन को अधिक व्यवस्थित और टिकाऊ बनाया जा सकता है.

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