चांडिल डैम में बढ़ा पानी का दबाव, 13 रेडियल गेट समेत इमरजेंसी गेट से छोड़ा जा रहा पानी...देखें तस्वीरें
चांडिल डैम के रेडियल गेट से निकलता पानी
चांडिल डैम का जलस्तर 181.25 मीटर पहुंचने के बाद 13 रेडियल गेट खोल दिए गए हैं. निचले इलाकों में अलर्ट जारी, प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.
चांडिल: चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में बुधवार बारिश थमने के बावजूद चांडिल डैम का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. बुधवार को डैम का जलस्तर 181.25 मीटर पहुंच गया. जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने डैम के सभी 13 रेडियल गेट खोलकर पानी की निकासी जारी रखी है.
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इसके अलावा सुइस गेट और इमरजेंसी गेट के माध्यम से भी पानी छोड़ा जा रहा है. डैम से बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के कारण निचले हिस्से में पानी का दबाव बढ़ गया है. डैम के नीचे बने पुल के ऊपर से भी पानी बहने लगा है, जिससे आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बन गयी है.

डैम का जलस्तर बढ़ने और लगातार पानी छोड़े जाने से चांडिल अनुमंडल के इचागढ़, कुकड़ू और नीमडीह प्रखंड क्षेत्र के विस्थापित गांवों में एक बार फिर चिंता बढ़ गयी है. चांडिल डैम निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में गांवों के विस्थापित होने के बाद भी आज तक कई विस्थापित परिवार पुनर्वास और मुआवजा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. ऐसे में डैम का जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों को अपने घर, खेत और गांव में पानी घुसने की आशंका सताने लगती है.
डैम के आसपास बढ़ी निगरानी
डैम का जलस्तर 181.25 मीटर के करीब पहुंचने के बाद विभाग की ओर से पानी की निकासी पर लगातार नजर रखी जा रही है. 13 रेडियल गेट से पानी छोड़े जाने के साथ सुइस और इमरजेंसी गेट का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. जिसमें करीब 18022 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है. पानी छोड़े जाने के कारण डैम के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ रहा है. इससे नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में हुई लगातार बारिश के कारण डैम में तेजी से पानी जमा हुआ है. हालांकि बुधवार को अनुमंडल क्षेत्र में बारिश कम हो गयी, लेकिन ऊपर के जलग्रहण क्षेत्रों से पानी आने के कारण डैम का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है. यही वजह है कि बारिश रुकने के बाद भी डैम का जलस्तर कम होने के बजाय लगातार ऊपर जा रहा है.
विस्थापित गांवों में बढ़ी बेचैनी
डैम का पानी बढ़ने के साथ ही इचागढ़, कुकड़ू और नीमडीह प्रखंड के विस्थापित गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि डैम का जलस्तर बढ़ने के समय उन्हें हमेशा अपने घर और खेती-बारी की चिंता सताती रहती है. कई इलाकों में निचले हिस्से में पानी पहुंचने का खतरा बना रहता है. ग्रामीणों ने प्रशासन और विभाग से डैम के जलस्तर तथा पानी की निकासी की स्थिति की नियमित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है.

आदित्यपुर-जमशेदपुर तक दिखने लगा असर
चांडिल डैम से पानी छोड़े जाने का असर डैम के निचले हिस्सों में भी दिखाई देने लगा है. सुवर्णरेखा नदी के जलस्तर पर इसका प्रभाव पड़ रहा है. आदित्यपुर और जमशेदपुर के निचले इलाकों में भी प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर नदी के बढ़ते जलस्तर पर बनी हुई है. नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
डैम का जलस्तर 181.25 मीटर के करीब पहुंचने के बाद आने वाले घंटों में जलस्तर और पानी की निकासी की स्थिति महत्वपूर्ण होगी. विभाग द्वारा गेटों के माध्यम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, ताकि डैम में बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित किया जा सके. वहीं निचले हिस्से के लोगों से नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है.
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