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जून में जा सकती है निजी हाथों में शराब की दुकानें

Updated at : 30 May 2025 9:12 PM (IST)
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जून में जा सकती है निजी हाथों में शराब की दुकानें

लॉटरी प्रक्रिया के तहत आवंटित की जायेंगी दुकानें, विभागीय कवायद शुरू

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साहिबगंज.जिले भर में शराब की दुकानें अब निजी हाथों में दी जायेंगी. इसके लिए विभागीय कवायद शुरू कर दी गयी है. जून में इसकी स्वीकृति मिल जायेगी. सारी प्रक्रिया ऑनलाइन की जायेगी. हालांकि झारखंड सरकार द्वारा तिथि तय नहीं की गयी है. विभागीय सूत्रों के अनुसार जून में प्रक्रिया पूरी की जायेगी. उत्पाद निरीक्षक प्रवीण कुमार राणा ने बताया कि दुकान लॉटरी प्रक्रिया के तहत होगी. विभाग द्वारा निर्देश जारी किये जायेंगे. उनके निर्देश के आलोक में ही फार्म की स्वीकृति होगी. फिलहाल इसकी सूचना जिला उत्पाद को नहीं मिली है. गौरतलब है के पिछले वर्ष जिले को 61 करोड़ राजस्व का टारगेट दिया गया था. तकरीबन पूरा कर लिया गया है. वर्ष 2025-26 झारखंड सरकार द्वारा राशि में इजाफा करते हुए नये टारगेट 67 करोड़ का दिया गया था. जिला उत्पाद विभाग के माने तो अप्रैल व मई में विभाग ने तकरीबन 10 करोड़ का राजस्व सरकार के खाते में जमा कर दिया. इसके अलावा अवैध शराब के मामले में तकरीबन 15 मामले दर्ज किये गये. शुल्क की बात की जाये तो लगभग 65 हजार शुल्क भी काटे गये हैं. एक व्यक्ति को अवैध शराब के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है. लगभग चार अज्ञात पर भी मामला दर्ज है. छानबीन पुलिस के द्वारा की जा रही है. जब्ती के मामले में महुआ तैयार शराब तकरीबन 100 लीटर जब्त किये गये हैं. विदेशी शराब 67.23 लीटर को जब्त कर लिया गया है. इसके अलावा 100 लीटर बीयर को भी विभाग द्वारा जब्ती करते हुए कार्रवाई की जा रही है. शहर की शराब दुकानों में ब्रांड की भारी कमी

शहर के सभी शराब की दुकानों में इन दिनों ब्रांडेड शराब की भारी कमी है. शराब के शौकीन लोगों को उनके जरूरत के मुताबिक का ब्रांड नहीं मिल पा रहा है. नाम न बताने की एवज में एक उपभोक्त ने बताया कि बाटा रोड, ग्रीन होटल मोड एवं पूर्वी फाटक के निकट के अलावा जिरवाबाड़ी स्थित शराब की दुकानों में ब्रांड के नाम पर मात्र बी7 और रॉयल स्टैग व दो अन्य की हाफ की बोतल उपलब्ध है. क्वार्टर में दो- चार ब्रांड छोड़ कर किसी भी ब्रांड का शराब दुकान उपलब्ध नहीं है. ब्लेंडर, सिग्नेचर, टीचर्स, ब्लैक डॉग व 100 पाइपर की छोटी बड़ी बोतल दुकान में उपलब्ध नहीं है. दूसरी तरफ बियर के नाम पर दो दिन ब्रांड ही मुश्किल से लोगों को मिल पा रही है. बताया जा रहा है कि डिपो से मिलने वाले लॉट फिलहाल जिले में नहीं आ रहा है.

पुलिस पदाधिकारियों की कमी से जूझ रहा विभाग

जिला उत्पाद विभाग में पुलिस पदाधिकारी व पुलिसकर्मी की भारी कमी है. जिस कारण वर्तमान लोगों को काफी समय काम का बोझ उठाना पड़ता है. दरअसल, मामला यह है कि उत्पाद अधीक्षक के बाद जिला भर में तीन सब इंस्पेक्टर की आवश्यकता है. इसके जगह पर मात्र एक सब इंस्पेक्टर से काम लिया जा रहा है. आरक्षी की बात की जाय तो जिलेभर में 14 आरक्षी की आवश्यकता है. इसके लिए जगह भी निर्धारित किया गया है. जिलेभर में मात्र एक आरक्षी से ही काम किया जा रहा है. इसके अलावा मात्र जिले में एक ही पुलिस निरीक्षक की ड्यूटी तैनात की गयी है, जो कि पूरे जिले भर का कार्यभार को संभाल रहे हैं. इधर, जिले भर में कुल मिलाकर 54 शराब की दुकानें हैं. अंग्रेजी 15, देसी 13 और मिश्रित शराब की दुकान 26 हैं. इस सब का संचालक का कार्यभार सुपरिटेंडेंट समेत चार लोगों के कंधे पर है.

क्या कहते हैं उत्पाद निरीक्षक

दुकानों में शराब की ब्रांड और शराब को भेजने का कार्य डिपो संभालती है. डिपो में कभी-कभी स्टॉक उपलब्ध नहीं कारण मार्केट में ब्रांड की कमी होती है. जल्द दुकानों में सारे ब्रांड की शराब उपलब्ध करा दी जायेगी.

प्रवीण कुमार राणा, उत्पाद निरीक्षक, साहिबगंज

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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