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Updated at : 08 Apr 2016 12:00 AM (IST)
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गंगा में विलुप्त हो रहे डॉलफिन फोटो नंबर 8 एसबीजी 6 हैकैप्सन : शुक्रवार को गंगा किनारे सावेरियन पक्षी की झुंड.डालफिन व जलीय जीव पर मंडराने लगा है खतरा.नगर प्रतिनिधि 4 साहिबगंजगंगा नदी में जलस्तर में भारी कमी आने व रामपुर होते हुए साहिबगंज की ओर आने वाला जल प्रवाह बंद हो जाने से गंगा […]

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गंगा में विलुप्त हो रहे डॉलफिन फोटो नंबर 8 एसबीजी 6 हैकैप्सन : शुक्रवार को गंगा किनारे सावेरियन पक्षी की झुंड.डालफिन व जलीय जीव पर मंडराने लगा है खतरा.नगर प्रतिनिधि 4 साहिबगंजगंगा नदी में जलस्तर में भारी कमी आने व रामपुर होते हुए साहिबगंज की ओर आने वाला जल प्रवाह बंद हो जाने से गंगा में रहने वाली डालफिन पर भी खतरा मंडराने लगा है. अब भी यहां डाॅलफिन देखने को मिल जाते हैं. लेकिन एक समय यहां काफी संख्या में डॉलफिन पायी जाती थी, आज यह संख्या नगण्य हो गयी ह‍ै. लेकिन गंगा का जलस्तर में आयी कमी इसी तरह बरकरार रहा तो वह दिन दूर नहीं कि शहर के लोगों को डाॅलफिन देखने को नहीं मिलेगा.क्या कहते हैं विशेषज्ञसाहिबगंज महाविद्यालय के भूगर्भ शास्त्र के प्रो डॉ रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने पांच अक्तूबर 2009 को डालफिन का भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था. यह नेत्रहीन स्तनधारी जलीय जीव है. इसमें सूंघने की शक्ति अधिक है. इसी शक्ति के माध्यम से अपना भोजन की तलाश व सुरक्षा करती है. जिसका शिकार मछुआ तेल बनाने के लिये करते हैं जो कि औषधि के रूप में उपयोग होता है. वर्ष 1972 जलीय जीव अधिनियम के तहत इनका शिकार करना अपराधी माना गया है. डालफिन गंगा की सफाई में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यदि समय रहते साहिबगंज में गंगा के प्रवाह को पुन: चालू नहीं किया गया तो वो दिन दूर नहीं कि यहां के लोग डालफिन देखने के लिये तरस जायेंगे.——————————दुर्भाग्य-मुहाना बंद होने से गंगा का प्रवाह रुका, अब कैसे होगा साइवेरियन पक्षी का दर्शनडालफिन व जलीय जीव पर मंडराने लगा है खतरागंगा नदी सिर्फ धार्मिक नजरिये से ही महत्वपूर्ण नहीं है. नदी में डाॅलफिन, मछली, केकड़ा, सहित दर्जनों प्रकार के जीव रहते हैं. इसके अलावे साहिबगंज के गंगा में प्रतिवर्ष विदेशी मेहमान यानि सावेरियन पक्षी लंबी दूरी तय कर आते हैं. सावेरियन पक्षी उधवा पक्षी आभियारण राजमहल व साहिबगंज के गंगा नदी व नदी के किनारे दियारा क्षेत्रों में दिन भर रहते हैं और दिन भर गंगा नदी में मछली खाते हैं. शाम होते ही पेड़ों पर रहने के लिये लौट जाते हैं. फिर सुबह सुरज का पौ फटते ही ये विदेशी मेहमान सैकड़ों की झुंड में गंगा व उनके किनारे पहुंच जाते हैं. जहां दिन भर मौज मस्ती करते रहते हैं. रामपुर स्थित गंगा का मुहाना बंद हो जाने से गंगा का प्रवाह साहिबगंज से सकरीगली तक रुक गया है. अगर समय रहते मुहाना से बालू हटा कर गंगा का प्रवाह पूर्ण चालू नहीं किया गया तो ये विदेशी मेहमान सावेरियन पक्षी साहिबगंज शहर के गंगा नदी से अपना मुंह मोड़ लेंगे. फिर शहर के अलावे राज्य के कोने-कोने से आने वाले लोगों को सावेरियन पक्षी का दर्शन सदैव के लिये दुर्लभ हो जायेगा.

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