ePaper

World Population Day: झारखंड में बच्चों की संख्या में आ रही गिरावट, वर्ष 2041 में होंगे 60 लाख बुजुर्ग

Updated at : 11 Jul 2023 5:46 AM (IST)
विज्ञापन
World Population Day: झारखंड में बच्चों की संख्या में आ रही गिरावट, वर्ष 2041 में होंगे 60 लाख बुजुर्ग

झारखंड में बच्चों की संख्या घट रही है और बुजुर्गों की संख्या में इजाफा हो रहा है. भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में यह आंकड़ा पेश किया गया. इसके मुताबिक, वर्ष 2041 में झारखंड में 60 लाख बुजुर्ग हो जायेंगे, जिनकी देखभाल सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगी.

विज्ञापन

झारखंड में बच्चों की संख्या घट रही है और बुजुर्गों की संख्या में इजाफा हो रहा है. आने वाले दिनों में यह अंतर और बढ़ेगा. इसकी वजह से सरकार की परेशानियां भी बढ़ेंगी. उन्हें अपनी नीतियों में कई तरह के बदलाव करने पड़ेंगे. विश्व जनसंख्या दिवस पर एक बार आंकड़ों पर गौर करने की जरूरत है कि किस कदर बच्चों की संख्या घट रही है और बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है. आने वाले दिनों में इसके क्या दूरगामी परिणाम होंगे.

झारखंड में बढ़ेंगे कामगार और बुजुर्ग

सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2011 की तुलना में वर्ष 2041 तक बच्चों एवं किशोरों (0-19 वर्ष आयु वर्ग) की संख्या में तेजी से गिरावट आयेगी. कामगारों और बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि होगी. आंकड़ों पर गौर करेंगे, तो पायेंगे कि वर्ष 2011 की जनगणना हुई थी, उस समय झारखंड की आबादी में बच्चों की हिस्सेदारी 1.52 करोड़ थी.

2031 में बच्चों की संख्या होगी 1.28 करोड़

अनुमान है कि वर्ष 2031 में झारखंड में बच्चों की संख्या घटकर 1.28 करोड़ और वर्ष 2041 में 1.25 करोड़ रह जायेगी. बता दें कि इस जनगणना में युवा और प्रौढ़ (20 से 59 वर्ष आयु वर्ग) लोगों की संख्या 1.55 करोड़ थी, जो वर्ष 2031 में बढ़कर 2.41 करोड़ और वर्ष 2041 में 2.62 करोड़ हो जाने का अनुमान है.

60 साल से अधिक के लोगों की बढ़ रही संख्या

वर्ष 2019 के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया था कि झारखंड में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2011 में सूबे में 24 लाख लोगों की उम्र 60 साल या इससे अधिक थी. वर्ष 2041 में इनकी संख्या बढ़कर 60 लाख हो जायेगी, ऐसा अनुमान है.

2041 में झारखंड में होंगे 60 लाख बुजुर्ग नागरिक

इस सर्वे में कहा गया था कि वर्ष 2041 में जब झारखंड में बुजुर्गों की संख्या बढ़कर 60 लाख हो जायेगी, तब यहां जवां हो रहे बच्चों या किशोरों की संख्या 1.25 करोड़ होगी. यानी बुजुर्गों की तुलना में बच्चों की संख्या लगभग दोगुनी होगी, जो वर्ष 2011 में 6 गुनी से ज्यादा थी. उस वक्त 1.52 करोड़ बच्चे थे और सिर्फ 24 लाख बुजुर्ग थे.

मध्यप्रदेश व झारखंड में बराबर होगी बुजुर्गों की संख्या

वर्ष 2041 में झारखंड में 60 लाख बुजुर्ग होंगे, लेकिन यहां बुजुर्गों का औसत राष्ट्रीय औसत (कुल आबादी के 15.9 फीसदी) की तुलना में काफी कम रहेगा. झारखंड में तब बुजुर्गों की आबादी कुल आबादी की 13.4 फीसदी रहेगी. उस समय झारखंड में जितने बुजुर्ग होंगे, उतने ही बुजुर्ग मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी होंगे.

बुजुर्ग और बच्चों पर केंद्रित योजनाएं बनानी होंगी

यह वह वक्त होगा, जब सरकार को बुजुर्गों और बच्चों दोनों पर केंद्रित नीतियां बनानी होगी. इसकी तैयारी अभी से करनी होगी. वर्ष 2041 में सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना होगा. स्कूलों की सुविधा बढ़ानी होगी. बुजुर्गों की देखभाल की व्यवस्था भी करनी होगी. इतना ही नहीं, लोगों के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराने की चुनौती भी सरकार के सामने होगी.

Also Read: झारखंड में दिव्यांग, बुजुर्ग व बीमार व्यक्ति अब घर बैठे करा सकेंगे आधार का काम, बस पूरी करनी ये प्रक्रिया

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola