‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ की छपाई का ठेका देने के नाम पर ठगी कर रहे झारखंड के दो युवक गिरफ्तार

Delhi police busts gang awarding fake tenders for printing ration cards, 2 Youth From Jharkhand Arrested मंत्री ने कहा कि 6 फरवरी को उनके कार्यालय ने पुलिस को इस संबंध में सूचित किया. पुलिस को बताया गया कि उन्हें इस बारे में सूचनाएं मिल रही हैं कि कुछ लोग राशन कार्ड छपाई का ठेका जारी करने जैसी धोखाधड़ी करने में लगे हैं.
रांची/नयी दिल्ली : झारखंड के दो युवक देश की राजधानी दिल्ली में राशन कार्ड छपाई का ठेका देने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठते थे. दिल्ली पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है. इनके नाम प्रत्युष कुमार राणा और विकास कुमार हैं. ये लोग केंद्र सरकार की ‘एक देश – एक राशन कार्ड’ योजना के तहत नये राशन कार्ड छपाने के नाम पर गोरखधंधा कर रहे थे. रांची और चतरा के रहने वाले ये लोग कॉन्ट्रैक्ट देने के नाम पर 15 लाख रुपये तक मांग रहे थे. कई लोगों को इन्होंने अपने झांसे में ले लिया था.
केंद्रीय मंत्री राव साहेब दादाराव दान्वे ने बताया कि झारखंड के प्रत्युष कुमार और उसके सहयोगी विकास कुमार को इस मामले में राष्ट्रीय राजधानी में गिरफ्तार किया गया है. खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के राज्यमंत्री ने कहा, ‘सरकार की ‘एक देश एक राशन कार्ड’ योजना के तहत नये राशन कार्ड की जरूरत नहीं है, लेकिन इस गिरोह ने लोगों को यह कहकर भ्रमित किया कि योजना के तहत नये राशन कार्ड की जरूरत है और इसके लिए एक निजी कंपनी को ठेका जारी किया गया. उन्होंने यह कार्य आधार ब्योरा के साथ प्लास्टिक कार्ड की छपाई करने के लिए उप-ठेके के तौर पर दिया.’
मंत्री ने कहा कि 6 फरवरी को उनके कार्यालय ने पुलिस को इस संबंध में सूचित किया. पुलिस को बताया गया कि उन्हें इस बारे में सूचनाएं मिल रही हैं कि कुछ लोग राशन कार्ड छपाई का ठेका जारी करने जैसी धोखाधड़ी करने में लगे हैं. इसके बाद दो मार्च को महाराष्ट्र से मामले में पीड़ित एक व्यक्ति भागवत साहेबारो वायल ने मंत्रालय से संपर्क किया और मामले में शिकायत की. मामले को देखने के लिए एक टीम गठित की गयी.
महाराष्ट्र के रहने वाले भागवत ने मंत्रालय को बताया कि झारखंड के दो लोगों ने दिल्ली के एक जिला के राशन कार्ड की छपाई का कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए उनसे 15 लाख रुपये की मांग की है. चतरा के रहने वाले प्रत्यूष कुमार राणा और रांची के रहने वाले विकास कुमार को पुलिस ने फर्जीवाड़ा करने के लिए बनायी गयी चिट्ठी के साथ धर दबोचा. दिल्ली पुलिस अब जांच में जुट गयी है कि कहीं इन दोनों का गोरखधंधा देश के अन्य राज्यों में भी तो नहीं फैला है.
महाराष्ट्र के भागवत ने पुलिस को बताया कि उसके एक मित्र ने उसे जानकारी दी कि काविन प्राइवेट लिमिटेड (Kalvin Pvt Ltd), एफएसएस प्राइवेट लिमिटेड (FSS Pvt Ltd), तन्नू ग्लोबल (Tannu Global) और महिंद्रा एमआइटी (Mahindra MIT) जैसी कंपनियों को एक नयी योजना के तहत महाराष्ट्र में राशन कार्ड की छपाई का ठेका दिया गया है. भागवत और उसके दोस्त ने इस कॉन्ट्रैक्ट को हासिल करने के लिए मोटी रकम का भुगतान किया.
रांची में करार पर हुआ दस्तखत
शिकायतकर्ता भागवत साहेबारो वायल और उसके मित्र इसका ठेका हासिल करना चाहते थे. इसलिए दोनों झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे. यहां हरमू बाइपास रोड स्थित एफएसएस प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय में कुछ दस्तावेज दिखाये गये. उन्हें बताया गया कि इस योजना के तहत कौन-कौन से कागज जरूरी हैं. दिल्ली के डीसीपी ने बताया कि रांची पहुंचने से पहले एक जिले के कार्ड की छपाई के लिए 8 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था. लेकिन, बाद में इसे 15 लाख रुपये कर दिया गया. इसमें भी शर्त यह जोड़ दी गयी कि 9 लाख रुपये एडवांस में देना होगा. बाकी पैसे काम शुरू होने के बाद.
नीयत पर हुआ शक और कर दी शिकायत
भागवत और उसके दोस्त को यहीं एफएसएस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चलाने वालों की नीयत पर शक हुआ. वे दस्तावेज के साथ दिल्ली लौटे और मंत्रालय में इस योजना के बारे में पूछताछ की. विस्तृत जानकारी मंत्रालय को दी. इसके पहले इन लोगों ने 10 लाख में से 3.5 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था. दिल्ली के डीसीपी ने बताया कि वायल और उसके दोस्त की शिकायत पर पुलिस ने प्रत्युष और विकास की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाया और उन्हें धर दबोचा. इनसे पूछताछ की जा रही है. इनके गिरोह से जुड़े कुछ और लोग गिरफ्तार किये जा सकते हैं.
तीन और लोगों की है दिल्ली पुलिस को तलाश
पुलिस को सूचना मिली है कि गिरोह में तीन और लोग हैं. पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है. दिल्ली पुलिस ने बताया है कि प्रत्युष कुमार (38) झारखंड के चतरा जिला का रहने वाला है, जबकि दूसरा विकास कुमार (25) झारखंड की राजधानी रांची का. प्रत्युष लोगों को अपनी कंपनी मेसर्स फ्रेंड्स सिक्यूरिटीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को झांसे में लेता है.
केंद्रीय मंत्री बोले : झांसे में न आयें लोग
खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान और राज्यमंत्री राव साहेब दादाराव दान्वे ने लोगों से कहा है कि ऐसे ठगों से सावधान रहें. सरकार ने नये राशन कार्ड की छपाई का किसी प्रकार का टेंडर किसी को नहीं दिया है. ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना से देश के राज्य जुड़ चुके हैं. एक जून, 2020 को 8 औ राज्य इस योजना से जुड़ जायेंगे. इसके लिए न तो नया राशन कार्ड बनवाना है, न ही उपभोक्ता को कोई फॉर्म भरना है.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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