Corona Effcet : बैंकों में सीमित संख्या में होगा स्थानांतरण

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 27 Apr 2020 2:27 AM

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कोरोना वायरस का असर इस बार बैंकों के अधिकारियों-कर्मचारियों के होने वाले स्थानांतरण पर भी पड़ेगा. बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि इस बार स्थानांतरण सीमित संख्या में ही होगा. सामान्य तौर पर बैंकों में मार्च के बाद स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होती है

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राजेश कुमार, रांची : कोरोना वायरस का असर इस बार बैंकों के अधिकारियों-कर्मचारियों के होने वाले स्थानांतरण पर भी पड़ेगा. बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि इस बार स्थानांतरण सीमित संख्या में ही होगा. सामान्य तौर पर बैंकों में मार्च के बाद स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन कई जगहों पर यह पूरी तरह से स्थगित है या सीमित संख्या में करने के लिए काम चल रहा है. अभी स्थिति यह है कि बैंकों में वित्तीय वर्ष 2019-20 का क्लोजिंग नहीं हुआ है. इसके बाद ऑडिट होना भी बाकी है.

कई जगहों पर इंटरव्यू नहीं कोरोना वायरस का असर यह है कि प्रमोशन के लिए कई जगहों पर इंटरव्यू तक नहीं लिया गया है. डीजीएम, जीएम और एजीएम स्तर के अधिकारियों का प्रमोशन के लिए वीसी के माध्यम से इंटरव्यू ले लिया गया है. जबकि शाखा प्रबंधक, मुख्य प्रबंधक और क्षेत्रीय प्रबंधक स्तर के अधिकारियों के प्रमोशन के लिए लिखित और इंटरव्यू अब तक नहीं हुआ है. संभावना है कि परफॉर्मेंस के आधार पर ही प्रमोशन मिलेगा. जबकि कुछ बैंकों में प्रमोशन पर भी असर पड़ सकता है.

इसलिए सीमित संख्या में होगा स्थानांतरणसीमित संख्या में स्थानांतरण करने के पीछे मकसद यह है कि कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. कई लोग यात्रा करने से बचेंगे. बहुत जरूरी नहीं होने पर कोई यात्रा नहीं करना चाहेगा. कई बातों को ध्यान में रखते हुए इस बार बैंक के उच्च प्रबंधन में यह बात जोर पकड़ने लगी है कि स्थानांतरण सीमित रूप से ही की जाये. स्थानांतरण करना जरूरी भी हो, तो एक जिला से दूसरे जिला या संबंधित राज्य के दूसरे सर्किल में ही किया जाये.

झारखंड में 15 हजार से अधिक बैंक अधिकारी-कर्मचारी रांची समेत पूरे झारखंड में 15 हजार से अधिक बैंक अधिकारी-कर्मचारी विभिन्न बैंकों में कार्यरत हैं. झारखंड में शाखाओं की संख्या 3099 है. हर साल लगभग 20 से 25 कर्मचारियों का स्थानांतरण सामान्य तौर पर तीन साल के अंतराल पर होता है. जबकि हर कैडर में लगभग 10-16 प्रतिशत कर्मियों का प्रमोशन होता है.

व्यापार में वृद्धि और सेवानिवृत्ति के कारण खाली पदों पर हर साल नयी नियुक्ति और प्रोन्नति के लिए रिक्तियों का आकलन किया जाता है. अब तक आवश्यक प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायी है. इससे स्पष्ट है कि सीमित संख्या में ही स्थानांतरण और प्रोन्नति हो पायेगी. डीएन त्रिवेदी, संयुक्त सचिव, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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