सुभाष मुंडा हत्याकांड: 59 जमीन कारोबारियों से पूछताछ, 30 जगहों पर छापेमारी, सात हिरासत में
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 29 Jul 2023 5:58 AM
सीपीएम नेता व हटिया विधानसभा क्षेत्र के युवा चेहरा सुभाष मुंडा हत्याकांड में लापरवाही बरतने के आरोप में नगड़ी थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया और रोहित कुमार को नया थाना प्रभारी बनाया गया. इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गयी है.
रांची: माकपा नेता सुभाष मुंडा हत्याकांड में शूटरों को सुपारी देकर हत्या करानेवालों की तलाश जारी है. इस क्रम में गुरुवार देर रात से लेकर शुक्रवार देर रात तक पुलिस की विभिन्न टीमों ने रांची जिला और जिले से बाहर 30 स्थानों पर छापेमारी की. मामले में पुलिस ने करीब 45 जमीन कारोबारियों के अलावा वैसे 14 जमीन कारोबारियों से पूछताछ की है, जिन पर फायरिंग आदि को लेकर मामला दर्ज है. पुलिस ने इनकी संलिप्तता पर जांच के लिए सात लोगों को हिरासत में लिया है.
हत्या के लिए लोहरदगा से आए थे शूटर
इस बीच मामले की जांच और छापेमारी के लिए गठित एसआईटी को आरंभिक अनुसंधान में जानकारी मिली है कि हत्याकांड के लिए शूटर संभवत: लोहरदगा से आये थे. हत्याकांड में किसी करीबी का हाथ हो सकता है. एसआईटी को जानकारी मिली है कि सुभाष मुंडा के पास वैसे तो कई जमीन थी, लेकिन तीन जगहों पर करोड़ों रुपये कीमत की जमीन को लेकर उनका विवाद अलग-अलग लोगों से चल रहा था. इन्हीं तीनों में किसी एक जमीन के विवाद को लेकर किसी जमीन कारोबारी द्वारा सुभाष मुंडा की हत्या करायी जा सकती है.
संदिग्ध लोगों की लिस्ट तैयार कर खोज में जुटी पुलिस
पुलिस पूछताछ के लिए कुछ अन्य संदिग्ध लोगों की लिस्ट तैयार कर उनकी खोज में जुट गयी है. इसके अलावा जेल से निकले शूटरों के बारे में भी सत्यापन किया जा रहा है. बता दें कि अपराधियों ने 26 जुलाई को नगड़ी थाना क्षेत्र के दलादली चौक से कुछ दूरी पर स्थित कार्यालय में सुभाष मुंडा की आठ गोलियां मारकर हत्या कर दी थी.
डीजीपी अजय कुमार सिंह ने दिया है निर्देश
सीपीएम नेता व हटिया विधानसभा क्षेत्र के युवा चेहरा सुभाष मुंडा हत्याकांड में लापरवाही बरतने के आरोप में नगड़ी थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया और रोहित कुमार को नया थाना प्रभारी बनाया गया. इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गयी है. झारखंड के डीजीपी अजय कुमार सिंह ने रांची के एसएसपी व एसआईटी को सख्त निर्देश दिया है कि सुभाष मुंडा हत्याकांड में अविलंब कार्रवाई करें और अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें. आपको बता दें कि सुभाष मुंडा की हत्या अपराधियों ने उनके रांची के दलादिली स्थित ऑफिस में घुसकर 26 जुलाई की रात करीब 8 बजे कर दी थी. इससे आक्रोशित लोगों ने तोड़फोड़ और आगजनी की थी. गुरुवार को रांची बंद बुलाया गया था. इससे नगड़ी की दुकानें बंद रही थीं और बंद समर्थक रांची में भी बंद कराने सड़क पर उतरे थे. काफी मशक्कत के बाद आक्रोशित लोग माने और सड़क जाम हटाया था.
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मांग पत्र सौंपने के बाद हटाया था सड़क जाम
सड़क जाम किए जाने की सूचना प्रशासन को हुई थी तो नगड़ी सीओ संतोष कुमार, इंस्पेक्टर और नए थाना प्रभारी रोहित कुमार ने जाम स्थल पहुंचकर आश्वासन देकर जाम हटवाया था. ग्रामीणों की ओर से एक मांग पत्र प्रशासन को दिया गया, जिसमें कहा गया था कि सुभाष के हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी हो, परिवार को मुआवजा दिया जाए, सुभाष की पत्नी को सरकारी नौकरी और दलादिली चौक का नाम सुभाष मुंडा चौक किया जाए. मांगपत्र सौंपने के बाद सड़क जाम हटाया गया था.
रैली निकालकर भाकपा-माले ने किया विरोध प्रदर्शन
माकपा के युवा नेता सुभाष मुंडा की हत्या के खिलाफ अपराधियों की गिरफ़्तारी की मांग पर आदिवासी संगठनों के रांची बंद के समर्थन में भाकपा-माले कार्यकर्ताओं ने अल्बर्ट एक्का चौक पर विरोध प्रदर्शन किया था. सुभाष मुंडा हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच कराओ, हत्यारों को गिरफ्तार करो, भूमाफिया-पुलिस-नेता गठजोड़ मुर्दाबाद के जोरदार नारों के साथ माले कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यलय से शहीद चौक होते हुए अल्बर्ट एक्का चौक तक रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया था. भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य जनार्दन प्रसाद ने कहा कि भूमाफिया, पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं की एक नापाक गठजोड़ कायम हो गयी है. सुभाष मुंडा की हत्या इसी की परिणति है. दुकान में घुस कर सारेआम हत्या राज्य की विधि व्यवस्था को चुनौती देना है. केन्द्रीय कमिटी सदस्य शुभेंदु सेन ने कहा कि माकपा के यूवा नेता की हत्या समान्य घटना नहीं है. इसके राजनीतिक साठगांठ और सरंक्षण की भी गंभीरता से जांच की जानी चाहिए. हटिया विधानसभा में इसके पूर्व भी लाल झंडे के उभरते नेता बिशुन महतो की हत्या हुई है. हटिया को वधशाला बनने से बचाना चाहिए. माले नेताओं ने कहा कि झारखंड में राजनीतिक हत्यों पर विराम लगाएं वर्ना झारखंड में जंगल, जमीन नहीं बचेगी और ना ही राजनीतिक इच्छा शक्ति ही.
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