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विद्यार्थियों की कटी जेब, एडमिशन में 2900 की जगह ‍‍‍11600 क‍टे, चांसलर पोर्टल और रांची विवि ने पल्ला झाड़ा

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
एडमिशन में 2900 की जगह ‍‍‍11600 क‍टे
एडमिशन में 2900 की जगह ‍‍‍11600 क‍टे
Prabhat Khabar

रांची : कोरोना काल और लॉकडाउन ने मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पहले से ही हल्की कर रखी है. ऊपर से तकनीकी खामी की वजह से चांसलर पोर्टल के जरिये रांची विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में दाखिला लेनेवाले विद्यार्थियों के खाते से ज्यादा पैसे कट जा रहे हैं. करीब 500 विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्होंने रांची विवि के अंतर्गत दाखिले के लिए आवेदन भरने के दौरान एक से ज्यादा बार पेमेंट की कोशिश की. हर बार पेमेंट फेल हो गया और अंत में एक बड़ी राशि उनके खाते से काट ली गयी. इधर, करीब 100 ऐसे विद्यार्थी भी हैं, जिन्होंने कॉलेजों में दाखिले की फीस भरने के दौरान तीन से चार बार प्रयास किया और उनके खाते से 10,000 से 11,000 रुपये तक कट गये.

इस मामले में चांसलर पोर्टल से जुड़े एनआइसी के अधिकारी और रांची विवि सीधे पल्ला झाड़ रहे हैं. कहते हैं, सारी दिक्कत नेटवर्क की है, इसमें उनकी कोई गलती नहीं. फिलहाल, रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है. चांसलर पोर्टल के जरिये दाखिले का आवेदन देनेवाले विद्यार्थियों की मेधा सूची तैयार कर विवि द्वारा संबंधित कॉलेजों को भेज दी जाती है. साथ ही विद्यार्थियों को संबंधित कॉलेज में दाखिला लेने की प्रक्रिया से जुड़ा लिंक भी भेजा जाता है.

दाखिला फॉर्म भरने के बाद विद्यार्थी ‘पेमेंट गेटवे’ के जरिये फीस का ऑनलाइन भुगतान करते हैं. इस दौरान एक बार पेमेंट सक्सेसफुल नहीं होने पर विद्यार्थी दो-तीन बार पेमेंट का प्रयास करता है. कुछ देर बाद उसे मैसेज आता है कि उसके एकाउंट से नामांकन फीस से ज्यादा पैसे कट गये हैं. ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 100 के आसपास होगी. इनमें से ज्यादातर विद्यार्थी मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं. दिक्कत यह है कि काटे गये पैसे अब तक विद्यार्थियों के बैंक खाते में वापस नहीं आये हैं.

चांसलर पोर्टल से पेमेंट के दौरान हुई दिक्कत

आवेदन के दौरान डबल पेमेंट से रांची विवि के खाते में आये ढाई लाख : विद्यार्थियों के बैंक खाते से अनाप-शनाप पैसे कटने का सिलसिला दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही शुरू हो गया था. चांसलर पोर्टल पर आवेदन के लिए मात्र 500 रुपये के ऑनलाइन पेमेंट के दौरान करीब 500 विद्यार्थियों ने दो या दो से ज्यादा बार पेमेंट का ऑप्शन क्लिक कर दिया. इस वजह से उनके खाते से 1000 या 1500 हजार कट गये. इस हिसाब से रांची विवि के खाते में विद्यार्थियों के 2,50,000 लाख रुपये से ज्यादा जमा हो गये हैं. इधर, अलग-अलग कॉलेजों में दाखिले के फीस अलग-अलग है, ऐसे में किस कॉलेज के खाते में कितने पैसे गये इसका हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है.

विद्यार्थियों के बैंक खाते से अनाप-शनाप पैसे कटने का सिलसिला दाखिला प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही शुरू हो गया था. चांसलर पोर्टल पर आवेदन के लिए मात्र 500 रुपये के ऑनलाइन पेमेंट के दौरान करीब 500 विद्यार्थियों ने दो या दो से ज्यादा बार पेमेंट का ऑप्शन क्लिक कर दिया. इस वजह से उनके खाते से 1000 या 1500 हजार कट गये. इस हिसाब से रांची विवि के खाते में विद्यार्थियों के 2,50,000 लाख रुपये से ज्यादा जमा हो गये हैं. इधर, अलग-अलग कॉलेजों में दाखिले के फीस अलग-अलग है, ऐसे में किस कॉलेज के खाते में कितने पैसे गये इसका हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है.

रांची विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए आवेदन देते समय 500 विद्यार्थियों के ज्यादा पैसे कटे

क्या कहता है विवि : जिन विद्यार्थियों का पैसा एक बार से अधिक कटा है, उन्हें पैसा वापस किया जायेगा. हालांकि, यह सब कुछ नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही संभव हो पायेगा.

- डॉ गिरिजा शंकर नाथ शाहदेव, सीसीडीसी, रांची विवि

केस स्टडी :

केस : 2 मारवाड़ी कॉलेज के एक विद्यार्थी ने स्नातक में दाखिले के लिए ऑनलाइन 2900 रुपये का भुगतान किया. पर पेमेंट पूरा नहीं हुआ. विद्यार्थी ने चार बार पेमेंट का प्रयास किया. बाद जब मैसेज आया, तो पता चला कि उसके खाते से 11600 रुपये कट चुके थे.

केस 2 : रांची वीमेंस कॉलेज की छात्रा रेहा सिंह ने स्नातक में दाखिले के लिए 1900 रुपये का ऑनलाइन पेमेंट किया. पेमेंट नहीं होने पर उसने छह बार प्रयास किया. बाद जब पेमेंट का स्टेटस चेक किया, तो पता चला कि उसके खाते से 10400 रुपये कट गये हैं.

टेक्निकल डायरेक्टर एनएन मिश्रा से सीधी बात

Q नामांकन के समय दो बार क्यों पेमेंट कटा?

नेटवर्क की समस्या के कारण एक बार पेमेंट नहीं हो पाया, जिसके कारण मैसेज नहीं मिला, इसलिए दूसरी बार विद्यार्थी ने पेमेंट कर दिया और पैसा कट गया.

Q दूसरी बार पेमेंट का ऑप्शन क्यों बनाया गया?

रांची विवि के पेमेंट गेटवे के कारण ऐसा हो गया है. जब तक कंफर्म का मैसेज नहीं आयेगा, तब तक पेमेंट होता रहेगा.

Q इसमें किसकी गलती है?

इसमें बैंक, चांसलर पोर्टल और विवि का दोष नहीं है. नेटवर्क के कारण ऐसा हो गया है. पेमेंट विवि और कॉलेज को मिलता है.

Q अब आगे क्या होगा?

जिनका भी एक से अधिक बार पैसा कटा है, उन्हें पैसा वापस करने के संबंध में विवि से बात हो चुकी है.

Post by : Pritish Sahay

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