जियाडा : रो रहा है आपका कोकर इंडस्ट्रियल एरिया, कब लेंगे सुध

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अवैध पार्किंग के कारण हर दिन रहता है जाम

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रांची का कोकर इंडस्ट्रियल एरिया कभी झारखंड की औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था. लेकिन अब यह क्षेत्र जलजमाव, गंदगी और बदहाल बुनियादी सुविधाओं का प्रतीक बन गया है. इतना ही नहीं बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं.

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रांचीः कोकर इंडस्ट्रियल एरिया कभी झारखंड की औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था. यहां मशीनों की आवाज विकास की पहचान थी, लेकिन आज वही इलाका टूटी सड़कों, जलजमाव, गंदगी और बदहाल बुनियादी सुविधाओं का प्रतीक बन गया है. यहां के उद्यमी हर साल जियाडा को नियमित यूजर चार्ज चुकाते हैं, रोजगार भी देते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान भी करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें मिलती है केवल उपेक्षा. 22 वर्षों से सड़क का पुनर्निर्माण नहीं हुआ. बारिश में गड्ढे तालाब बन जाते हैं. नालियां जाम रहती हैं. कचरे के ढेर से दुर्गंध उठती है और अवैध पार्किंग के कारण हर दिन जाम लगता है.

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उद्योग चलाने वाले उद्यमियों को अब अपने उत्पाद से ज्यादा चिंता इस बात की रहती है कि कर्मचारी और ग्राहक सुरक्षित फैक्ट्री तक पहुंच पाएंगे या नहीं. वर्षों से पत्र लिखे गए, अधिकारियों से गुहार लगाई गई. लेकिन हर बार समाधान नहीं, सिर्फ आश्वासन मिला. आखिर कब तक उद्योगपति सिर्फ टैक्स और यूजर चार्ज भरते रहेंगे और बदले में बदहाली झेलते रहेंगे. इन्हीं सवालों, पीड़ा और उम्मीद के साथ कोकर इंडस्ट्रियल एरिया के 150 उद्यमियों ने जियाडा के नाम यह खुला पत्र लिखा है.

उद्यमियों का पत्र
उद्यमियों का पत्र

22 साल से मरम्मत का इंतजार

कोकर इंडस्ट्रियल एरिया की तीन किमी लंबी सड़क का निर्माण वर्ष 2003-04 में हुआ था. इसके बाद 22 साल गुजर गए, लेकिन न सड़क का पुनर्निर्माण हुआ और न ही व्यापक मरम्मत. आज गहरे गड्ढे, टूटी सड़कें और जलजमाव इस औद्योगिक क्षेत्र की पहचान बन चुके हैं. हर दिन उद्यमी, कर्मचारी और ग्राहक इसी बदहाल रास्ते से गुजरने को विवश हैं.

हर साल शुल्क, बदले में बदहाली

औद्योगिक क्षेत्र से जियाडा प्रति वर्ष प्रति एकड़ 16,300 रुपए की दर से करीब 8.80 लाख रुपए यूजर चार्ज वसूलता है. उद्यमी नियमित रूप से शुल्क जमा करते हैं, लेकिन बदले में सड़क, सफाई, पेयजल, सार्वजनिक शौचालय और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलतीं. सवाल यही है कि आखिर यह शुल्क किस सेवा के लिए लिया जा रहा है?

उद्योगों की जगह बढ़ रहे वेयरहाउस

कभी उत्पादन ईकाइयों के लिए पहचाने जाने वाले कोकर इंडस्ट्रियल एरिया की तस्वीर तेजी से बदल रही है. यहां अब कई उद्योग बंद हो चुके हैं या सिमट गए हैं. उनकी जगह वाहन सर्विस सेंटर, ओल्ड कार शोरूम और वेयरहाउस खुल रहे है. सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग और बढ़ते ट्रैफिक ने इस - औद्योगिक क्षेत्र की कार्यसंस्कृति और पहचान दोनों को प्रभावित किया है.

गंदगी, जाम और अव्यवस्था का अड्डा

150 औद्योगिक ईकाइयों वाले इस क्षेत्र में सफाई व्यवस्था लगभग ठप है. नालियां जाम हैं, औद्योगिक कचरा खुले में पड़ा रहता है और बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं. पूरे क्षेत्र में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है. पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है. लालपुर और कांटाटोली को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग होने के कारण यहां हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं, जिससे जाम और अव्यवस्था आम बात बन गई है.


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