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झारखंड में कैंसर का 'खतरनाक' ट्रेंड: एडवांस स्टेज में ही पहुंच रहे मामले, प्रभात कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

Updated at : 08 Feb 2026 9:25 AM (IST)
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Prabhat Khabar Conclave

झारखंड में कैंसर के अधिकांश मामले एडवांस स्टेज में, Pic Credit- Chatgpt AI

Prabhat Khabar Conclave: झारखंड में कैंसर के अधिकांश मामले एडवांस स्टेज में क्यों मिल रहे हैं? प्रभात खबर हेल्थ कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने बताया कि जागरूकता की कमी और इलाज का डर सबसे बड़ी बाधा है. डॉ. गुंजेश, डॉ. रोहित और डॉ. अभिषेक रंजन जैसे दिग्गजों ने कैंसर के कारणों, आधुनिक उपचार, मैमोग्राफी की जरूरत और सरकारी योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक मदद पर विस्तृत चर्चा की. जानिए कैसे सही जीवनशैली और समय पर जांच बचा सकती है आपकी जान.

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Prabhat Khabar Conclave, रांची : झारखंड में कैंसर का बढ़ता संकट एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है. कैंसर के अधिकांश मामले एडवांस स्टेज में ही सामने आते हैं, जिससे प्रभावी उपचार संभव नहीं हो पाता. ऐसे में नियंत्रित जीवनशैली और जागरूकता ही कैंसर से बचाव का सबसे बेहतर उपाय है. प्रभात खबर हेल्थ कॉन्क्लेव में कैंसर अवेयरनेस स्पेशल प्रोग्राम में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कैंसर के कारणों, शुरुआती लक्षणों, रोकथाम और आधुनिक उपचार विकल्पों पर चर्चा की और अपने अनुभव साझा किये. विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर पहचान और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है. कॉन्क्लेव में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी, ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रतिष्ठित अस्पतालों के वरिष्ठ प्रबंधकों ने मंच से अपने विचार रखे. पैनलिस्टों ने अलग-अलग सत्रों में तंबाकू और नशे से दूर रहने, पौष्टिक आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को बेहद जरूरी बताया.

प्रभात खबर कॉन्क्लेव के प्रथम सत्र में इन विषयों पर हुई चर्चा

प्रभात खबर कॉन्क्लेव के प्रथम सत्र में कैंसर के शुरुआती लक्षण, प्रमुख कारण, बचाव के उपाय, आधुनिक उपचार विकल्प और जीवनशैली में बदलाव पर चर्चा हुई. डॉक्टरों ने क्लिनिकल पहचान, निदान, सर्जरी और पोस्ट-ट्रीटमेंट प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी. उपस्थित लोगों के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाएं शांत की गयीं.

जागरूकता पर विशेष जोर

विशेषज्ञों ने बताया कि ब्लड कैंसर, गर्भाशय, अग्नाशय, स्तन और यकृत समेत कई प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ा है. कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है, जिससे नियमित जांच के माध्यम से इसका समय पर पता लगाया जा सकता है. हालांकि, सामाजिक समझ की कमी, जागरूकता का अभाव और महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक चुप्पी कई बार बाधा बन जाती है. अधिकांश कैंसर कई जोखिम कारकों जैसे तंबाकू सेवन, असंतुलित जीवनशैली और शारीरिक कमजोरी के कारण विकसित होते हैं. कभी-कभी बिना किसी स्पष्ट जोखिम कारक के भी कैंसर हो जाता है. जल्दी सोना-जागना, रासायनिक पदार्थों, प्रिजर्वेटिव और कीटनाशकों से दूरी, शराब और धूम्रपान से परहेज, स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम से कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है. टीकाकरण भी इसमें सहायक है.

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जागरूकता के मुख्य बिंदु

धूम्रपान मुक्त जीवन, स्वस्थ वजन बनाये रखना, संतुलित आहार लेना, शराब का सीमित सेवन, नियमित स्वास्थ्य जांच. स्वास्थ्य का रूटीन जांच महत्वपूर्ण होता है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

झारखंड में सभी प्रकार के कैंसर का उपचार संभव है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग बायोप्सी और कीमोथेरेपी से डरते हैं. आयुष्मान योजना और मुख्यमंत्री असाध्य रोग योजना से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राहत मिली है. राज्य में कई जरूरी दवाइयां अभी सरकारी सूची में शामिल नहीं हैं, जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए.

डॉ गुंजेश कुमार सिंह

तंबाकू और शराब कैंसर के बड़े जोखिम कारक हैं. मरीज की शारीरिक क्षमता कैंसर से लड़ने में अहम भूमिका निभाती है. सरकारी अस्पताल अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर कार्य कर रहे हैं. कैंसर ट्रीटमेंट के लिए गाइडलाइन एक ही है. मरीज का शरीर के सहने और लड़ने की शक्ति कैंसर से जंग लड़ने में सहायक होता है. कुछ कैंसर कीमो को बेहतर असर करते हैं, जबकि कुछ कीमोथेरेपी वास्तविक नतीजे नहीं देते हैं.

डॉ रोहित झा

ब्लड कैंसर में पिछले 40 वर्षों में बहुत अधिक प्रगति नहीं हुई है. अर्ली डायग्नोसिस, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और समय पर उपचार जरूरी है. इलाज में 30 से 40 लाख रुपये तक खर्च आता है, जिससे केवल 20 प्रतिशत मरीज ही उपचार करा पाते हैं. ब्लड कैंसर में खून के तीनों कंपोनेंट में से कंपोनेंट का बनना या तो नहीं होता है या यह असामान्य हो जाता है.

डॉ अभिषेक रंजन

कुछ जरूरी जांच से कैंसर का अर्ली डिटेक्शन संभव है. महिलाएं अब मैमोग्राफी को लेकर अधिक जागरूक हो रही हैं. पैप स्मियर, सीटी स्कैन और पीएसए टेस्ट से समय पर पहचान संभव है. अब तक 50 हजार से अधिक स्क्रीनिंग की गयी है. लगभग 50 प्रतिशत मामलों में समय पर इलाज से जान बचायी जा सकती है. यह मैसेज देना सबसे महत्वपूर्ण है. लाइफस्टाइल और अर्ली डिटेक्शन सबसे महत्वपूर्ण हैं.

डॉ दीपक

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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