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विद्यार्थी नहीं, बिना पढ़ाये मांग रहे मानदेय

Updated at : 07 May 2020 1:59 AM (IST)
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विद्यार्थी नहीं, बिना पढ़ाये मांग रहे मानदेय

रांची विवि के स्नातकोत्तर जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग में नौ भाषा की पढ़ाई होती है. विभाग में प्रथम शिफ्ट व द्वितीय शिफ्ट में पढ़ाई के लिए घंटी आधारित कुल 42 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी. इनमें से छह शिक्षकों की नियुक्ति अन्य जगह हो गयी, जिससे वे विभाग छोड़ कर चले गये

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संजीव सिंह, रांची : रांची विवि के स्नातकोत्तर जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग में नौ भाषा की पढ़ाई होती है. विभाग में प्रथम शिफ्ट व द्वितीय शिफ्ट में पढ़ाई के लिए घंटी आधारित कुल 42 शिक्षकों की नियुक्ति की गयी. इनमें से छह शिक्षकों की नियुक्ति अन्य जगह हो गयी, जिससे वे विभाग छोड़ कर चले गये. अब कुल 36 शिक्षक हैं. प्रथम शिफ्ट में विद्यार्थी हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए 20 शिक्षक कार्यरत हैं. इन्हें जुलाई 2019 तक का लगभग 40 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है. वहीं, द्वितीय शिफ्ट में पिछले एक साल से एक भी विद्यार्थी नहीं हैं. इसके बावजूद शिक्षक प्रति घंटी 600 रुपये व प्रतिमाह अधिकतम 36 हजार रुपये के हिसाब से क्लास लेने का बिल बना कर विवि से मानदेय भुगतान करने की मांग कर रहे हैं.

अब विवि प्रशासन को समझ में नहीं आ रहा है कि उन्हें बिना क्लास लिये कैसे प्रतिमाह के हिसाब से मानदेय का भुगतान किया जाये. तकनीकी पेंच में फंसा मामलाविवि का कहना है कि विभागाध्यक्ष अगर अनुशंसा करते हैं, तो बिल का भुगतान हो जायेगा, लेकिन विभागाध्यक्ष को समझ में नहीं आ रहा है कि बिना क्लास लिये कैसे बिल की अनुशंसा कर दें. राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि घंटी आधारित शिक्षकों को मानदेय भुगतान पर गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की जायेगी. फिलहाल तकनीकी पेंच में इन शिक्षकों का मानदेय भुगतान फंस गया है. संताली में शून्य, तो खड़िया विभाग में एक विद्यार्थी हैविवि में नियमानुसार प्रथम शिफ्ट में कम से कम 50 विद्यार्थी रहने के बाद बाकी बचे विद्यार्थी को द्वितीय शिफ्ट में भेजा जा सकता है, लेकिन जनजातीय व क्षेत्रीय विकास विभाग में नौ में से कई विभागों में 50 से काफी कम विद्यार्थी हैं.

यहां तक कि संताली विभाग में एक भी विद्यार्थी नहीं है. खड़िया विभाग में एक और हो भाषा विभाग में मात्र दो विद्यार्थी हैं. जानकारी के अनुसार, पूर्व में रांची विवि में सिर्फ मोरहाबादी स्थित जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई होती थी. इससे काफी भीड़ रहती थी. रांची जिला में ही इस विभाग को छोड़ कर चार जगहों पर तथा गुमला, लोहरदगा के कॉलेजों में भी पीजी की पढ़ाई होने लगी है, जिससे अब उस क्षेत्र के विद्यार्थी मोरहाबादी स्थित विभाग में नहीं आते हैं. द्वितीय शिफ्ट के शिक्षकों को अन्य कॉलेजों में शिफ्ट करने की कई बार मांग उठी, लेकिन विवि ने ध्यान नहीं दिया.

विभाग में विद्यार्थियों की संख्या सत्र 2018-20

विषय…….छात्र

कुड़ुख…….66

मुंडारी…….43

नागपुरी…….29

पंचपरगनियां…….42

कुरमाली…….13

खोरठा…….08

खड़िया…….01

संताली…….00

हो…….02

सत्र 2019-21

विषय…….छात्र

कुड़ुख…….63

मुंडारी…….62

नागपुरी…….34

पंचरगनिया…….41

कुरमाली…….18

खोरठा…….07

खड़िया…….04

संताली…….06

हो…….07

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