झारखंड के विश्वविद्यालयों में PF वित्तीय विसंगतिः 1800 शिक्षकों और कर्मियों को 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

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सांकेतिक तस्वीर (AI Image)

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रांची के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कार्यरत 1800 शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) में एक गंभीर वित्तीय विसंगति सामने आई है. पीएफ की राशि को साधारण बचत खाते में रखने से करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिससे कर्मियों को कम ब्याज और अतिरिक्त कर भार का सामना करना पड़ रहा है.

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संजीव सिंह की रिपोर्ट

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रांचीः राज्य के सरकारी विवि और उनसे संबद्ध कॉलेजों में लगभग 1800 शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मी कार्यरत हैं. जिनकी भविष्य निधि (पीएफ) से संबंधित गंभीर वित्तीय विसंगति सामने आई है. इससे शिक्षकों और कर्मियों को विवि गठन से लेकर अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है. विवि कर्मियों के वेतन से हर माह भविष्य निधि (पीएफ) की नियमित कटौती होती है, लेकिन इस राशि को भविष्य निधि खाते में जमा करने की बजाय साधारण बचत खाते में रखा जा रहा है. जिससे कर्मियों को न केवल भविष्य निधि खातों की तुलना में काफी कम ब्याज मिल रहा है, बल्कि बचत खाते पर अर्जित ब्याज आयकर के दायरे में आने से उन पर अतिरिक्त कर भार भी पड़ रहा है. बचत खाते में जमा राशि पर इनकम टैक्स भी भरना पड़ जा रहा है. इस विसंगति के कारण सेवानिवृत्त हजारों शिक्षकों और कर्मियों को पीएफ का समुचित लाभ भी नहीं मिल सका.

शिक्षकों और कर्मियों का कहना है कि वर्षों की सेवा में उनके वेतन से नियमित रूप से पीएफ की राशि काटी जाती रही है, लेकिन इस राशि पर उन्हें लाभ नहीं मिल रहा. जिसके वह कानूनन और नैतिक रूप से अधिकारी हैं. उनका आरोप है कि कम ब्याज मिलने से सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली कुल राशि भी प्रभावित होती है, जिससे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा कमजोर पड़ती है. पीएफ खाते में 8.00 से 8.25 प्रतिशत ब्याज है, जबकि बचत खाता में 2.70 से 3.50 प्रतिशत ही देय है. इस तरह भविष्य निधि खातों पर मिलने वाली ब्याज दर सामान्य बचत खाते की तुलना में काफी अधिक है.

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पूरी व्यवस्था के वित्तीय एवं प्रशासनिक ऑडिट की उठी मांग

शिक्षक और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि भविष्य निधि की राशि को उसके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप सुरक्षित एवं लाभकारी खाते में रखा जाना चाहिए, उनका तर्क है कि कर्मचारियों एवं नियोक्ता के अंशदान, दोनों को समयबद्ध ढंग से विधिवत भविष्य निधि खाते में जमा करना संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी है. यदि इसमें अनावश्यक विलंब होता है, तो इससे कर्मचारियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से इस व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग भी की है. विशेषज्ञों का यह भी मत है कि इस पूरी व्यवस्था का वित्तीय एवं प्रशासनिक ऑडिट कराना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सकें कि भविष्य निधि की राशि कितने समय तक बचत खातों में रखी गई. कर्मचारियों को वास्तविक रूप से कितना ब्याज मिलना चाहिए था तथा उन्हें कितना वित्तीय नुकसान हुआ.

कितना नुकसान हो रहा है, समझिए गणित

अगर किसी शिक्षक या कर्मी के बचत खाते में पांच लाख रुपए हैं, तो पीएफ अकाउंट मे रहने पर उन्हें 8.0% ब्याज मिलता. लेकिन बचत खाता में 2.7% ब्याज ही प्रति वर्ष मिल रहा है. यानी पीएफ में उन्हें उक्त राशि पर 40 हजार रुपए ब्याज मिलता, जबकि बचत खाता में 13,500 रुपए यानी संबंधित व्यक्ति को प्रति वर्ष 26,500 रुपए ब्याज का नुकसान उठाना पड़ रहा है. पीएफ पर मिलने वाला ब्याज (निर्धारित सीमा) सामान्यतः करमुक्त होता है. लेकिन बचत खाता में ब्याज कर योग्य है. यदि शिक्षक 30% टैक्स स्लैब में हैं और 13500 रुपए का पूरा ब्याज कर योग्य है, तो आयकर 4050 रुपए और 4 प्रतिशत स्वास्थ्य एवं शिक्षा उप कर सहित कुल 4,212 रुपए कट जायेंगे. कुल मिला कर प्रतिवष 30,700 रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

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