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झारखंड स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से की हिंसक कार्रवाई तो होगी जेल, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को मिली मंजूरी

Updated at : 16 Mar 2023 7:21 AM (IST)
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झारखंड स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से की हिंसक कार्रवाई तो होगी जेल, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को मिली मंजूरी

मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का उल्लंघन संज्ञेय अपराध होगा, उसका अनुसंधान डीएसपी स्तर के पदाधिकारी करेंगे. अपराध का विचारण सक्षम स्तर के न्यायालय के द्वारा होगा.

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झारखंड चिकित्सा सेवा से संबद्ध व्यक्तियों, चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा एवं संपत्ति नुकसान निवारण) विधेयक 2023 की स्वीकृति दी गयी है. निर्णय लिया गया है कि चिकित्सा सेवा से सबंद्ध व्यक्तियों के विरुद्ध हिंसक कार्रवाई करने या संपत्ति को नुकसान पहुंचानेवाले लोगों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई होगी. ऐसे में अधिकतम दो वर्ष का कारावास व 50 हजार का जुर्माना लगाया जायेगा.

यह संज्ञेय अपराध होगा, उसका अनुसंधान डीएसपी स्तर के पदाधिकारी करेंगे. अपराध का विचारण सक्षम स्तर के न्यायालय के द्वारा होगा. निजी चिकित्सा सेवा संस्थान को नुकसान पहुंचाने पर क्षतिपूर्ति भुगतान का भी प्रावधान किया गया है. चिकित्सा एवं चिकित्सा सेवा संस्थाान द्वारा चिकित्सा नैतिकता का पालन करने और रोगी की चिकित्सा से संबंधित पूरी जानकारी देने का भी प्रावधान किया गया है.

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क्या है मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट में

मरीज हित की बातें

  • डॉक्टर और अस्पतालों को ओपीडी और वार्ड में भर्ती मरीजों को दी जानेवाली चिकित्सा की संपूर्ण जानकारी लिखित रूप में मरीज और उसके परिजनों को देनी होगी.

  • अस्पताल के इलाज का खर्च या पैकेज (अनुमानित व्यय) की जानकारी सूचना पट्ट पर देना है

  • मरीज के इलाज में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग का पालन करना है. दुर्घटना के मरीजों के लिए अनिवार्य है

  • मृत व्यक्ति के शव को बिना रोके परिजनों को सौंपना है, जिससे वह अंतिम संस्कार सुनिश्चित करा पाये

अस्पतालों को क्या करना है

अस्पतालों को क्या करना है

  • पंजीकृत डॉक्टर व नर्स को नियुक्त करना

  • इलाज में लापरवाही या गलत इलाज की दर्ज शिकायत की जांच उपायुक्त टीम गठित कर जांच करायेंगे.

  • इलाज में लापरवाही की रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर प्रस्तुत करनी होगी.

  • अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा व संवेदनशील जगह पर सुरक्षा की तैनाती

  • चिकित्सा सेवा संस्थान की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष बनाना

  • अस्पताल व क्लिनिक परिसर में प्रवेश को नियंत्रित और प्रतिबंधित करने की व्यवस्था

  • गर्भवती महिला का इलाज कराना और बच्चे के जन्म के पूर्व और जन्म के बाद देखभाल करना

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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