एसीबी की प्रारंभिक जांच में खुलासा, नियम विरुद्ध हुआ था मैनहर्ट का चयन, इस नेता की शिकायत पर शुरू हुई थी जांच

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रांची शहर में सिवरेज-ड्रेनेज निर्माण का डीपीआर तैयार करने के लिए मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में अनियमितता बरती गयी थी. इसका खुलासा एसीबी की प्रारंभिक जांच में हुआ है. एसीबी में पदस्थापित डीएसपी और मामले की जांच कर रहे डीएसपी राज नारायण सिंह ने लिखा है कि जांच में पाया गया है कि आमंत्रित निविदा के निष्पादन के वक्त मुख्य समिति ने निविदा की शर्तों का उल्लंघन कर मेसर्स मैनहर्ट का परामर्शी के रूप में चयन किया था.

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रांची शहर में सिवरेज-ड्रेनेज निर्माण का डीपीआर तैयार करने के लिए मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में अनियमितता बरती गयी थी. इसका खुलासा एसीबी की प्रारंभिक जांच में हुआ है. एसीबी में पदस्थापित डीएसपी और मामले की जांच कर रहे डीएसपी राज नारायण सिंह ने लिखा है कि जांच में पाया गया है कि आमंत्रित निविदा के निष्पादन के वक्त मुख्य समिति ने निविदा की शर्तों का उल्लंघन कर मेसर्स मैनहर्ट का परामर्शी के रूप में चयन किया था.

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मामले में जांच पूर्व मंत्री और विधायक सरयू राय की शिकायत पर शुरू हुई थी. जिसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि निविदा निष्पादन की प्रक्रिया में हर स्तर पर गड़बड़ी हुई है. जिस कारण सरकारी राजस्व में करोड़ों का नुकसान हुआ.

15 नवंबर 2020 को शुरू हुई थी जांच : जांच में यह भी पाया गया है कि परामर्शी चयन के लिए गठित मुख्य समिति के सदस्य शशि रंजन कुमार थे, जो वर्तमान में दिल्ली उद्योग भवन टेक्सटाइल मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी और फाइनेंसियल एडवाइजर के पद पर हैं. शशिरंजन ही उपसमिति के अध्यक्ष भी थे. उल्लेखनीय है कि एसीबी ने सरकार के निर्देश पर मामले की जांच के लिए 15 नवंबर 2020 को प्रिलिमनरी इंक्वायरी( पीई) दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी.

इस मामले में जांच के दौरान 24 जून को तत्कालीन नगर विकास मंत्री और वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के अलावा शशिरंजन को एसीबी ने नोटिस भेजा था. नोटिस के माध्यम से दोनों को उपस्थित होकर मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश एसीबी ने दिया था. इसके बाद रघुवर दास की ओर से एसीबी को अपना पक्ष उपलब्ध कराया जा चुका है, लेकिन शशि रंजन का पक्ष मिलना बाकी है. पक्ष मिलने के बाद अन्य बिंदुओं पर जांच कर आरंभिक जांच पूरी कर एसीबी के अधिकारी आगे निर्णय लेंगे.

सरयू की शिकायत पर शुरू हुई थी जांच: पूर्व मंत्री सरयू राय ने आरोप लगाया था कि निविदा अनावश्यक रूप से विश्व बैंक की क्यूबीएस पर आमंत्रित की गयी थी. ऐसा एक षड्यंत्र के तहत हुआ था. निविदा मूल्यांकन के दौरान भी यह पाया गया कि कोई भी निविदा की शर्त के अनुसार योग्य नहीं है. इसलिए निविदा को रद्द कर नयी निविदा के लिए नगर विकास विभाग के सचिव ने प्रस्ताव दिया. लेकिन तत्कालीन मंत्री रघुवर दास ने इसे खारिज कर दिया. बाद में परिवर्तित शर्तों पर जब निविदा का मूल्यांकन हुआ, तब मैनहर्ट अयोग्य हो गया. लेकिन बाद में इस कंपनी को योग्य करार दिया गया. यह काम मंत्री के दबाव में किया गया. जिसके लिए मूल्यांकन समिति जिम्मेवार है.

Posted by: Pritish Sahay

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