‘नौकरी काफी मेहनत से मिली है सर, 35 लाख देकर नहीं आए हैं’, JSSC CGL नियुक्ति विवाद पर पहली बार बोले अभ्यर्थी
रांची में मीडिया को संबोधित करते जेएसएससी सीजीएल अभ्यर्थी अनिल रजक और चंद्रो हैबुरु.
JSSC CGL चयनित अभ्यर्थियों ने नौकरी पर लगे आरोपों को लेकर पहली बार अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि यह नौकरी उन्हें वर्षों की मेहनत और परीक्षा के बाद मिली है, न कि पैसे देकर. अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन यह किसी पूर्वाग्रह से मुक्त होनी चाहिए.
रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट
JSSC CGL Recruitment Controversy: झारखंड के JSSC CGL चयनित अभ्यर्थियों और कर्मियों ने अपने ऊपर लगातार लगाए जा रहे आरोपों को लेकर पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है. अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और प्रतियोगी परीक्षा के बाद नौकरी हासिल की है. उन पर पैसे देकर नौकरी पाने का आरोप लगाना न सिर्फ निराधार है, बल्कि इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हो रही है. अभ्यर्थियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने सीआईडी या किसी अन्य जांच एजेंसी से जांच कराने पर भी सहमति जताई, लेकिन मांग की कि जांच किसी पूर्वाग्रह या भीड़ के दबाव में नहीं होनी चाहिए.
2016 से शुरू हुई पूरी प्रक्रिया का दिया हवाला
अभ्यर्थियों ने कहा कि नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी. उनके मुताबिक, करीब तीन लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी. इनमें लगभग 26 हजार अभ्यर्थी सफल हुए और करीब दो हजार अभ्यर्थियों का चयन हुआ. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें लंबे समय तक इंतजार और संघर्ष करना पड़ा. उन्होंने कहा कि यह नौकरी उन्हें किसी शॉर्टकट से नहीं, बल्कि वर्षों की तैयारी और परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर मिली है.
600 से ज्यादा आदिवासी अभ्यर्थी होने का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेयजल एवं स्वास्थ्य विभाग में ASO के पद पर कार्यरत जयदीप ने दावा किया कि चयनित अभ्यर्थियों में 600 से अधिक आदिवासी छात्र शामिल हैं. उनका यह भी कहना है कि करीब 96 फीसदी चयनित अभ्यर्थी झारखंड के मूलवासी और झारखंडी हैं. अभ्यर्थियों के मुताबिक, कई चयनित उम्मीदवार पहले से दूसरी नौकरियों में काम कर रहे थे और बेहतर अवसर की तलाश में इस परीक्षा में शामिल हुए थे. उन्होंने कहा, “हम 35 लाख रुपये देकर नौकरी पाने वाले लोग नहीं हैं. दस साल की मेहनत के बाद हमें यह सफलता मिली है। हम पर पैसे देकर नौकरी पाने का आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है.”
हमारी सामाजिक छवि खराब हो रही है: अनिल रजक
ASO अनिल रजक ने कहा कि लगातार लग रहे आरोपों के कारण उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि अब समाज में उन्हें शक की नजर से देखा जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी, गरीब और सामान्य परिवारों से आने वाले चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष को पर्याप्त रूप से सामने नहीं रखा जा रहा है.
‘कोर्ट के आदेश के बाद हुई ज्वाइनिंग’
अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्ति और ज्वाइनिंग को लेकर कहा कि उनकी ज्वाइनिंग न्यायालय के आदेशों के बाद हुई है. उन्होंने कहा कि मामले में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है. अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन और भीड़ के दबाव के आधार पर उनकी छवि खराब नहीं की जानी चाहिए.
ITBP की नौकरी छोड़कर आए चंद्रो हैबुरू हुए भावुक
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ASO के पद पर चयनित अभ्यर्थी चंद्रो हैबुरू ने अपनी व्यक्तिगत कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि वह कोल्हान के एक आदिवासी परिवार से आते हैं और चाईबासा के रहने वाले हैं. उनके मुताबिक, उनके पिता की मौत पेड़ से गिरने के कारण हुई थी और संघर्ष करते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई और करियर बनाया. चंद्रो हैबुरू ने कहा, “मैं कहां से 35 लाख रुपये दूंगा? मुझे बदनाम किया जा रहा है. मैं ITBP की नौकरी से इस्तीफा देकर यहां आया हूं.” अपनी बात रखते हुए चंद्रो हैबुरू भावुक हो गए और रो पड़े. उन्होंने कहा कि आज उनके जैसे अभ्यर्थियों को अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए सार्वजनिक रूप से सामने आना पड़ रहा है.
कटऑफ को लेकर भी अभ्यर्थियों ने उठाया सवाल
अभ्यर्थियों ने पेपर लीक के आरोपों के बीच परीक्षा के कटऑफ को लेकर भी सवाल उठाया. उनका कहना है कि अगर बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुआ होता, तो कटऑफ को लेकर भी अलग तस्वीर सामने आती. उन्होंने सवाल उठाया कि कथित पेपर लीक के बावजूद कटऑफ करीब 33 प्रतिशत के आसपास कैसे रहा. हालांकि, कटऑफ के आधार पर पेपर लीक के आरोपों को खारिज या साबित नहीं किया जा सकता। यह मामला जांच का विषय है.
सरकार से क्या है अभ्यर्थियों की मांग?
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच पर किसी तरह के बाहरी दबाव का असर नहीं होना चाहिए.
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
- जांच निष्पक्ष तरीके से हो और किसी पूर्वाग्रह के साथ न की जाए.
- सीआईडी या किसी भी सक्षम जांच एजेंसी की जांच का वे सामना करने को तैयार हैं.
- अगर किसी व्यक्ति की नियुक्ति में अनियमितता साबित होती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो.
- गलत तरीके से चयनित व्यक्ति की गलती की सजा सभी चयनित अभ्यर्थियों को न दी जाए.
- जांच के दौरान नियुक्त अभ्यर्थियों की सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य को भी ध्यान में रखा जाए.
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सभी अभ्यर्थियों को एक तराजू पर तौलना गलत
अभ्यर्थियों का कहना है कि मामला अदालत में विचाराधीन है और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है. उनका तर्क है कि अगर जांच में कुछ लोगों की नियुक्ति गलत तरीके से हुई साबित होती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. लेकिन, सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक ही तराजू पर तौर किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है. नियुक्ति विवाद के बीच अभ्यर्थियों की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इस पूरे मामले का एक नया पक्ष सामने रखती है. अब निगाहें जांच और अदालत की आगे की प्रक्रिया पर टिकी हैं.
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