जोन्हा श्रीराम कथा का भव्य समापन, रामराज्य स्थापना का संदेश

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जोन्हा में रामकथा करते आचार्य धर्मराज शास्त्री. फोटो: प्रभात खबर

Jonha Ram Katha: रांची के जोन्हा में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का समापन रामराज्य स्थापना प्रसंग के साथ हुआ. आचार्य धर्मराज शास्त्री ने रावण वध और श्रीराम के आदर्श जीवन का वर्णन किया. महाआरती और भंडारे में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए, पूरा माहौल भक्ति और उत्साह से गूंज उठा. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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अनगड़ा से जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट

Jonha Ram Katha: झारखंड के रांची जिले के जोन्हा स्थित श्रीराम मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का समापन रविवार को अत्यंत भव्य और श्रद्धापूर्ण वातावरण में हुआ. नौवें दिन कथा का मुख्य प्रसंग रामराज्य स्थापना रहा, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला.

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रावण वध का रोमांचक वर्णन

कथा व्यास आचार्य धर्मराज शास्त्री ने लंका कांड का विस्तार से वर्णन करते हुए रावण वध का प्रसंग सुनाया. उन्होंने बताया कि यह केवल एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. उनके सजीव और प्रभावशाली वर्णन ने श्रद्धालुओं को उस युग में पहुंचा दिया, जहां भगवान श्रीराम ने अधर्म का अंत कर धर्म की स्थापना की. पंडाल में बैठे लोग कथा सुनते-सुनते भावुक हो उठे.

अयोध्या वापसी और राज्याभिषेक का मनमोहक चित्रण

रावण वध के बाद भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी और उनके राज्याभिषेक का दृश्य अत्यंत मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया गया. व्यास जी ने इस प्रसंग को इस तरह से प्रस्तुत किया कि पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. श्रद्धालुओं ने इस दौरान ‘जय श्रीराम’ के जयघोष के साथ अपने भाव प्रकट किए. कथा स्थल भक्ति और उत्साह से गूंज उठा.

रामराज्य की महिमा और जीवन के लिए संदेश

आचार्य धर्मराज शास्त्री ने रामराज्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह केवल एक आदर्श शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने का सर्वोत्तम तरीका है. उन्होंने कहा कि रावण का वध हमारे भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध और बुराइयों के अंत का प्रतीक है. वहीं भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, प्रेम, विनम्रता और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है.

जयघोष से गूंजा पूरा पंडाल

कथा के अंतिम दिन पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा. श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर कथा का आनंद लेते नजर आए. हर कोई इस आध्यात्मिक आयोजन का हिस्सा बनकर खुद को धन्य महसूस कर रहा था. भक्ति और आस्था का यह माहौल पूरे आयोजन के दौरान बना रहा, जिसने सभी को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया.

महाआरती और भंडारा में उमड़ी भीड़

समापन के अवसर पर महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया. इसके बाद भव्य भंडारा का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया. पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई.

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आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों का योगदान

इस नौ दिवसीय श्रीराम कथा को सफल बनाने में कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. अध्यक्ष बलराम साहू, कार्यक्रम संयोजक संतोष साहू, सीताराम साहू, मधुसूदन साहू, प्रदीप साहू, अजय मंडल, अमर मंडल, मिथलेश मंडल, उदय साहू, परमेश्वर साहू, दीनदयाल साहू, विनोद मिश्रा, निवारण साहू, विकास साहू, कन्हाई साहू, संदीप साहू, श्रीराम साहू और वसंत सुंडी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सक्रिय भूमिका निभाई.

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