झमाझम बारिश के बाद क्या झारखंड में दिखेगा 'अल-नीनो इफेक्ट'? जानें क्या कहता है मौसम विभाग
झारखंड में मौसम के बदलाव पर एआई जेनरेटेड तस्वीर.
अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में हुई झमाझम बारिश ने झारखंड में जल संकट को कम किया था. लेकिन अब मौसम विभाग के अनुसार, अल-नीनो का असर मॉनसून की रफ्तार को धीमा कर सकता है. जानिए इसका मौसम और खेती पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.
Jharkhand Weather Forecast: बंगाल की खाड़ी से उठे लगातार मजबूत मौसमीय सिस्टम ने अगस्त के आखिर और सितंबर की शुरुआत में झारखंड में जमकर बारिश करायी. कई जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा हुई और बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो गई. लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि 11 से 17 सितंबर 2026 के दौरान राज्य में बारिश सामान्य या सामान्य से कम रह सकती है. इसकी बड़ी वजह प्रशांत महासागर में मजबूत होता अल-नीनो माना जा रहा है, जिसका असर अब मानसून की रफ्तार पर पड़ सकता है.
सितंबर के पहले हफ्ते में क्यों हुई झमाझम बारिश?
मौसम विज्ञान विभाग के रांची केंद्र की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 27 अगस्त को दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव वाले क्षेत्र से शुरू हुआ मौसमीय बदलाव बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय रहा. उत्तर और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण ने 29 अगस्त तक कम दबाव का रूप ले लिया. यह सिस्टम 30-31 अगस्त तक पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के ऊपर एक वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया बन गया और फिर झारखंड से गुजरते हुए 2 सितंबर तक उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पहुंच गया. इसी मजबूत सिस्टम के कारण झारखंड में लगभग पूरे सप्ताह व्यापक बारिश दर्ज की गई. पांच दिनों तक कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई, जबकि दो दिनों तक कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई. इससे मौसमी वर्षा की कमी वाले कई जिलों में राहत मिली.
11 सितंबर के बाद कैसा रहेगा मौसम मिजाज?
मौसम विभाग के अनुसार, 11 से 17 सितंबर के बीच बारिश के लिए परिस्थितियां पहले जैसी अनुकूल नहीं रहेंगी. पूरे राज्य में व्यापक बारिश की संभावना कमजोर है और केवल कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. इस दौरान अधिकतम तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 22 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. रात का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रहने की संभावना है, जिससे उमस भी महसूस हो सकती है.
झारखंड में कैसा रहेगा अल-नीनो असर?
अल-नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के सामान्य से अधिक गर्म होने की स्थिति है. इसका सीधा असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है और भारत में अक्सर मानसून कमजोर पड़ जाता है. मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि सितंबर में औसत से कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान रहने की आशंका है. झारखंड, बिहार और पूर्वी भारत में इसका असर लंबे शुष्क अंतराल और बीच-बीच में अचानक तेज बारिश के रूप में दिखाई दे सकता है. यानी पूरे महीने लगातार बारिश होने के बजाय कुछ दिनों तक सूखा और फिर एक-दो दिनों की तेज वर्षा देखने को मिल सकती है.
खेती पर क्या किसानों की बढ़ सकती है चिंता
सितंबर का महीना किसानों के लिए बेहद अहम माना जाता है. धान, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलें इस समय पर्याप्त नमी पर निर्भर रहती हैं. यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो खेतों की मिट्टी जल्दी सूख सकती है, जिससे फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार कई जगहों पर पहले लंबे सूखे के बाद अचानक भारी बारिश हुई. इससे कुल बारिश का आंकड़ा तो सुधर गया, लेकिन खेती को नियमित और संतुलित बारिश का लाभ नहीं मिल पाया. यही वजह है कि सितंबर की कमजोर बारिश किसानों की चिंता बढ़ा सकती है.
रबी फसलों की तैयारी पर भी असर
आमतौर पर 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी शुरू हो जाती है और अक्टूबर के मध्य तक यह पूरे देश से विदा हो जाता है. इसी दौरान किसान गेहूं, सरसों, चना और रबी मक्का जैसी फसलों की तैयारी शुरू करते हैं. सितंबर के अंत तक मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बनने पर बीजों के अंकुरण और शुरुआती बढ़वार पर असर पड़ सकता है. जिन इलाकों में मिट्टी की नमी सामान्य से कम रहेगी, वहां किसानों को उत्पादन और आय दोनों पर दबाव झेलना पड़ सकता है.
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अगले सप्ताह कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विज्ञान विभाग के अनुमान के अनुसार, अगले सप्ताह झारखंड में बादल छाए रहने के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन अगस्त के आखिर और सितंबर की शुरुआत जैसी व्यापक और तेज बारिश की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है. यदि बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र विकसित नहीं होता, तो राज्य में अल-नीनो का प्रभाव धीरे-धीरे और स्पष्ट हो सकता है, जिससे सितंबर के दूसरे पखवाड़े में बारिश की कमी बढ़ने की आशंका बनी रहेगी.
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