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नक्सलमुक्त होगा झारखंड, बूढ़ा पहाड़ के बाद चाईबासा से भी नक्सलियों को खदेड़ेंगे: CRPF आईजी अमित कुमार

Updated at : 26 Nov 2022 5:06 PM (IST)
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नक्सलमुक्त होगा झारखंड, बूढ़ा पहाड़ के बाद चाईबासा से भी नक्सलियों को खदेड़ेंगे: CRPF आईजी अमित कुमार

Jharkhand Naxal News: झारखंड रेंज के सीआरपीएफ के आईजी अमित कुमार ने कहा कि झारखंड के तीन जिलों और छत्तीसगढ़ की सीमा तक फैले बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त कराने का अभियान चल रहा है. बूढ़ा पहाड़ को नक्सलमुक्त करने के लिए सुरक्षा बलों ने दो फेज में ऑपरेशन ‘ऑक्टोपस’ लांच किया था.

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Jharkhand Naxal News: झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाके में रह रहे लोगों को अब सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है. उन्हें स्वास्थ्य एवं शिक्षा मिल रही है. अन्य कल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ मिलने लगा है. चार दशक पहले इन इलाकों में कोई आधारभूत संरचना नहीं थी, लेकिन सरकार ने कई विकास कार्य किये हैं, जिसका लाभ यहां के लोगों को मिलने लगा है.

नक्सल प्रभावित इलाकों में तेजी से हुआ विकास: अमित कुमार

ये बातें सीआरपीएफ के झारखंड रेंज के आईजी अमित कुमार ने शनिवार को कहीं. उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित जिन इलाकों में सुरक्षा बलों के लिए कैंप की स्थापना की गयी, उन इलाकों में विकास काम में भी तेजी आयी. सड़कें बनीं. बिजली की सप्लाई वहां शुरू हुई. लोगों ने खुद को सुरक्षित महसूस किया, तो व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू हो गयीं. धीरे-धीरे स्थिति सामान्य की ओर बढ़ने लगी.

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बूढ़ा पहाड़ पर नक्सलियों के खिलाफ चल रहा है अभियान

झारखंड रेंज के सीआरपीएफ के आईजी अमित कुमार ने कहा कि झारखंड के तीन जिलों और छत्तीसगढ़ की सीमा तक फैले बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त कराने का अभियान लगातार चल रहा है. नक्सलियों का मजबूत गढ़ माने जाने वाले बूढ़ा पहाड़ को नक्सलमुक्त करने के लिए सुरक्षा बलों ने दो फेज में ऑपरेशन ‘ऑक्टोपस’ लांच किया था.

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29 आईईडी बरामद हुए

पहला चरण अगस्त में चलाया गया. इस दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के ठिकानों की पहचान की. सितंबर में दूसरा चरण शुरू हुआ. इस दौरान 4 नये कैंप की स्थापना की गयी. सुरक्षा बलों के जवान अब इलाके को सैनिटाइज करने में जुटे हैं. क्षेत्र से बड़े पैमाने पर हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं. 29 आईईडी बरामद किये गये हैं.

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बूढ़ा पहाड़ से उखड़ रहे नक्सलियों के पैर

श्री कुमार ने कहा कि सुरक्षा बल अब इस इलाके में नक्सलियों पर भारी पड़ रहे हैं. नक्सलियों के पैर उखड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब तक नक्सलियों के सारे ठिकानों को ध्वस्त नहीं कर देंगे, तब तक सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि झारखंड अब नक्सलमुक्त होने की राह पर है. नक्सलियों के सबसे मजबूत गढ़ बूढ़ा पहाड़, चाईबासा, खूंटी और सरायकेला और पारसनाथ पहाड़ पर हमने पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है.

अब चाईबासा से नक्सलियों को खदेड़ने की तैयारी

अमित कुमार ने कहा कि नक्सलियों का एक और गढ़ है चाईबासा. एक-दो महीने के भीतर हम वहां से भी नक्सलियों को खदेड़ देंगे. उन्होंने कहा बिहार-झारखंड की सीमा पर स्थित चक्रबांधा भी नक्सलियों का एक गढ़ है. हमने बिहार के औरंगाबाद में चार कैंप बनाये और जनवरी से जुलाई तक वहां ऑपरेशन चलाया. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हमने नक्सलियों को वहां से खदेड़ दिया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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