Jharkhand News : लोहरदगा में कोयले व लकड़ी का विकल्प इको फ्रैंडली ब्रिकेट हो रहा तैयार, ग्रामीणों को हो रही आमदनी, नये रोजगार से रुकेगा पलायन
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 14 Mar 2021 5:04 PM
Employment News, Jharkhand News, रांची/लोहरदगा न्यूज : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में नई पहल के सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं. मुख्यमंत्री के अभिनव सोच और कार्ययोजना से झारखंड में कोयले और लकड़ी का विकल्प ब्रिकेट तैयार किया गया है. झारखंड के आकांक्षी जिले की सूची में शामिल और सबसे छोटा जिला लोहरदगा में सिर्फ ब्रिकेट तैयार ही नहीं हुआ, बल्कि किस्को प्रखण्ड की पाखर पंचायत के तिसिया गांव में ब्रिकेटिंग प्लांट की स्थापना कर उत्पादन भी शुरू कर दिया गया है. वह दिन दूर नहीं जब लोहरदगा जैसा पिछड़ा जिला ब्रिकेट का उत्पादन कर पावर प्लांट, उद्योगों, ढाबों, ईंट भट्ठों, होटल एवं घरेलू कार्य में ईंधन के रूप में इसे आपूर्ति करने में सक्षम होगा. ब्रिकेट इको फ्रेंडली होने के साथ-साथ ताप एवं व्यय जैसे बिंदुओं पर भी कोयला की तुलना में अधिक गुणवत्तापूर्ण है. इससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है.
Employment News, Jharkhand News, रांची/लोहरदगा न्यूज : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में नई पहल के सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं. मुख्यमंत्री के अभिनव सोच और कार्ययोजना से झारखंड में कोयले और लकड़ी का विकल्प ब्रिकेट तैयार किया गया है. झारखंड के आकांक्षी जिले की सूची में शामिल और सबसे छोटा जिला लोहरदगा में सिर्फ ब्रिकेट तैयार ही नहीं हुआ, बल्कि किस्को प्रखण्ड की पाखर पंचायत के तिसिया गांव में ब्रिकेटिंग प्लांट की स्थापना कर उत्पादन भी शुरू कर दिया गया है. वह दिन दूर नहीं जब लोहरदगा जैसा पिछड़ा जिला ब्रिकेट का उत्पादन कर पावर प्लांट, उद्योगों, ढाबों, ईंट भट्ठों, होटल एवं घरेलू कार्य में ईंधन के रूप में इसे आपूर्ति करने में सक्षम होगा. ब्रिकेट इको फ्रेंडली होने के साथ-साथ ताप एवं व्यय जैसे बिंदुओं पर भी कोयला की तुलना में अधिक गुणवत्तापूर्ण है. इससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है.
ब्रिकेट उत्पादन के माध्यम से लोहरदगा के किस्को प्रखंड अंतर्गत पाखर पंचायत के तिसिया गांव एवं जंगल पर निर्भर कम से कम 15-20 अन्य गांवों के लोगों को आय का एक नया साधन मिल रहा है. भविष्य में इसके बढ़ने की पूर्ण संभावना है. वर्तमान में स्थानीय स्त्री-पुरुष जंगल में गिरे सूखे पत्ते लाने और ब्रिकेटिंग प्लांट में बेचने का कार्य कर रहे हैं, जिसके लिए उन्हें हाथों-हाथ दो रुपया प्रति किलो की दर पर भुगतान किया जा रहा है. इस कार्य के माध्यम से लोगों की दैनिक आय में 100 से 300 रुपये तक की वृद्धि हो रही है और उनका आर्थिक सशक्तीकरण हो रहा है. वहीं दूसरी ओर इस ईंधन के प्रयोग से जंगल में सूखे पत्तों के कारण लगने वाली आग में, जलावन के लिए लकड़ी की अवैध कटाई पर रोक एवं प्रदूषण स्तर में कमी आएगी. कोयले एवं लकड़ी की तुलना में ब्रिकेट का उपयोग उद्योगों के लिए भी आर्थिक रूप से अधिक किफायती होगा. इस पहल के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र से होने वाले पलायन में कमी आना निश्चित है.
ब्रिकेट का उत्पादन सूखे पत्तों, पुआल, डंडियों, कृषि उत्पाद एवं वन के व्यर्थ पदार्थों से किया जाता है. ब्रिकेट की ऊष्मा लगभग कोयले के समान है. 5000 हेक्टेयर वन क्षेत्र से घिरे तिसिया गांव में 35 लाख की लागत से ब्रिकेटिंग प्लांट लगाया गया है. प्लांट में ट्रायल के रूप में 15 टन ईंधन का उत्पादन किया जा रहा है, जिसकी आपूर्ति जिले के कुछ चिह्नित ईंट भट्ठों में करने की तैयारी की जा चुकी है. ट्रायल के बाद इसे अन्य कारोबारों एवं लोगों को उपलब्ध करवाया जायेगा. ब्रिकेट का उपयोग ढाबों, ईंट भट्ठों, होटल, पावर प्लांट, अन्य उद्योगों, एवं घरेलू कार्य, इत्यादि में किया जा सकता है.
लोहरदगा के वन प्रमंडल पदाधिकारी अरविंद कुमार बताते हैं कि स्थानीय लोगों को यह कार्य करने के लिए प्रेरित करने को लेकर उपायुक्त, जिला सहकारिता पदाधिकारी, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट फेलो, लोहरदगा एवं जिला योजना पदाधिकारी द्वारा पाखर पंचायत के दुर्गम गांवों में जाकर जागरूकता अभियान चलाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप कार्य शुरू होने के चार दिन के अंदर ही 15 टन कच्चा माल इकट्ठा कर लिया गया है. परियोजना को सफल बनाने का बीड़ा वन सुरक्षा समिति एवं लैम्पस-पैक्स के समन्वय में गठित सहकारी समिति द्वारा उठाया गया है. इस समिति में दैनिक कार्यों के संपादन, माल उत्पादन, तथा मार्केटिंग के लिए समूह बनाए गए हैं, जिन्होंने उचित प्रशिक्षण के बाद सफलतापूर्वक कार्य आरंभ कर दिया है. प्रतिदिन 90 से 100 लोग कार्य करना शुरू कर चुके हैं.
Posted By : Guru Swarup Mishra
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