Jharkhand News: स्कूली बसों में सुरक्षित नहीं बच्चे, 48 में से 23 सुरक्षा मानकों पर नहीं उतरे खरे

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Jharkhand News: बुधवार को स्कूल बस में आग लगने की घटना के बाद विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. इसी को लेकर परिवहन विभाग की और रांची के विभिन्न स्कूलों की बसों की जांच की गई. जांच में कई बसों में भारी अनियमितता पायी गयी. आग बुझाने का यंत्र से लेकर बसों में फर्स्ट एड की सुविधा तक नदारद थी

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Jharkhand News: लालपुर चौक के निकट बुधवार को स्कूल बस में आग लगने की घटना के बाद विद्यार्थियों की सुरक्षा पर फिर सवाल उठने लगे हैं. बताया जा रहा है कि इसमें सवार बच्चे बाल-बाल बच गये, क्योंकि सभी घटना से कुछ देर पहले ही उतर चुके थे़ इधर, इस हादसे के बाद परिवहन विभाग ने गुरुवार को जांच अभियान चलाया़ डीटीओ प्रवीण कुमार प्रकाश के नेतृत्व में सहजानंद चौक के पास लगभग दो घंटे तक 48 स्कूल बसों की जांच हुई़ जांच के दौरान इन बसों में भारी अनियमितता पायी गयी़ जांच के दौरान जैसे ही डीटीओ एक स्कूली बस में प्रवेश किये, तो विद्यार्थियों ने एक स्वर में कहा : सर, बस बहुत हिचकोले मारती है.

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ड्राइवर व खलासी बिना ड्रेस के ही दिखे

जांच में देखा गया कि किसी स्कूल बस में ग्रिल नहीं, तो किसी में फर्स्ट एड की भी सुविधा नदारद रही़ अधिकतर बसों के ड्राइवर और खलासी बिना ड्रेस के ही दिखे़ आग बुझाने का यंत्र भी नहीं था़ वहीं, कुछ बसों में अटेंडेंट भी नहीं दिखे. यह भी खुलासा हुआ कि लंबी दूरी तक चलनेवाली पैसेंजर बसों को भी स्कूल बस के नाम पर चलाया जा रहा है़ इन बसों में छोटे-छोटे बच्चों को चढ़ने में भी परेशानी हो रही थी़ साथ ही उन्हें बैठने में भी परेशानी हो रही थी़

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बसों में पायी गयी अनियमतिता
  • आग बुझाने का यंत्र भी नहीं था

  • कुछ बसों में अटेंडेंट नहीं दिखे

  • फर्स्ट एड की सुविधा भी नदारद दिखी

  • पैसेंजर बस से भी विद्यार्थियों को पहुंचाया जा रहा स्कूल

डीपीएस से हैं, सब मेंटेन है

डीपीएस स्कूल बस की जांच चल रही थी़ बस में जैसे ही डीटीओ कार्यालय के कर्मी जांच के लिए प्रवेश किये, तो एक मैडम ने कर्मियों को रोक दिया़ कहा: यह डीपीएस की बस है, सब मेंटेंन में है़ इसके बाद जब जांच शुरू हुई, तो स्कूली बसों में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाये गये थे. एक-एक सीट पर चार-चार बच्चे बैठे हुए थे़ यही नहीं, ड्राइवर भी ड्रेस और नेम प्लेट नहीं लगाये हुए था.

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हैवी की जगह एलएमवी लाइसेंस

बसों के ड्राइवर और खलासी ड्रेस में नहीं दिखे और न ही नेम प्लेट लगाये हुए थे. विवेकानंद विद्या मंदिर, केराली स्कूल, डीएवी बरियातू एवं संत थॉमस स्कूल की कई बसें बिना लाइसेंस ही चलायी जा रही है़ं संत थॉमस स्कूल के एक बस ड्राइवर के पास हैवी की जगह एलएमवी लाइसेंस मिला़

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इन बसों में ओवरलोड की शिकायत

कई स्कूलों में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाये गये थे़ यही नहीं, कई बच्चे बोनट (ड्राइवर के पास) पर भी बैठे दिखे. डीपीएस, सेक्रेड हार्ट स्कूल, केराली, टेंडर हर्ट और सफायर इंटरनेशनल की बस में ओवरलोडिंग दिखी़

बस संचालकों और स्कूलों को भेजा गया था पत्र

कोरोना काल के बाद डीटीओ कार्यालय ने स्कूली बसों के संचालकों और स्कूलों को एक पत्र भी भेजा था़ इसमें निर्देश दिया गया था कि सुरक्षा मानकों का ख्याल रखते हुए सभी चीजों को अपडेट कर लें. डीटीओ प्रवीण कुमार प्रकाश ने कहा कि जिन स्कूलों बसों की जांच की गयी है और उनमें जाे भी लापरवाही सामने आयी है, उसे लेकर सभी को नोटिस भेजा जायेगा़

डीटीओ ने कहा कि स्कूल कैंपस में बसों की स्थिति की जांच होगी़ इस दौराप सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रम होंगे. जांच अभियान में रोड इंजीनियर एनालिस्ट गौरव, डीआरएसएम मो़ जमाल असरफ खान, आइटी असिस्टेंट अभय कुमार, धान सिंह पूर्ति, ओम प्रकाश, दीपक आदि शामिल थे.

कई बसों में क्षमता से अधिक बैठाये गये थे विद्यार्थी
  • 98 स्कूल हैं राजधानी में सीबीएसइ और आइसीएसइ से मान्यता प्राप्त

  • 600 बसों से प्रतिदिन विद्यार्थी स्कूल आना-जाना करते हैं

  • 1.65 लाख विद्यार्थी हैं सीबीएसइ-आइसीएसइ स्कूलों में

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