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वित्तीय गड़बड़ी का आरोपी बना कोऑपरेटिव बैंक का कार्यकारी सीइओ, जानें क्या है पूरा मामला

गड़बड़ी का आरोपी कोऑपरेटिव बैंक का कार्यकारी सीइओ बना. राजेश तिवारी के खिलाफ 2019 में दर्ज करायी गयी थी वित्तीय अनियमितता की प्राथमिकी. प्राथमिकी में ढाई साल बाद भी पुलिस ने सुपरविजन नहीं किया है

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
वित्तीय गड़बड़ी का आरोपी बना कोऑपरेटिव बैंक का कार्यकारी सीइओ
वित्तीय गड़बड़ी का आरोपी बना कोऑपरेटिव बैंक का कार्यकारी सीइओ
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रांची : वित्तीय अनियमितता सहित अन्य प्रकार की गड़बड़ी के आरोपी राजेश तिवारी को कोऑपरेटिव बैंक का कार्यकारी मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (सीइओ) नियुक्त किया गया है. बैंक के प्रशासक के हस्ताक्षर से इससे संबंधित आदेश जारी किया जा चुका है. कार्यकारी सीइओ बनाये गये इस अधिकारी के खिलाफ कोतवाली थाना में वर्ष 2019 में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. वित्तीय अनियमितता के सिलसिले में दर्ज इस प्राथमिकी में ढाई साल बाद भी पुलिस ने सुपरविजन नहीं किया है.

बैंक प्रशासक द्वारा जारी आदेश में पहले यह कहा गया कि सीइओ/महाप्रबंधक का पद खाली रहने की वजह से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत राजेश तिवारी को बैंक का दैनिक नियमित काम करने के लिए अधिकृत किया जाता है. बाद में इस आदेश को संशोधित करते हुए राजेश तिवारी को बैंक का कार्यकारी सीइओ बना दिया गया.

इसमें कहा गया कि बैंक में नियमित सीइओ की नियुक्ति होने तक राजेश कुमार तिवारी प्रभारी मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पदनाम से बैंक के नियमित दैनिक कार्यों का निष्पादन करेंगे.

झारखंड राज्य कोऑपरेटिव बैंक (शहीद चौक) में मरम्मत और साज सज्जा के नाम पर गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद कृषि पशुपालन व सहकारिता विभाग ने मामले की जांच का आदेश दिया था. जांच के लिए तत्कालीन निबंधक सहयोग समितियां श्रवण सोय को जांच समिति का अध्यक्ष बनाया गया था और समिति में चार सदस्यों को शामिल किया गया था.

समिति ने जांच के बाद राज्य कोऑपरेटिव बैंक में मरम्मत और साज सज्जा के नाम पर वित्तीय अनियमितता की पुष्टि करते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी. इसमें यह कहा गया था कि बैंक के तत्कालीन अधिकारियों ने विभागीय स्तर पर मरम्मत का काम कराने के उद्देश्य से प्राक्कलन में ठेकेदार की मार्जिन मनी को शामिल नहीं किया था. साथ ही काम को अपने अधिकार के दायरे में लाने के लिए उसे कई हिस्सों में बांट दिया था.

1.23 करोड़ के कुल काम को छह हिस्सों में बांट कर प्राक्कलन तैयार कराया. मापी पुस्तिका और भुगतान से संबंधित दस्तावेज की जांच में काम से अधिक का भुगतान किया गया. गड़बड़ी के इस मामले में फरवरी 2019 में राजेश तिवारी व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी.

Posted by : Sameer Oraon

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