झारखंड हाईकोर्ट ने निर्दोष अभ्यर्थियों को परेशानी से बचाने के लिए बनाया 'सुरक्षा कवच', रिटायर्ड जज करेंगे निगरानी

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झारखंड हाईकोर्ट

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झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रिया रद्द होने और सेवा समाप्ति के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने निर्दोष अभ्यर्थियों को उत्पीड़न से बचाने के लिए रिटायर्ड जज गौतम कुमार चौधरी को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को होगी.

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रांची : झारखंड हाईकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा JPSC-JSSC के अभ्यर्थियों की रद्द की गई नियुक्ति और उन सभी की सेवा समाप्ति के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने सभी संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए मामले में बड़ा निर्देश दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि मुख्य मुद्दा सरकार की उस अधिसूचना की वैधता तय करना है, जिसके तहत पूरी चयन प्रक्रिया रद्द कर दी गई और बहाल कर्मचारियों की नौकरी समाप्त हो गई. इसके अलावा अदालत ने निर्दोष अभ्यर्थियों के उत्पीड़न की आशंका दूर करने के लिए बेहद जरूरी कदम उठाया है. उन्होंने इसके लिए एक ऑब्जर्वर की तैनाती की है. मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे तय की गई है.

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अभ्यर्थियों के उत्पीड़न की आशंका पर हाईकोर्ट की पहल

सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा निर्दोष अभ्यर्थियों को भी समन भेजकर परेशान किया जा रहा है. इस पर राज्य सरकार के वकीलों ने तर्क दिया कि कानून के तहत जांच अधिकारी किसी भी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुला सकते हैं. हालांकि, अभ्यर्थियों के मन से उत्पीड़न का डर दूर करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने बीच का रास्ता निकाला है.

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रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी बने जांच के ऑब्जर्वर

हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त जज जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को एसआईटी जांच की निगरानी और ऑब्जर्वर (Monitor/Observer) के रूप में नियुक्त किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अभ्यर्थी को समन मिलता है तो उसे जांच में पूरा सहयोग करना होगा. लेकिन अगर किसी अभ्यर्थी को उत्पीड़न या बेवजह दबाव की शिकायत है, तो वह रिटायर्ड जज के समक्ष अपनी बात रख सकता है. शिकायत सही पाए जाने पर जज एसआईटी प्रमुख को सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश देंगे.

अंतरिम राहत रहेगी जारी, राज्य सरकार देगी खर्च

अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऑब्जर्वर की नियुक्ति से एसआईटी की स्वतंत्र जांच में कोई रुकावट नहीं आएगी और न ही यह जांच पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी है. रिटायर्ड जज के मानदेय और कार्यालय संबंधी सभी खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. इसके साथ ही अदालत ने पूर्व में दिए गए अपने अंतरिम आदेश को अगली सुनवाई तक जारी रखने का निर्देश दिया है.

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