झारखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, CCL के मृत कर्मचारी की बहन को 6 सप्ताह में नौकरी देने का आदेश

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झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक रोशन. फोटो: प्रभात खबर

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झारखंड हाईकोर्ट ने CCL के एक महत्वपूर्ण मामले में मृत कर्मचारी की अविवाहित बहन को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश सुनाया है. अदालत ने CCL के तीन अस्वीकृति आदेशों को रद्द कर दिया है.

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Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने CCL में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मृत कर्मचारी की अविवाहित बहन को नौकरी देने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने CCL के तीन अस्वीकृति आदेशों को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारी को छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि NCWA-XI के तहत 11 जून 2024 से लागू संशोधन के बाद अविवाहित बहन भी आश्रित की श्रेणी में शामिल हो गई है और यदि आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर किया गया है तो उसका लाभ मिलना चाहिए.

क्या है पूरा मामला

रामगढ़ जिले के कुजू कॉलोनी निवासी अनीता देवी और उनकी बेटी स्मृति कुमारी ने CCL के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में बताया गया कि अनीता देवी के पुत्र और CCL कर्मी अंशु उरांव की 3 अगस्त 2023 को सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी. इसके बाद परिवार ने NCWA-XI के पैरा 9.3.0 के तहत स्मृति कुमारी के लिए अनुकंपा नियुक्ति की मांग की, लेकिन CCL ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि उस समय अविवाहित बहन आश्रित की परिभाषा में शामिल नहीं थी.

संशोधन के बाद फिर किया आवेदन

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि 11 जून 2024 को JBCCI की स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी ने NCWA-XI में संशोधन कर अविवाहित बहन को भी अप्रत्यक्ष आश्रित की श्रेणी में शामिल कर लिया. इसके बाद परिवार ने 18 जून 2024 और फिर 24 जुलाई 2024 को दोबारा आवेदन किया, जो कर्मचारी की मृत्यु से 18 महीने की निर्धारित समय सीमा के भीतर था. इसके बावजूद CCL ने संशोधन को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं मानते हुए दावा फिर से अस्वीकार कर दिया.

CCL ने रखा यह पक्ष

CCL की ओर से अदालत में कहा गया कि 11 जून 2024 का संशोधन केवल भविष्य के मामलों पर लागू होगा. कंपनी ने JBCCI की 9 दिसंबर 2024 की बैठक के मिनट्स का हवाला देते हुए दलील दी कि संशोधन को Prospective Effect यानी लागू होने की तारीख से ही प्रभावी माना जाएगा, इसलिए 2023 में हुई मृत्यु के मामले में इसका लाभ नहीं दिया जा सकता.

हाईकोर्ट ने क्या कहा

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने कहा कि संशोधन भले ही 11 जून 2024 से प्रभावी हुआ हो, लेकिन वह NCWA-XI का हिस्सा बन चुका था, जिसकी अवधि 1 जुलाई 2021 से 30 जून 2026 तक थी. अदालत ने माना कि जब संशोधन लागू होने के बाद और 18 महीने की समय सीमा के भीतर आवेदन किया गया, तब अविवाहित बहन आश्रित की परिभाषा में शामिल थी. इसलिए नियुक्ति से इनकार करना कानूनन सही नहीं है.

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छह सप्ताह में नियुक्ति का आदेश

हाईकोर्ट ने 22 मई 2024, 22 अगस्त 2024 और 19 मार्च 2025 के अस्वीकृति आदेशों को रद्द कर दिया. साथ ही CCL को निर्देश दिया कि स्मृति कुमारी को छह सप्ताह के भीतर अनुकंपा नियुक्ति का पत्र जारी किया जाए. अदालत के इस फैसले को NCWA-XI के तहत अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है.

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