Jharkhand Coal News: आम्रपाली कोल माइंस में CISF की तैनाती, 200 जवान संभालेंगे सुरक्षा

Updated:
विज्ञापन
WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

केंद्र सरकार ने कोयला चोरी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. चतरा स्थित आम्रपाली कोल माइंस की सुरक्षा अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) संभालेगी. 200 जवानों की तैनाती के साथ अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर अवैध खनन पर लगाम कसी जाएगी.

विज्ञापन

पंकज त्रिपाठी

विज्ञापन

Zero Coal Leakage Plan: चतरा स्थित नॉर्थ कर्णपुरा कोलफील्ड के आम्रपाली ओपेन कास्ट माइंस की सुरक्षा व्यवस्था 18 सितंबर से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के हवाले होगी. आम्रपाली प्रोजेक्ट राज्य की प्रमुख कोयला खदानों में शामिल है, जहां रोज करीब 70 हजार टन कोयले का उत्पादन होता है. खदान से बड़े पैमाने पर कोयले के कथित अवैध कारोबार की शिकायतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने यहां सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया है.

सीआईएसएफ के डीजी 17 सितंबर को झारखंड दौरे पर आ रहे हैं. वह 18 सितंबर को रांची पहुंचेंगे और यहीं से आम्रपाली प्रोजेक्ट की नई सुरक्षा व्यवस्था की शुरुआत करेंगे. फिलहाल आम्रपाली प्रोजेक्ट में सीआईएसएफ के 200 जवानों की तैनाती की गई है. आने वाले दिनों में जवानों की संख्या और बढ़ाई जाएगी. प्रोजेक्ट की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए डीआईजी स्तर के एक विशेष पद की भी व्यवस्था की गई है.

ये भी पढ़ें- JPSC और JSSC-CGL पेपर लीक जांच में CID ने चार को किया गिरफ्तार, कोचिंग संचालक से जुड़े तार

कोयला चोरी रोकने के लिए केंद्र ने बढ़ाई निगरानी

ज्ञात हो कि गृह मंत्री ने पिछले दिनों दिल्ली में झारखंड में कोयले की चोरी को लेकर चिंता जताई थी. इसे पूरी तरह रोकने के लिए जीरो कोल लीकेज अभियान चलाने की बात कही गई थी. इसके साथ ही कोयला चोरी के मामलों में कार्रवाई के लिए सीआईएसएफ को नए अधिकार भी दिए गए हैं. इसके बाद राज्य में कोयला खदानों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है.

एक आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, चतरा और हजारीबाग जिले की दो खदानों मगध और आम्रपाली से हर साल दो हजार करोड़ रुपए से अधिक के कोयले की चोरी होती है. इसे पूरी तरह रोकने के लिए सीआईएसएफ, राज्य पुलिस और कोयला कंपनी मिलकर काम कर रहे हैं. आम्रपाली में सीआईएसएफ की तैनाती को इसी कवायद का अहम हिस्सा माना जा रहा है.

ये भी पढ़ें- JPSC का काला इतिहास: CBI जांच से लेकर अध्यक्षों के जेल जाने तक, जानिए कैसे घोटालों की बलि चढ़ा युवाओं का भविष्य

जीरो कोल लीकेज प्लान के तहत उठाए जा रहे कदम

अवैध खनन और कोयला चोरी पर रोक लगाने के लिए जीरो कोल लीकेज अभियान के तहत खदानों की निगरानी और परिवहन व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा जा रहा है. इसके तहत ड्रोन पेट्रोलिंग, जीपीएस ट्रैकिंग और वेजब्रिज मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. हर ट्रक और डंपर की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है, जबकि वेजब्रिज के जरिए कोयले का सही वजन दर्ज किया जा रहा है.

अवैध गतिविधि का पता चलते ही कार्रवाई के लिए अलर्ट सिस्टम तैयार किया गया है. अभियान से जुड़ी पूरी व्यवस्था को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा गया है. पिछले दो माह में ही इस अभियान के तहत छह करोड़ रुपए से अधिक का अवैध कोयला जब्त किया गया है.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola