झारखंड के दो सिपाहियों के IPS बनने का सफर, वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने ऐसे की थी मदद

सरोजनी व एमेल्डा को आइपीएस 2017 बैच आवंटित किया गया है. सरोजनी व एमेल्डा खेल में प्रतिभा के बल पर दिसंबर 1986 में बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर बहाल हुईं थीं
झारखंड पुलिस सेवा के 24 अफसरों की प्रोन्नति आइपीएस में होने जा रही है. यूपीएससी व झारखंड के आला अधिकारियों की बैठक में इस पर सहमति बन गयी है. अधिसूचना की औपचारिकता बाकी है. इसमें सबसे ऊपर नाम है सरोजनी लकड़ा व एमेल्डा एक्का का. दोनों एथलीट हैं व लातेहार जिला (पूर्व में पलामू जिला) की रहने वाली हैं. इन्होंने खेल में अपनी प्रतिभा के दम पर सिपाही से आइपीएस तक का सफर तय किया है.
सरोजनी व एमेल्डा को आइपीएस 2017 बैच आवंटित किया गया है. सरोजनी व एमेल्डा खेल में प्रतिभा के बल पर दिसंबर 1986 में बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर बहाल हुई थीं. इसके बाद दोनों ने खेल में बेहतर प्रदर्शन किया. इसको देखते हुए दोनों को आउट ऑफ टर्म प्रमोशन देकर 1991 में सीधे इंस्पेक्टर बना दिया गया. वर्ष 2008 में इन्हें इंस्पेक्टर से डीएसपी में प्रोन्नति दी गयी. फिर 2019 में प्रोन्नत होकर दोनों एएसपी बनीं.
सरोजनी अपने समय की ऑलराउंडर एथलीट थीं. दौड़, हाइ जंप, लांग जंप व हेप्टाथलॉन में दर्जनों पदक जीत राज्य व देश का नाम रौशन किया. वर्तमान में सरोजनी वायरलेस डिपार्टमेंट में प्रभारी एसपी व खेल विभाग में बतौर निदेशक अपनी सेवा दे रही हैं. एमेल्डा एक्का 400 मीटर दौड़ में कई पदक जीत चुकी हैं. फिलवक्त वह एंटी करप्शन ब्यूरो में अपनी सेवा दे रही हैं.
सरोजनी बताती हैं कि उन दोनों की खेल प्रतिभा से प्रभावित होकर तत्कालीन आइपीएस व वर्तमान में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने सिपाही के पद पर बहाली में काफी सहयोग किया था. इनके अलावा दिशाेम गुरु शिबू सोरेन का भी इनको आशीर्वाद रहा. एडीजी रहे रेजी डुंगडुंग सहित विभागीय अधिकारियों ने भी सहयोग किया.
सरोजनी व एमेल्डा की प्रोन्नति पर वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि आज मुझे अपार खुशियां मिल रही है. यह मेरे लिए उपलब्धियों भरा दिन है. उन दिनों मैं एसएसपी था. तत्कालीन बिहार में एसके झा एआइजी थे. उन्होंने मेरे ऊपर भरोसा किया. खिलाड़ियों काे पुलिस सेवा में बहाल करने के लिए मुझे अधिकृत किया गया. जैप मैदान में मैंने होनहार खिलाड़ियों का चयन किया. सरकार ने मुझ पर भरोसा किया और सभी को नौकरी दी.
ये दोनों खिलाड़ी अपनी मेहनत के बल पर बने हैं. किसी ने इनकी पैरवी नहीं की है. खिलाड़ियों को इसी तरह तराश कर ताजमहल सा चमकाने की जरूरत है. इनको आगे बढ़ाने और सम्मान देने की जरूरत है. डॉ उरांव ने कहा कि राज्य सरकार को ऐसी नीति पर आगे बढ़ने की जरूरत है. इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा. खिलाड़ी कुछ सपनों के साथ मैदान में उतरते हैं. उनका भविष्य कैसे सुरक्षित हो, इसके लिए सरकार को सोचना चाहिए.
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By Prabhat Khabar News Desk
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