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विधानसभा में पेश होगा झारखंड प्रतियोगी परीक्षा विधेयक, जानें क्या है यह बिल

Updated at : 02 Aug 2023 7:02 AM (IST)
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विधानसभा में पेश होगा झारखंड प्रतियोगी परीक्षा विधेयक, जानें क्या है यह बिल

परीक्षा की प्रक्रिया में शामिल होनेवाली एजेंसियों, सरकारी कर्मचारियों द्वारा प्रश्न पत्र लीक करने या परीक्षा की गोपनीयता भंग करनेवाली जानकारी को सार्वजनिक करने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है

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आनंद मोहन, रांची :

झारखंड सरकार ने प्रतियोगिता परीक्षाओं में चोरी करने और करानेवालों के लिए तीन साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है. साथ ही एक करोड़ रुपये से दो करोड़ रुपये के दंड का प्रावधान किया गया है. चोरी करनेवाले परीक्षार्थियों को दी जानेवाली सजा का प्रभाव इतना अधिक होगा कि उनकी नौकरी करने की उम्र सीमा ही खत्म हो जायेगी. राज्य सरकार ने ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) विधेयक 2003 तैयार किया है.

इसका उद्देश्य परीक्षाओं में होनेवाली चोरी को रोकना है. कानून बनने के बाद यह विधेयक पूरे राज्य में लागू होगा. राज्य लोक सेवा आयोग,कर्मचारी चयन आयोग, भर्ती समितियों द्वारा आयोजित की जानेवाली परीक्षाओं, राज्य सरकार के लोक उपक्रमों द्वारा आयोजित परीक्षा के अलावा निगम और निकायों द्वारा आयोजित की जानेवाली परीक्षा पर यह लागू होगा. इस विधेयक में परीक्षार्थियों के अलावा,

परीक्षा की प्रक्रिया में शामिल होनेवाली एजेंसियों, सरकारी कर्मचारियों द्वारा प्रश्न पत्र लीक करने या परीक्षा की गोपनीयता भंग करनेवाली जानकारी को सार्वजनिक करने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है. इसके अलावा परीक्षा ड्यूटी में शामिल कर्मचारियों, उनके पारिवारिक सदस्यों या रिश्तेदारों को धमकी देने और परीक्षा के संबंध में गलत सूचना प्रचारित करने व अफवाह फैलानेे को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

दंड के प्रावधान : विधेयक में दंड के संबंध में किये गये प्रावधान के अनुसार, अगर कोई परीक्षार्थी नकल करते या कराते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे तीन साल की सजा होगी. साथ ही उस पर पांच लाख रुपये तक का दंड लगाया जा सकेगा. दंड की रकम नहीं चुकाने पर अतिरिक्त नौ महीने की सजा होगी. परीक्षार्थी के दूसरी बार चोरी करते या कराते पकड़े जाने पर सात साल की सजा होगी और 10 लाख रुपये दंड लगेगा.

परीक्षार्थी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दायर कर दो से पांच साल तक परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया जायेगा. न्यायालय द्वारा सजा होने पर संबंधित परीक्षार्थी 10 साल तक प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेगा. परीक्षा की प्रक्रिया में शामिल किसी कंपनी या एजेंसी द्वारा परीक्षा की गोपनीयता भंग करने, प्रश्न पत्र लीक करनेवालों को कम से कम 10 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा होगी. साथ ही एक करोड़ से लेकर दो करोड़ रुपये तक दंड लगेगा. दंड की रकम नहीं चुकाने पर अतिरिक्त तीन साल के कारावास की सजा होगी.

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