JBVNL: बिजली निगम को एक साल में 2088 करोड़ का घाटा, आयोग को सौंपा खाता

JBVNL: जेबीवीएनएल के एकाउंट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिजली बेचने से 5869.89 करोड़ रुपये मिले हैं. वहीं सरकार से अनुदान के रूप में 1077.65 करोड़ रुपये मिले हैं. यानी कुल आय 6947.55 करोड़ है.
रांची, सुनील चौधरी : झारखंड बिजली वितरण निगम (JBVNL) को एक साल में 2088 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग को जेबीवीएनएल ने नये टैरिफ के लिए ऑडिटेड एकाउंट सौंपा है. जिसमें इसका जिक्र किया गया है. जेबीवीएनएल ने इसे अपनी वेबसाइट पर भी डाला है. जिसमें बताया गया कि जितने की बिजली की खरीदी जाती है, उससे कम की आय है. जिसके कारण घाटा होता है.
जेबीवीएनएल के एकाउंट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिजली बेचने से 5869.89 करोड़ रुपये मिले हैं. वहीं सरकार से अनुदान के रूप में 1077.65 करोड़ रुपये मिले हैं. यानी कुल आय 6947.55 करोड़ है. जेबीवीएनएल द्वारा एक वर्ष में 6430.83 करोड़ की बिजली खरीदी गयी. इंप्लायी बेनिफिट पर खर्च 169.93 करोड़ रुपये है. फिनांस कॉस्ट 544.17 करोड़ है. मूल्य ह्लास और परिशोधन व्यय 1358.68 करोड़ रुपये हुआ है. अन्य खर्च के रूप में 432.30 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. कुल 9035.93 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. यानी आय से 2088.38 करोड़ रुपये अधिक खर्च हुए हैं. जेबीवीएनएल ने माना है कि एक साल में 2088.38 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है.
जेबीवीएनएल ने अपनी परिसंपत्ति का भी ब्योरा दिया है. जिसमें 32129.04 करोड़ की परिसंपत्ति दर्शायी गयी है. इस परिसंपत्ति में उपकरण, प्लांट आदि मिला कर 13972.36 करोड़ की है. 1942.49 करोड़ की लागत से अन्य काम चल रहे हैं.
जेबीवीएनएल ने आयोग के सौंपे टैरिफ पीटिशन में 16 से 25 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने की मांग की है. कहा गया है कि इससे घाटा काम होगा. यह भी कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों से जेबीवीएनएल का टैरिफ बढ़ा नहीं है. आयोग इस पर गंभीरता से विचार करते हुए जेबीवीएनएल को मांग के अनुरूप टैरिफ दें. हालांकि आयोग में अभी वित्तीय वर्ष 2023-24 के टैरिफ सुनवाई की कोई प्रक्रिया आरंभ नहीं की गयी है. वर्तमान में लंबित वित्तीय वर्ष 2021-22 के टैरिफ पर आयोग सुनवाई करेगा. जल्द ही इसके लिए जन सुनवाई की जायेगी.
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जेबीवीएनएल के अनुसार बिजली खरीदने और बेचने में निगम को प्रतिदिन 5.72 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. जेबीवीएनएल का एटीएंडसी लॉस 33 प्रतिशत है. जो राष्ट्रीय औसत 16.87 प्रतिशत से लगभग दोगुना है.
जेबीवीएनएल के अनुसार घाटे के पांच प्रमुख कारण है. जेबीवीएनएल के पास कुल 48.82 लाख उपभोक्ता है. इनमें 34.32 लाख ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता हैं. इनमें भी 14 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं, जो दूरस्थ वन क्षेत्र में रहते हैं. इसके अलावा एचटी/एलटी रेशियों का कम होना. लो पावर फैक्टर भी शामिल है. यह भी कहा गया है कि ज्यादातर एचटी उपभोक्ता डीवीसी, जुस्को और टाटा स्टील के क्षेत्र में होने के कारण उनके उपभोक्ता हैं. जिसके कारण निगम को घाटा होता है.
निगम ने कहा कि राज्य के सभी उपभोक्ताओं के घर में स्मार्ट मीटर लगाकर बिलिंग दक्षता में सुधार किया जायेगा. पहले चरण में 13.72 लाख घरों में मीटर बदले जायेंगे. ट्रांसफारमर और फीडर में भी मीटर लगाये जा रहे हैं. नंगी तारों की जगह 32 हजार सर्किट किमी के करीब कवर्ड तार लगाये जायेंगे. इसके अलावा 72 कृषि फीडर भी अलग किये जायेंगे. इस तरह घाटा कम करने के प्रयास किये जा रहे हैं.
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