रांची रेल मंडल में हाई-टेक हुई ट्रेनों की सुरक्षा, लोदमा में लगा WILD सिस्टम, हादसों से बचाएंगी ये 2 आधुनिक तकनीक
झारखंड में हादसों से बचाएगा ये 2 आधुनिक तकनीक, Pic Credit- AI, Only For Symbolism
रांची रेल मंडल में ट्रेनों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. लोदमा स्टेशन पर 'व्हील इंपैक्ट लोड डिटेक्टर' (WILD) और 'हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्शन' (HABD) जैसी प्रणालियाँ ट्रेनों के पहियों की निगरानी करेंगी और खराबी का समय पर पता लगाकर दुर्घटनाओं को रोकेंगी.
रांची: रांची रेल मंडल में ट्रेनों की संरक्षा (दुर्घटनाओं से बचाव) और यात्रियों की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए अत्याधुनिक रेलवे तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया जा रहा है. इसी कड़ी में मंडल के लोदमा स्टेशन के पास 'व्हील इंपैक्ट लोड डिटेक्टर' (WILD) तकनीक स्थापित की जा रही है, जिसे चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रमुख स्टेशनों पर भी लगाया जाएगा. इसके साथ ही 'हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्शन' (HABD) प्रणाली को रांची मंडल के 9 रेल सेक्शनों में चालू कर दिया गया है, जबकि 15 अन्य सेक्शनों में इसे स्थापित करने का काम जोरों पर चल रहा है.
क्या है WILD तकनीक और कैसे सुरक्षित रखेगी रेल के पहिए?
वाइल्ड (WILD) रेलवे ट्रैक पर लगाई जाने वाली एक अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली है. इसका मुख्य कार्य चलती हुई ट्रेन के पहियों पर पड़ने वाले असामान्य दबाव और भार की पहचान करना है. यह प्रणाली ट्रैक पर लगे विशेष लोड सेंसर और डेटा प्रोसेसिंग यूनिट के जरिए काम करती है. ट्रेन गुजरते वक्त यदि किसी पहिये में फ्लैटनेस, टूट-फूट या असमानता पाई जाती है, तो सेंसर तुरंत उसका डेटा कंप्यूटर सिस्टम को भेज देते हैं. निर्धारित सीमा से अधिक इंपैक्ट लोड मिलने पर सॉफ्टवेयर संबंधित कोच और पहिये की लोकेशन के साथ ऑटोमैटिक रिपोर्ट जनरेट कर देता है, जिससे समय रहते पहिये की मरम्मत या बदलाव संभव हो पाता है.
ये भी पढ़ें: JSSC CGL Exam: 99 अधिकारियों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत, बर्खास्तगी की अधिसूचना पर लगाई रोक
ओवरहीटिंग और बेयरिंग फेलियर पर बजाएगा अलार्म
संरक्षा को मजबूत करने के लिए रांची मंडल के हारूबेरा, सुईसा, टांगरबसली, टाटीसिलवे, गंगाघाट, झालदा (अप व डाउन) और पोकला (अप व डाउन) जैसे 9 सेक्शनों में एचएबीडी (HABD) तकनीक काम कर रही है. यह प्रणाली ट्रैक के किनारे लगे इन्फ्रारेड सेंसर की मदद से चलती ट्रेन के एक्सल बॉक्स और बेयरिंग के तापमान को मापती है. यदि घर्षण या लुब्रिकेशन की कमी से किसी बेयरिंग का तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है, तो सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम में अलार्म जारी कर देता है. इससे पहिया जाम होने, एक्सल टूटने और ट्रेन के बेपटरी होने का खतरा टल जाता है.
हालिया हादसों के बाद संरक्षा पर विशेष ध्यान
हाल के दिनों में रांची रेल मंडल में कई डिरेलमेंट की घटनाएं देखने को मिली थीं. अगस्त 2026 में सिल्ली-बोकारो रेलखंड पर श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन की बोगी और मुरी में मेला स्पेशल ट्रेन बेपटरी हुई थी. इससे पूर्व अक्टूबर 2025 में कानारोवां के पास मालगाड़ी और सितंबर 2024 में मुरी-सुईसा क्षेत्र में दो इंजन पटरी से उतर गए थे. इन घटनाओं से सबक लेते हुए रांची रेल मंडल के डीआरएम करुणानिधि सिंह ने बताया कि संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. WILD और HABD जैसी तकनीकों के व्यापक प्रयोग से भविष्य में रेल दुर्घटनाओं में बड़ी कमी आएगी और ट्रेनों का परिचालन सुरक्षित व सुगम होगा.
ये भी पढ़ें: अब रोजमर्रा की जरूरतों से तय होगी न्यूनतम मजदूरी, श्रम विभाग ने तैयार किया नया ड्राफ्ट
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए