अब रोजमर्रा की जरूरतों से तय होगी न्यूनतम मजदूरी, श्रम विभाग ने तैयार किया नया ड्राफ्ट
अब परिवार की जरूरतों के हिसाब से तय होगी न्यूनतम मजदूरी
झारखंड में न्यूनतम मजदूरी तय करने का तरीका बदलने वाला है. अब श्रमिक परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें, जैसे भोजन, कपड़ा, शिक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर मजदूरी तय की जाएगी. श्रम विभाग ने नया ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें कई अहम बदलाव शामिल हैं.
रांचीः झारखंड में अब न्यूनतम मजदूरी सिर्फ एक तय रकम नहीं होगी, बल्कि श्रमिक परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की जाएगी. श्रम विभाग ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मजदूरी, काम के घंटे, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम, वेतन कटौती और बोनस भुगतान को लेकर नया ड्राफ्ट तैयार किया है.
इस ड्राफ्ट में चार सदस्यों वाले मानक श्रमिक परिवार को आधार बनाया गया है. इसमें पति, पत्नी और दो बच्चों वाले परिवार को शामिल किया गया है. न्यूनतम मजदूरी तय करते समय भोजन, कपड़ा, आवास, ईंधन-बिजली, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और आकस्मिक खर्च को भी शामिल करने का प्रावधान किया गया है.
ड्राफ्ट के अनुसार, एक श्रमिक परिवार के लिए आवास किराया तथा ईंधन और बिजली जैसी जरूरतों पर न्यूनतम मजदूरी का 20 फीसदी हिस्सा खर्च होना अनिवार्य माना गया है. वहीं, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और आकस्मिक खर्च के लिए न्यूनतम मजदूरी का 25 फीसदी हिस्सा निर्धारित किया गया है.
सप्ताह में 48 घंटे काम, सामान्य कार्य दिवस आठ घंटे
ड्राफ्ट में काम की साप्ताहिक सीमा 48 घंटे तय की गई है. सामान्य कार्य दिवस आठ घंटे का होगा. इसमें काम और विश्राम का कुल अंतराल एक घंटे से अधिक नहीं होगा. छह दिन के कार्य सप्ताह में आमतौर पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा. यदि कोई श्रमिक विश्राम के दिन भी काम करता है, तो उसे इसके बदले दूसरा विश्राम दिन यानी कम्पेन्सेटरी ऑफ दिया जाएगा.
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150 फीसदी से अधिक नहीं हो सकेगी कटौती
नियोक्ता द्वारा मनमाने ढंग से वेतन काटने के नियम में भी बदलाव किए गए हैं. यदि कुल कटौतियां कर्मचारी की मजदूरी के 50 फीसदी से अधिक हो जाती हैं, तो अतिरिक्त राशि को अगली मजदूरी अवधि में किस्तों में वसूला जाएगा.
कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के बोनस की गणना को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. छठे और सातवें लेखा वर्ष के लिए सेट ऑन या सेट ऑफ की गणना अनुसूची 'क' के तहत पांचवें, छठे और सातवें लेखा वर्ष के सरप्लस को ध्यान में रखकर की जाएगी. अगर किसी लेखा वर्ष में बोनस सीमा से अधिक होता है, तो कुल वेतन के 20 फीसदी की सीमा के अधीन इसे आगामी वर्षों में बढ़ाया जा सकेगा.
महिला कामगार के लिए रखना होगा अलग रजिस्टर
झारखंड सरकार ने राज्य में असंगठित कामगारों, नियोक्ताओं और औद्योगिक संस्थानों के लिए सामाजिक सुरक्षा नियमावली के प्रावधानों को स्पष्ट कर दिया है. नए नियमों में श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के साथ नियोक्ताओं की जिम्मेदारी, रोजगार कार्यालयों के दायित्व, महिलाओं के लिए विशेष रजिस्टर, रिक्तियों की रिपोर्टिंग और सामाजिक सुरक्षा कल्याण कोष के संचालन की व्यवस्था की गई है. नियमों का पालन संबंधित नियोक्ताओं और प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्य होगा.
प्रत्येक प्रतिष्ठान को हर वर्ष फरवरी की पहली तारीख या उससे पहले पिछले वर्ष का एकीकृत वार्षिक रिटर्न फॉर्म ऑनलाइन अपलोड करना होगा. प्रतिष्ठान बंद होने या उसकी बिक्री की स्थिति में एक माह के भीतर रिटर्न देना होगा.
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प्रखंड स्तर तक करियर सेंटर बनाएगी सरकार
राज्य सरकार प्रखंड स्तर तक करियर सेंटर की स्थापना, संचालन और रखरखाव करेगी. सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं को किसी पद पर नियुक्ति से पहले संबंधित रिक्तियों की सूचना करियर सेंटर को देना अनिवार्य होगा. रिक्तियों की जानकारी निर्धारित फॉर्म में देनी होगी. चयन के 15 दिनों के भीतर चयनित अभ्यर्थियों के परिणाम की रिपोर्ट भी निर्धारित फॉर्म में देनी होगी.
छह माह में विवाद निबटाने का प्रयास
नियमावली के तहत राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सक्षम प्राधिकारी अपने-अपने क्षेत्राधिकार में मामलों की सुनवाई करेंगे. राहत के लिए दिए गए आवेदनों पर विरोधी पक्ष को नोटिस तामील होने की तारीख से छह माह के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा.
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