हिनू रास्ता विवाद: झारखंड हाईकोर्ट ने क्यों कहा- कोई किसी के मौलिक अधिकार पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता

Updated at : 29 Mar 2022 7:04 AM (IST)
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हिनू रास्ता विवाद: झारखंड हाईकोर्ट ने क्यों कहा- कोई किसी के मौलिक अधिकार पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता

झारखंड हाईकोर्ट ने हिनू रास्ता विवाद मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि किसी के मौलिक अधिकार में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है. उन्होंने सरकार और रांची नगर निगम के जवाब को देखते हुए मामले को निष्पादित कर दिया

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रांची: झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने हिनू में रास्ता विवाद मामले में दायर क्रिमिनल रिट याचिका पर सोमवार को सुनवाई की. अदालत ने राज्य सरकार और रांची नगर निगम के जवाब को देखते हुए मामले को निष्पादित कर दिया. अदालत ने कहा कि किसी के मौलिक अधिकार में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है.

यदि रास्ता है, तो उसे बंद नहीं किया जा सकता है. जहां तक मालिकाना हक की बात है, तो कोर्ट यहां मालिकाना हक डिसाइड नहीं कर रहा है. मालिकाना हक के लिए हस्तक्षेपकर्ता सक्षम अदालत में जा सकते हैं. अदालत ने हस्तक्षेपकर्ता के खिलाफ एक लाख रुपये का हर्जाना लगाने का आदेश दिया.

अधिवक्ता के व्यवहार पर नाराजगी जतायी :

हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ता का कोर्ट के प्रति व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने मामले को झारखंड स्टेट बार काउंसिल को रेफर कर दिया. अदालत ने वर्ष 2003 की खंडपीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि रांची नगर निगम का अस्तित्व है. इससे पूर्व प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि रास्ता खुल गया है. रांची नगर निगम की ओर से वरीय अधिवक्ता आरएस मजूमदार ने पक्ष रखते हुए बताया कि अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए चहारदीवारी हटा दी गयी है. राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता वंदना सिंह ने पक्ष रखा.

संविधान के प्रावधान का दिया हवाला :

हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कौशलेंद्र प्रसाद ने पक्ष रखते हुए संविधान के प्रावधान का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि झारखंड के शिड्यूल एरिया में नगरपालिका अधिनियम लागू नहीं होगा. रांची नगर निगम का कोई अस्तित्व नहीं है. उन्होंने अदालत से अपने पूर्व के आदेश को वापस लेने का आग्रह किया.

ज्ञात हो कि प्रार्थी गीता देवी व अन्य की ओर से क्रिमिनल रिट याचिका दायर कर हिनू में उनके घर के सामने बंद रास्ते को खुलवाने की मांग की गयी थी. प्रार्थियों का कहना था कि वर्ष 1954-55 से वह रह रहे हैं. घर के सामने रास्ते का वह उपयोग करते हैं. कुछ स्थानीय लोगों ने चहारदीवारी खड़ी कर रास्ते को बंद कर दिया है. पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने निगम को चहारदीवारी तोड़ने का आदेश दिया था. इसके बाद निगम ने चहारदीवारी तोड़ कर रास्ता खोला था.

Posted By: Sameer Oraon

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